बचपन के दिनों की वह सुनहरी यादें, जब पासा फेंकने के साथ ही सांप के काटने पर नीचे आ जाने का डर और सीढ़ी मिलने पर सीधे ऊपर पहुँचने की खुशी हर किसी के चेहरे पर मुस्कान ले आती थी। इस पारंपरिक और लोकप्रिय बोर्ड गेम ने एक बार फिर बड़ों के दिलों में वही पुराना उत्साह जगा दिया है। अवसर था रामगढ़ शहर में आयोजित हो रहे श्री अग्रसेन जयंती महोत्सव का, जहाँ सोमवार को पारंपरिक खेलों के जरिए अनोखा रोमांच देखने को मिला।
चट्टी बाजार की मारवाड़ी धर्मशाला में गूंजा उत्साह का शोर
रामगढ़ के व्यस्त और प्रसिद्ध चट्टी बाजार स्थित श्री मारवाड़ी धर्मशाला का सभागार सोमवार को किसी सामान्य दिन की तरह नहीं, बल्कि एक अजब-गजब ऊर्जा से सराबोर था। मौका था श्री अग्रसेन जयंती महोत्सव के दूसरे दिन के आयोजनों का। यहाँ आयोजित ओपन वर्ग की 'सांप-सीढ़ी' (Snake and Ladder) प्रतियोगिता ने हर उम्र के लोगों को अपनी तरफ आकर्षित किया।
डिजिटल युग के इस दौर में जहाँ आज की पीढ़ी मोबाइल स्क्रीन पर वीडियो गेम्स खेलने में व्यस्त रहती है, वहीं इस पारंपरिक बोर्ड गेम ने साबित कर दिया कि आमने-सामने बैठकर खेलने वाले खेलों का रोमांच आज भी कम नहीं हुआ है। प्रतियोगिता की शुरुआत होते ही सभागार का माहौल पूरी तरह से जीवंत हो उठा। पासा फेंकने की खड़खड़ाहट और हर चाल पर मिलने वाली प्रतिक्रियाओं ने पूरे हॉल में एक उत्सव जैसा माहौल बना दिया।
90 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा, कांटे की टक्कर
इस ओपन प्रतियोगिता की सबसे खास बात यह रही कि इसमें समाज के अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। युवा हों या बुजुर्ग, सभी ने इस खेल में अपनी किस्मत और रणनीति का परीक्षण किया। कुल 90 प्रतिभागियों की मौजूदगी ने इस आयोजन को बेहद प्रतिस्पर्धी और रोमांचक बना दिया।
खेल के नियमों के तहत जैसे-जैसे पासे फेंके जा रहे थे, वैसे-वैसे खिलाड़ियों की सांसें थमती जा रही थीं। कई बार ऐसा मौका आया जब जीतने की कगार पर बैठा खिलाड़ी अचानक सांप के मुँह में आ गिरा और सबसे नीचे पहुँच गया, जिससे दर्शकों के बीच हंसी और ठहाकों का दौर शुरू हो जाता था। वहीं, सीढ़ी मिलने पर खिलाड़ियों के चेहरे की खुशी देखने लायक थी। इस रोमांचक मुकाबले ने हर किसी को अपने बचपन के दिनों की याद दिला दी।
पीढ़ी दर पीढ़ी जोड़ने का अनूठा प्रयास
आयोजकों का मुख्य उद्देश्य इस प्रकार के आयोजनों के जरिए समाज के सभी आयु वर्ग के लोगों को एक मंच पर लाना और आपसी सौहार्द को बढ़ावा देना था। त्योहारों और जयंतियों के मौके पर इस तरह के पारंपरिक खेलों का आयोजन न केवल पुरानी संस्कृति को जीवित रखता है, बल्कि डिजिटल स्क्रीन से दूर अपनों के साथ बैठकर वक्त बिताने का अवसर भी प्रदान करता है।
इस पूरी प्रतियोगिता को सफलता के शिखर तक पहुँचाने में आयोजकों की टीम ने दिन-रात मेहनत की। प्रतियोगिता के सफल संचालन की जिम्मेदारी संयोजक के रूप में निखिल गोयल और उज्ज्वल बरेलिया ने बखूबी संभाली। उनके कुशल प्रबंधन के कारण ही 90 प्रतिभागियों की इतनी बड़ी भीड़ को संभालना और खेल को सुचारू रूप से चलाना संभव हो सका।
प्रमुख चेहरों की मौजूदगी ने बढ़ाया उत्साह
कार्यक्रम को सफल बनाने और प्रतिभागियों का हौसला बढ़ाने में समाज के तमाम वरिष्ठ पदाधिकारियों और गणमान्य नागरिकों ने अहम भूमिका निभाई। इस अवसर पर समाज के अध्यक्ष नानूराम गोयल, उपाध्यक्ष विकास शाह, मंत्री शंकर लाल अग्रवाल, संयुक्त मंत्री रोहित पंसारी, और कोषाध्यक्ष दीपक पंसारी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
इसके साथ ही जयंती संयोजक उज्ज्वल बरेलिया और निखिल गोयल के अलावा कार्यकारिणी के सक्रिय सदस्य संजीव बरेलिया, आशीष अग्रवाल, उमेश राजगढ़िया, विकास केडिया और अरुण गोयल ने व्यवस्थाओं को संभालने में पूरा सहयोग दिया। समाज के अन्य वरिष्ठ व गणमान्य लोगों में शिव कुमार अग्रवाल, मुरारी लाल अग्रवाल, दिनेश पोद्दार, और सिंपल बरेलिया सहित भारी संख्या में स्थानीय लोग इस अनूठे आयोजन के गवाह बने।
परंपरा और आधुनिकता का सुंदर मेल
आज के दौर में जब हर चीज़ आधुनिक होती जा रही है, रामगढ़ के इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि हमारी संस्कृति और पारंपरिक खेल आज भी लोगों को एकजुट करने की ताकत रखते हैं। श्री अग्रसेन जयंती महोत्सव के इस दूसरे दिन की सफलता ने आने वाले अन्य कार्यक्रमों के लिए भी उम्मीदों को और बढ़ा दिया है।
प्रतियोगिता के समापन के दौरान सभी प्रतिभागियों और विजेताओं के चेहरों पर जो संतुष्टि और खुशी दिखाई दी, उसने यह बता दिया कि जीत-हार से ऊपर उठकर इस खेल का हिस्सा बनना ही अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि थी। रामगढ़ का यह आयोजन आने वाले दिनों में भी शहरवासियों के बीच चर्चा का विषय बना रहेगा।