वायु प्रदूषण से बचने के लिए N95 मास्क की उपयोगिता और बच्चों के लिए सही चुनाव के तरीके
बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच हवा में मौजूद PM 2.5 जैसे अत्यंत बारीक कण सांस के जरिए सीधे शरीर के भीतर प्रवेश कर सकते हैं। ये सूक्ष्म कण फेफड़ों की गहराई तक पहुंचकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनते हैं। खासकर अस्थमा, हृदय रोग और सांस की पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए यह स्थिति अधिक जोखिम भरी हो जाती है। इन हानिकारक कणों से बचाव के लिए केवल सामान्य कपड़े या सर्जिकल मास्क पर्याप्त नहीं होते, बल्कि इसके लिए सही सुरक्षात्मक उपकरणों की जानकारी होना आवश्यक है।
मास्क के विभिन्न प्रकार और उनकी कार्यक्षमता
बाजार में उपलब्ध सभी मास्क एक जैसे प्रभावी नहीं होते हैं। मास्क खरीदते समय उसकी कीमत या रंग-रूप देखने के बजाय यह देखना जरूरी है कि वह हवा में मौजूद बारीक कणों को छानने में कितना सक्षम है।
- N95 रेस्पिरेटर: सही फिटिंग वाला प्रमाणित N95 मास्क हवा में मौजूद कम से कम 95 प्रतिशत कणों को फिल्टर करने के लिए डिजाइन किया जाता है। इसका पूरा लाभ तभी मिलता है जब यह चेहरे पर ठीक से बैठा हो और किनारों से हवा का रिसाव न हो।
- सर्जिकल मास्क: इस प्रकार के मास्क का मुख्य उद्देश्य लार की बूंदों और अन्य संक्रमण संबंधी जोखिमों को रोकना होता है। इनकी बनावट आम तौर पर ढीली होती है, जिसके कारण यह PM 2.5 जैसे बारीक प्रदूषण कणों को रोकने में नाकाम रहते हैं।
- कपड़े का मास्क: सामान्य कपड़े से बने मास्क की सुरक्षा उसकी परतों और बुनावट पर निर्भर करती है। यह बारीक प्रदूषण कणों से मुकम्मल सुरक्षा की गारंटी नहीं देते हैं।
- अन्य प्रमाणित रेस्पिरेटर: FFP2 या इसी तरह के अन्य अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बने पार्टिकुलेट रेस्पिरेटर भी प्रदूषण से बचाव में उपयोगी साबित होते हैं। खरीदते समय इनके प्रमाणन और प्रामाणिकता की जांच अवश्य कर लेनी चाहिए।
बच्चों के लिए मास्क खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
बड़ों की तुलना में बच्चों का श्वसन तंत्र अधिक संवेदनशील होता है, इसलिए उनके लिए मास्क चुनते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
- सही साइज का चुनाव: मास्क ऐसा हो जो बच्चे की नाक और मुंह को पूरी तरह ढक ले और उसकी ठोड़ी तक पहुंचे। किनारों पर बड़े अंतराल नहीं होने चाहिए।
- फिटिंग की जांच: मास्क पहनने के बाद नाक और गालों के आसपास ज्यादा खाली जगह नहीं होनी चाहिए। हालांकि, यह इतना कसा हुआ भी न हो कि बच्चे को घुटन या असुविधा महसूस हो।
- फिल्टर की गुणवत्ता: बारीक कणों को रोकने के लिए बच्चे के चेहरे के आकार के अनुकूल प्रमाणित रेस्पिरेटर का ही चयन करें।
- सांस लेने में सुगमता: यह सुनिश्चित करें कि मास्क लगाने के बाद बच्चा सामान्य रूप से सांस ले पा रहा है या नहीं।
- आरामदायक बनावट: मास्क के स्ट्रैप या फीते त्वचा पर अधिक दबाव न डालें तथा बच्चा इसे आसानी से पहन और उतार सके।
प्रदूषण के स्तर में वृद्धि होने पर अन्य जरूरी उपाय
केवल मास्क पर पूरी तरह निर्भर रहना काफी नहीं है। जब हवा की गुणवत्ता बेहद खराब हो, तब कुछ अन्य व्यावहारिक कदम भी उठाए जाने चाहिए। घर से बाहर निकलने से पहले अपने क्षेत्र का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) जरूर जांच लें और अत्यधिक प्रदूषण होने पर बाहर जाने से बचें। इस दौरान दौड़ने, साइकिल चलाने या अन्य भारी शारीरिक व्यायाम खुले में करने के बजाय घर के अंदर ही कसरत करना बेहतर विकल्प है।
प्रदूषित हवा को घर के भीतर आने से रोकने के लिए खिड़की और दरवाजे बंद रखें तथा घर में धुआं पैदा करने वाले स्रोतों से दूर रहें। बंद कमरों में हवा को शुद्ध रखने के लिए उचित क्षमता वाले HEPA फिल्टर युक्त एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल किया जा सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और सांस के रोगियों को इस दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए तथा खांसी, सीने में जकड़न या सांस फूलने जैसी समस्या होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।