रीवा की 10 वर्षीय अनम अली ने कठिन परिस्थितियों को मात देते हुए एक ऐसा साहसिक लक्ष्य तय किया है, जो बड़े-बड़ों को हैरान कर दे। महज ढाई साल की उम्र में मां का साया खोने वाली अनम अब 10 दिनों के भीतर 230 किलोमीटर पैदल चलकर विश्व रिकॉर्ड बनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
जिंदगी ने इस नन्हीं बच्ची से उस उम्र में मां का आंचल छीन लिया था, जब बच्चों को उसकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है। लेकिन उनके पिता ने मां और पिता दोनों की भूमिका निभाते हुए उनकी परवरिश की और हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया। चौथी कक्षा में पढ़ने वाली अनम अपनी इसी अटूट इच्छाशक्ति के बल पर एक नया मुकाम हासिल करने जा रही हैं।
रीवा से जबलपुर तक की होगी पैदल यात्रा
अनम अली का यह कड़ा सफर 1 दिसंबर को रीवा के सैनिक शिशु निकेतन स्कूल से शुरू होगा। तय कार्यक्रम के अनुसार, वह लगातार पैदल चलते हुए 10 दिसंबर को जबलपुर शहर के आर्मी कैंट पहुंचकर अपनी इस यात्रा को पूरा करेंगी। रीवा से जबलपुर तक की यह 230 किलोमीटर की दूरी महज शारीरिक ही नहीं, बल्कि उनकी मानसिक और शारीरिक सहनशक्ति की भी बड़ी परीक्षा होगी। इतनी कम उम्र में लगातार इतने दिनों तक लंबी दूरी तय करने के लिए उचित पोषण, चिकित्सकीय देखरेख और पर्याप्त विश्राम की जरूरत पर भी ध्यान दिया जा रहा है ताकि यात्रा सुरक्षित रूप से पूरी हो सके।
कम उम्र में ताइक्वांडो में हासिल कर चुकी हैं ब्लैक बेल्ट
कठिन लक्ष्यों को साधना अनम के लिए नया नहीं है। इससे पहले वह मार्शल आर्ट्स की दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं। मात्र 9 वर्ष की आयु में ताइक्वांडो में ब्लैक बेल्ट हासिल करने वाली अनम के नाम से जुड़ी अन्य खेल उपलब्धियां भी चर्चा में रही हैं। ताइक्वांडो के क्षेत्र में उनका यह प्रदर्शन उनके अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण को दर्शाता है, जो अब इस लंबी पैदल यात्रा में भी उनके काम आएगा।
वियतनाम के खिलाड़ी के रिकॉर्ड को तोड़ने का है संकल्प
इस साहसिक पैदल यात्रा का मुख्य उद्देश्य वियतनाम के जॉर्ज बाकर के नाम दर्ज उस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ना है, जिसमें उन्होंने 21 दिनों में 230 किलोमीटर की दूरी पैदल तय की थी। अनम उसी समान दूरी को महज 10 दिनों में पूरा करने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रही हैं। हालांकि इस प्रकार के विश्व रिकॉर्ड और उनके मानकों का आधिकारिक सत्यापन होना बाकी है, लेकिन इस नन्हीं बच्ची का यह प्रयास अपने आप में एक मिसाल बन चुका है।
अब रीवा सहित पूरे प्रदेश की निगाहें इस बेटी के हौसले और उसकी आगामी यात्रा पर टिकी हैं। तमाम चुनौतियों को पार करते हुए अनम का यह सफर आने वाले समय में अन्य युवाओं और बच्चों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनने की उम्मीद है।