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डिजिटल दौर में भी सिर चढ़कर बोल रहा भारतीय हैंडलूम का जादू, लखनऊ विश्वविद्यालय में सजी कला की अनोखी महफिल

डिजिटल दौर में भी सिर चढ़कर बोल रहा भारतीय हैंडलूम का जादू, लखनऊ विश्वविद्यालय में सजी कला की अनोखी महफिल

आज के इस आधुनिक और डिजिटल दौर में जहां एक तरफ मशीनरी और फास्ट फैशन का बोलबाला है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय पारंपरिक हस्तशिल्प (Handloom) की धमक पूरी दुनिया में नए सिरे से महसूस की जा रही है। भारतीय सांस्कृतिक प्रतीकों, आंचलिक मोटिफ्स और पारंपरिक बुनाई का जादू अब सिर्फ भारत तक सीमित न रहकर वैश्विक फैशन और टेक्सटाइल इंडस्ट्री की पहली पसंद बनता जा रहा है।

इसी वैश्विक आकर्षण और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने के उद्देश्य से लखनऊ विश्वविद्यालय के कला एवं शिल्प महाविद्यालय में 'राष्ट्रीय हैंडलूम दिवस' के अवसर पर एक भव्य और प्रेरक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम

कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ ललित कला विभाग के प्राचार्य एवं संकायाध्यक्ष डॉ. रतन कुमार और प्रोफेसर आलोक कुमार ने पारंपरिक दीप प्रज्वलित कर किया। इस खास मौके पर महाविद्यालय के छात्रों द्वारा तैयार हस्तशिल्प और आंचलिक वस्त्र कला के अद्भुत उदाहरणों को प्रदर्शित किया गया, जिसे देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध रह गया।

"डिजिटल दौर में भी भारतीय संवेदनाओं और आंचलिक मोटिफ्स वाली वस्त्र कला की मांग वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ी है। सबसे अच्छी बात यह है कि आज का युवा वर्ग अपनी जड़ों से जुड़ते हुए इस कला को करियर और फैशन के रूप में अपना रहा है।"
- प्रोफेसर आलोक कुमार

दुनियाभर में नाम कमा रहे हैं यहां के हुनरमंद

समारोह को संबोधित करते हुए प्राचार्य डॉ. रतन कुमार ने टेक्सटाइल विभाग के प्रतिभावान विद्यार्थियों की जमकर तारीफ की। उन्होंने गर्व जताते हुए कहा कि इस ऐतिहासिक महाविद्यालय से पासआउट छात्र न केवल भारत में, बल्कि विदेशों की प्रमुख और प्रतिष्ठित फैशन व टेक्सटाइल संस्थाओं में उच्च पदों पर आसीन हैं। उन्होंने छात्रों को भारतीय कला की विशिष्टता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में दर्ज हुई प्रमुख उपस्थिति

इस पूरे आयोजन का कुशल संयोजन डॉ. पूनम जायसवाल द्वारा किया गया। कला गतिविधियों के प्रलेखन (Documentation) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए शिक्षक सुमित कुमार ने युवा कलाकारों का मार्गदर्शन किया। इस गरिमामय अवसर पर किरण आर्या, प्रोफेसर रविकांत पांडे, अमरनाथ गौर सहित कई वरिष्ठ प्राध्यापक और भारी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

युवाओं के लिए क्यों खास है हैंडलूम क्षेत्र?

  • ग्लोबल डिमांड: वैश्विक स्तर पर हैंडमेड और इको-फ्रेंडली प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ रही है।
  • सांस्कृतिक पहचान: भारतीय पारंपरिक मोटिफ्स अंतरराष्ट्रीय रैंप वॉक पर छा रहे हैं।
  • करियर के नए अवसर: फैशन डिजाइनिंग, टेक्सटाइल रिसर्च और एक्सपोर्ट हाउस में अपार संभावनाएं हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. राष्ट्रीय हैंडलूम दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?

भारत में हर साल 7 अगस्त को राष्ट्रीय हैंडलूम दिवस मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य देश के बुनकरों को सम्मानित करना और हथकरघा उद्योग को बढ़ावा देना है।

2. लखनऊ विश्वविद्यालय के कला एवं शिल्प महाविद्यालय में क्या खास हुआ?

राष्ट्रीय हैंडलूम दिवस के अवसर पर हस्तशिल्प और आंचलिक वस्त्र कला की विशेष प्रदर्शनी लगाई गई, साथ ही वैश्विक स्तर पर भारतीय डिजाइनों की बढ़ती मांग पर चर्चा की गई।

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तनु उपाध्याय

तनु उपाध्याय

Senior Sub Editor

तनु उपाध्याय एंटरटेनमेंट जगत की हलचल को करीब से समझती हैं और उसे दर्शकों के सामने आकर्षक अंदाज में पेश करती हैं। फिल्मों, टीवी, ओटीटी और वायरल ट्रे...

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