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90 साल के जापानी बॉडीबिल्डर ने जीता नेशनल खिताब, क्या है उनकी डाइट का राज़?

90 साल के जापानी बॉडीबिल्डर ने जीता नेशनल खिताब, क्या है उनकी डाइट का राज़?

उम्र सिर्फ एक नंबर है, इस कहावत को जापान के 90 वर्षीय तोशिसुक कनाज़ावा (Toshisuke Kanazawa) ने एक बार फिर पूरी दुनिया के सामने सच साबित कर दिखाया है। इस उम्र में जहां ज्यादातर लोग अपनी सेहत और बीमारियों से जूझते नजर आते हैं, वहीं कनाज़ावा ने हाल ही में अपना 19वां नेशनल बॉडीबिल्डिंग खिताब अपने नाम कर लिया है। उनकी इस गजब की फिटनेस और स्टैमिना ने केवल खेल जगत को ही नहीं, बल्कि मेडिकल साइंस और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स को भी हैरान कर दिया है।

तोशिसुक कनाज़ावा की इस शारीरिक क्षमता के पीछे उनकी कड़ी मेहनत के साथ-साथ उनका खान-पान और जीवनशैली सबसे अहम भूमिका निभाती है। 90 की उम्र में भी उनका शरीर जिस तरह से तराशा हुआ और मजबूत है, उसके पीछे उनकी खास शाकाहारी डाइट है। आइए विस्तार से जानते हैं कि उनकी इस डाइट में ऐसा क्या खास है जो उन्हें इस उम्र में भी ऊर्जावान बनाए रखता है।

कैसी है 90 साल के कनाज़ावा की डेली डाइट?

कनाज़ावा अपनी डाइट को लेकर बेहद अनुशासनप्रिय हैं। वह उन चुनिंदा लोगों में से हैं जो उम्र के इस पड़ाव पर भी अपनी फिटनेस को लेकर किसी तरह का समझौता नहीं करते। उनकी भोजन की थाली में मुख्य तौर पर पारंपरिक जापानी चीजें शामिल होती हैं:

  • ब्राउन राइस: सफेद चावल की बजाय कनाज़ावा फाइबर और पोषक तत्वों से भरपूर ब्राउन राइस खाना पसंद करते हैं।
  • नट्टू (Natto): यह सोयाबीन से बनने वाला एक पारंपरिक जापानी फर्मेंटेड फूड है, जो गट हेल्थ और प्रोटीन का एक बेहतरीन स्रोत माना जाता है।
  • मिसो सूप (Miso Soup): सोयाबीन पेस्ट से तैयार यह सूप उनके दैनिक भोजन का एक अनिवार्य हिस्सा है, जो पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है।
  • मांस और मछली से दूरी: हैरानी की बात यह है कि वह अपने भोजन में मांस, मछली और किसी भी तरह के प्रोसेस्ड फूड से पूरी तरह परहेज करते हैं।

उनके इस खान-पान ने दुनियाभर के न्यूट्रिशनिस्टों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। आखिर इतनी उम्र में बिना एनिमल प्रोटीन के मसल्स को मेंटेन रखना कैसे संभव है? आइए न्यूट्रिशन की नजर से इस डाइट का विश्लेषण करते हैं।

न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स की नजर में कनाज़ावा की डाइट के फायदे

आधुनिक पोषण विज्ञान के दृष्टिकोण से देखें तो कनाज़ावा की डाइट में कई ऐसी खूबियां हैं जो 'हेल्दी एजिंग' (स्वस्थ उम्र बढ़ने की प्रक्रिया) को बढ़ावा देती हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार उनकी इस डाइट के निम्नलिखित बड़े फायदे हैं:

1. प्लांट-बेस्ड प्रोटीन और फर्मेंटेड फूड्स

नट्टू और मिसो जैसे फर्मेंटेड सोया प्रोडक्ट्स न केवल आसानी से पचने योग्य होते हैं, बल्कि इनमें उच्च गुणवत्ता वाला प्लांट प्रोटीन भी होता है। यह उम्र बढ़ने के साथ शरीर में होने वाले मांसपेशियों के क्षय (Sarcopenia) को रोकने में मदद करता है।

2. एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइबर से भरपूर

ब्राउन राइस और पारंपरिक जापानी खाद्य पदार्थों में भरपूर मात्रा में डाइटरी फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। ये तत्व शरीर में मौजूद फ्री रेडिकल्स से लड़ते हैं और कोशिकाओं को समय से पहले बूढ़ा होने से बचाते हैं।

3. हार्ट हेल्थ के लिए बेहतरीन

लाल मांस और संतृप्त वसा (Saturated Fats) से दूरी बनाने के कारण उनके शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) का स्तर नियंत्रण में रहता है, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।

क्या इस डाइट में किसी चीज़ की कमी है?

जहां एक तरफ यह डाइट शरीर को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मददगार है, वहीं न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि पूरी तरह से प्लांट-बेस्ड डाइट होने की वजह से इसमें कुछ पोषक तत्वों की कमी हो सकती है, जिन्हें उम्र के इस पड़ाव पर विशेष ध्यान में रखना जरूरी है:

  • विटामिन बी12 (Vitamin B12): यह मुख्य रूप से एनिमल प्रोडक्ट्स में पाया जाता है। चूंकि कनाज़ावा मांस और मछली नहीं खाते, इसलिए उन्हें इसकी पूर्ति के लिए सप्लीमेंट्स या फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों की जरूरत पड़ सकती है।
  • ओमेगा-3 फैटी एसिड: मछलियों में मिलने वाला ओमेगा-3 दिमाग और दिल के लिए बहुत जरूरी होता है। शाकाहारी विकल्पों में इसे अखरोट या अलसी के बीजों से पूरा करना पड़ता है।
  • कैल्शियम और विटामिन डी: हड्डियों की मजबूती के लिए इस उम्र में कैल्शियम और धूप से मिलने वाले विटामिन डी का संतुलन बेहद आवश्यक है।

मानसिक दृढ़ता और अनुशासन का कमाल

तोशिसुक कनाज़ावा की सफलता सिर्फ उनके भोजन तक सीमित नहीं है। वह मानते हैं कि शारीरिक फिटनेस के लिए मानसिक रूप से मजबूत होना भी उतना ही जरूरी है। अपनी जवानी के दिनों में उन्होंने कुछ समय के लिए बॉडीबिल्डिंग छोड़ दी थी और तनाव के कारण उनका स्वास्थ्य भी बिगड़ने लगा था। लेकिन बाद में उन्होंने अपनी पत्नी के प्रोत्साहन पर फिर से वापसी की और तब से पीछे मुड़कर नहीं देखा।

उनका यह जीवन सफर हमें यह सिखाता है कि सही खान-पान, सकारात्मक सोच और नियमित व्यायाम के जरिए उम्र के किसी भी पड़ाव पर खुद को फिट और ऊर्जावान रखा जा सकता है। कनाज़ावा आज के युवाओं के लिए ही नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए एक मिसाल हैं जो उम्र को अपनी कमजोरी मान लेते हैं।

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काव्या त्रिपाठी

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Senior Editor

काव्या त्रिपाठी बिजनेस और टेक्नोलॉजी की जटिल दुनिया को सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती हैं। वे आर्थिक बदलाव, स्टार्टअप इकोसिस्...

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