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नई दिल्ली में छा गई मध्य प्रदेश की बाग प्रिंट, विदेशी मेहमानों ने खुद लगाए ठप्पे

नई दिल्ली में छा गई मध्य प्रदेश की बाग प्रिंट, विदेशी मेहमानों ने खुद लगाए ठप्पे

नई दिल्ली के प्रतिष्ठित भारत मंडपम में इन दिनों वैश्विक कूटनीति के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और लोक कलाओं का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। दुनिया के तमाम बड़े देशों के नेता और प्रतिनिधि जब भारत की मेहमाननवाजी का लुत्फ उठा रहे हैं, ठीक उसी वक्त देश की पारंपरिक कलाएं वैश्विक मंच पर अपनी गहरी छाप छोड़ रही हैं। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश के धार जिले की विश्व प्रसिद्ध 'बाग प्रिंट' कला ने ब्रिक्स बाजार में ऐसा जादू बिखेरा है कि विदेशी मेहमान भी इसकी बारीकियां सीखने के लिए खुद को रोक नहीं पाए।

प्राकृतिक रंगों और नक्काशी का बेजोड़ संगम

बाग प्रिंट केवल एक कपड़ा छपाई की कला नहीं है, बल्कि यह मध्य प्रदेश की सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत का जीवंत दस्तावेज है। प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल और लकड़ी के बेहद बारीक नक्काशीदार ब्लॉक्स से तैयार होने वाले इस हस्तशिल्प ने हमेशा से देश-दुनिया के कला प्रेमियों को आकर्षित किया है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के अवसर पर सजे इस विशेष बाजार में जब अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने इस प्राचीन कला को अपनी आंखों से देखा, तो वे इसकी सादगी और सुंदरता के कायल हो गए।

यहाँ आने वाले मेहमानों को इस बात से विशेष रूप से रूबरू कराया गया कि कैसे प्रकृति की गोद से मिलने वाले रंगों और बिना किसी केमिकल के इस पारंपरिक शिल्प को जीवित रखा गया है। आधुनिकता की अंधी दौड़ के बीच आज भी अपनी मूल जड़ों से जुड़ी यह कला पर्यावरण के अनुकूल होने के कारण विदेशी मेहमानों के बीच चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई है।

जब विदेशी प्रतिनिधियों ने थामे लकड़ी के ठप्पे

ब्रिक्स बाजार का सबसे दिलचस्प पल वह था जब विभिन्न देशों से आए उच्चस्तरीय प्रतिनिधियों ने केवल मूक दर्शक बने रहने के बजाय खुद इस कला को आजमाने का फैसला किया। बाग प्रिंट के स्टॉल पर पहुंचकर इन विदेशी मेहमानों ने पारंपरिक ब्लॉक प्रिंटिंग की प्रक्रिया को बेहद करीब से परखा और इसकी तकनीकी बारीकियों को समझा।

इतना ही नहीं, कई प्रतिनिधियों ने तो खुद लकड़ी के नक्काशीदार ठप्पों को प्राकृतिक रंगों में डुबोया और कपड़े पर अपने हाथों से प्रिंटिंग की। इस खास मौके के लिए आयोजकों द्वारा विशेष रूप से 'ब्रिक्स' लोगो वाले लकड़ी के ब्लॉक्स तैयार किए गए थे। विदेशी मेहमानों ने इन विशेष ब्लॉक्स से कपड़े पर ठप्पे लगाए और अपने हाथों से तैयार किए गए उन कपड़ों को एक अनमोल स्मृति-चिह्न के रूप में अपने साथ अपने देश लेकर गए।

मोहम्मद बिलाल खत्री के हुनर का कमाल

इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर मध्य प्रदेश की इस लोक कला का जीवंत प्रदर्शन राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित जाने-माने शिल्पकार मोहम्मद बिलाल खत्री द्वारा किया जा रहा है। धार जिले के इस हुनरमंद कलाकार ने अपनी पीढ़ियों से चली आ रही इस विरासत को न केवल संजोकर रखा है, बल्कि वैश्विक पटल पर इसे एक नई पहचान दिलाई है।

विदेशी मेहमानों द्वारा उनके स्टॉल पर लंबी कतारें लगाना और इस कला की गहराई को समझना इस बात का प्रमाण है कि दुनिया अब सस्टेनेबल और पारंपरिक उत्पादों की ओर तेजी से आकर्षित हो रही है। बिलाल खत्री का यह प्रदर्शन भारतीय शिल्पकारों के आत्मविश्वास को और अधिक मजबूत करने वाला साबित हो रहा है।

वैश्विक मानचित्र पर मध्य प्रदेश की एक और बड़ी उपलब्धि

भारत सरकार और राज्य प्रशासन के प्रयासों से स्थानीय कलाओं को जो वैश्विक मंच मिल रहा है, उसका असर अब साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। ब्रिक्स बाजार में ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, वियतनाम, ईरान, कजाकिस्तान, इंडोनेशिया, मलेशिया, बेलारूस और इथियोपिया जैसे तमाम प्रमुख देशों के कलाकार और प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। ऐसे बहुराष्ट्रीय और वृहद मंच पर बाग प्रिंट की गूंज सुनाई देना मध्य प्रदेश के कला जगत के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रदर्शनों से न केवल पारंपरिक शिल्पकारों को आर्थिक मजबूती मिलती है, बल्कि वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की डिमांड भी बढ़ती है। धार के छोटे से कस्बे से शुरू हुई बाग प्रिंट की यह यात्रा आज दुनिया के कोने-कोने तक अपनी अमिट छाप छोड़ रही है, जो हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है।

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रोली सिंह

रोली सिंह

Writer (स्थानीय खबरें)

रोली सिंह पिछले 2 सालों से पत्रकारिता और न्यूज़ रिपोर्टिंग से जुड़ी हैं। वह लोकल न्यूज़ और लोगों से जुड़े मुद्दों को पढ़ने वालों तक पहुंचाने का काम...

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