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ब्लड रिपोर्ट में PSA लेवल 28.9 आने पर क्या करें? जानिए डॉक्टरों की राय

ब्लड रिपोर्ट में PSA लेवल 28.9 आने पर क्या करें? जानिए डॉक्टरों की राय

क्या 28.9 का पीएसए स्तर प्रोस्टेट कैंसर की पुष्टि करता है? विशेषज्ञों ने बताए जरूरी मेडिकल कदम और आगे की जांच की प्रक्रिया।

ब्लड टेस्ट रिपोर्ट में अचानक किसी बढ़े हुए आंकड़े को देखकर चिंता होना स्वाभाविक है। ऐसा ही एक मामला तब सामने आया जब एक इंटरनेट यूजर ने ऑनलाइन मंच पर यह सवाल पूछा कि क्या 28.9 ng/mL का प्रोस्टेट-स्पेसफिक एंटीजन (PSA) स्तर होना प्रोस्टेट कैंसर की निश्चित पुष्टि करता है। इस स्थिति की मेडिकल हकीकत और आगे उठाए जाने वाले कदमों को समझने के लिए दिल्ली के राजौरी गार्डन स्थित आरजी हॉस्पिटल्स के यूरोलॉजी विभाग के सीनियर कंसलटेंट डॉ. कपिल जैन और फरीदाबाद के सर्वोदय अस्पताल के मेडिकल ओंकोलॉजी, हेमेटोलॉजी एंड बीएमटी विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर एवं हेड डॉ. विष्णु हरि से बात की गई है।

क्या 28.9 का पीएसए स्तर कैंसर की संभावना को बढ़ाता है?इस विषय पर सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि 28.9 ng/mL का पीएसए स्तर बहुत अधिक माना जाता है, लेकिन यह अकेले अपने दम पर प्रोस्टेट कैंसर की पुष्टि नहीं करता है। डॉ. कपिल जैन के अनुसार, पीएसए मुख्य रूप से प्रोस्टेट की असामान्यता का एक मार्कर है, न कि केवल कैंसर की पहचान करने वाला विशेष परीक्षण। प्रोस्टेट कोशिकाओं द्वारा इसका निर्माण किया जाता है और यह सामान्य रूप से रक्त में पाया जाता है। उम्र बढ़ने के साथ भी पीएसए का स्तर बढ़ सकता है, और कई अन्य चिकित्सीय स्थितियां भी इसे बढ़ा सकती हैं।

डॉ. विष्णु हरि बताते हैं कि जैसे-जैसे पीएसए का स्तर बढ़ता है, प्रोस्टेट कैंसर की संभावना आमतौर पर बढ़ती जाती है। 10 ng/mL से अधिक का पीएसए स्तर प्रोस्टेट कैंसर की काफी अधिक संभावना से जुड़ा होता है। इसके अलावा, यदि बाद में प्रोस्टेट कैंसर की पुष्टि होती है, तो 20 ng/mL से अधिक के पीएसए को एक उच्च जोखिम वाली विशेषता माना जाता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि 28.9 के पीएसए वाले व्यक्ति को हाई-रिस्क प्रोस्टेट कैंसर ही है, बल्कि इसका अर्थ यह है कि इस परिणाम की विधिवत जांच की आवश्यकता है।

संक्रमण और अन्य समस्याओं से भी बढ़ सकता है पीएसएडॉक्टरों का कहना है कि कई प्रोस्टेट और मूत्र संबंधी समस्याएं पीएसए के स्तर को ऊपर धकेल सकती हैं। इनमें प्रोस्टेट की सूजन या प्रोस्टेटाइटिस, मूत्र पथ का संक्रमण (यूटीआई), बढ़ा हुआ प्रोस्टेट, मूत्र का रुकना (यूरिनरी रिटेंशन) और प्रोस्टेट या मूत्र मार्ग से जुड़ी हालिया प्रक्रियाएं शामिल हैं। डॉ. जैन बताते हैं कि कुछ मामलों में संक्रमण या सूजन के कारण पीएसए में पर्याप्त और अस्थायी वृद्धि हो सकती है। यही वजह है कि डॉक्टर केवल एक पीएसए रिपोर्ट के आधार पर प्रोस्टेट कैंसर का निदान नहीं करते हैं।

आगे की मेडिकल जांच और प्रक्रिया

28.9 का पीएसए आने पर तुरंत किसी यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए। डॉक्टर आमतौर पर लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के बारे में पूछते हैं और प्रोस्टेट की जांच कर सकते हैं। यदि संक्रमण का संदेह है, तो यूरिन टेस्ट की सलाह भी दी जा सकती है। यदि डॉक्टर को उच्च पीएसए का कोई अन्य स्पष्ट कारण मिल जाता है, तो वे पहले उसका इलाज कर सकते हैं। इसके बाद यह देखने के लिए पीएसए दोबारा कराया जा सकता है कि स्तर नीचे आया है या नहीं।

यदि कैंसर की आशंका बनी रहती है, तो डॉक्टर प्रोस्टेट के 'मल्टीपारासमेटिक एमआरआई' (mpMRI) की सिफारिश कर सकते हैं। इससे संदिग्ध क्षेत्रों का पता चलता है और यूरोलॉजिस्ट को यह तय करने में मदद मिलती है कि बायोप्सी की आवश्यकता है या नहीं। डॉ. विष्णु हरि स्पष्ट करते हैं कि प्रोस्टेट बायोप्सी प्रोस्टेट कैंसर के निदान के लिए सबसे निश्चित परीक्षण है, क्योंकि इसमें माइक्रोस्कोप के तहत प्रोस्टेट ऊतकों की जांच की जाती है। यदि एमआरआई में कोई संदिग्ध क्षेत्र दिखाई देता है, तो डॉक्टर विशेष रूप से उस हिस्से से सैंपल ले सकते हैं, जिसे टार्गेटेड बायोप्सी कहा जाता है।

किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?

भले ही 28.9 का पीएसए तुरंत कैंसर का फैसला न हो, लेकिन इसे महीनों के लिए टालना नहीं चाहिए। डॉ. जैन सलाह देते हैं कि ऐसे परिणाम मिलने पर घबराना नहीं चाहिए, बल्कि यूरोलॉजिस्ट से मिलने में देरी भी नहीं करनी चाहिए। यदि पेशाब करने में कठिनाई, बार-बार पेशाब आना, जलन, पेशाब या वीर्य में खून आना, या बुखार जैसे लक्षण हैं, तो मेडिकल मूल्यांकन बेहद जरूरी हो जाता है।

इसके अलावा कुछ गतिविधियां और स्थितियां भी अस्थायी रूप से पीएसए रीडिंग को प्रभावित कर सकती हैं। रोगियों को डॉक्टर को हालिया मूत्र संक्रमण, बुखार, यूरिनरी रिटेंशन, कैथीटेराइजेशन या प्रोस्टेट से जुड़ी किसी भी प्रक्रिया के बारे में बताना चाहिए। इसके अलावा, स्खलन (ejaculation) और प्रोस्टेट पर अत्यधिक दबाव डालने वाली गतिविधियां जैसे कि लंबे समय तक या जोर-जोर से साइक्लिंग करना भी अस्थायी रूप से पीएसए के स्तर को प्रभावित कर सकते हैं। परीक्षण को दोबारा कराने से पहले मरीजों को डॉक्टर के उन निर्देशों का पालन करना चाहिए जिनमें कुछ खास गतिविधियों से बचने के लिए कहा जाता है।


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काव्या त्रिपाठी

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Senior Editor

काव्या त्रिपाठी बिजनेस और टेक्नोलॉजी की जटिल दुनिया को सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती हैं। वे आर्थिक बदलाव, स्टार्टअप इकोसिस्...

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