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मुंबई में जहरीली हवा पर बीएमसी का कड़ा प्रहार, बिल्डरों की उड़ी नींद

मुंबई में जहरीली हवा पर बीएमसी का कड़ा प्रहार, बिल्डरों की उड़ी नींद

मुंबई की फिजाओं में घुलता जहर और लगातार गिरता एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) प्रशासन के लिए लंबे समय से सिरदर्द बना हुआ है। सर्दियों के मौसम में और उसके बाद भी महानगर की हवा सांस लेने लायक नहीं बचती। इस गंभीर होती समस्या से निपटने के लिए अब बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने पूरी तरह से कमर कस ली है। शहर में बेखौफ होकर हवा को प्रदूषित करने वाले बिल्डरों और डेवलपर्स पर प्रशासन का शिकंजा कसता जा रहा है। यदि अब किसी ने निर्माण कार्यों के दौरान नियमों को ताक पर रखा, तो उसे सिर्फ चेतावनी नहीं बल्कि भारी-भरकम आर्थिक दंड और प्रोजेक्ट रद्द होने जैसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

कड़े नियमों की अनदेखी पड़ी भारी

महानगर में रियल एस्टेट सेक्टर लगातार तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ ही निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल और मलबे का कुप्रबंधन पर्यावरण के लिए अभिशाप बनता जा रहा है। वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए निर्धारित किए गए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का पालन करना अब हर बिल्डर के लिए अनिवार्य कर दिया गया है। इसके बावजूद कई जगहों पर लापरवाही के मामले सामने आ रहे थे, जिन्हें देखते हुए बीएमसी प्रशासन ने अब जीरो टॉलरेंस की नीति अपना ली है।

हाल ही में बीएमसी के डेवलपमेंट प्लान (DP) विभाग द्वारा जारी एक नए सर्कुलर ने साफ कर दिया है कि प्रशासनिक निर्देशों को नजरअंदाज करने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा। नियमों के दायरे में आने वाले सभी प्रोजेक्ट्स को अब प्रदूषण नियंत्रण के पुख्ता इंतजाम करने होंगे, अन्यथा उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई तुरंत प्रभाव से शुरू कर दी जाएगी।

वर्क स्टॉप नोटिस के बाद भी काम जारी रखा तो लगेगा 100% जुर्माना

बीएमसी की नई गाइडलाइंस के मुताबिक, अगर किसी निर्माण स्थल पर नियमों की अनदेखी पाई जाती है, तो विभाग द्वारा उसे 'वर्क स्टॉप नोटिस' (काम रोकने का नोटिस) जारी किया जाएगा। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि इस नोटिस के मिलने के बावजूद यदि डेवलपर या बिल्डर ने अपनी निर्माण गतिविधियां बंद नहीं कीं और चुपचाप काम जारी रखा, तो उस पर भारी जुर्माना ठोका जाएगा।

  • भारी आर्थिक दंड: नियमों का उल्लंघन जारी रखने पर डेवलपर पर प्रीमियम रेट के बराबर यानी सीधे तौर पर 100 फीसदी जुर्माना लगाया जाएगा।
  • रियायतों से वंचित: ऐसे दोषी डेवलपर्स को भविष्य में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक रियायत या लाभ का हकदार नहीं माना जाएगा।
  • लाइसेंस पर संकट: बार-बार चेतावनी के बाद भी बाज न आने वाले बिल्डरों के लाइसेंस सस्पेंड करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।

ऑटो-डीसीआर सिस्टम से होगी डिजिटल मॉनिटरिंग

भ्रष्टाचार और कागजी कार्रवाई में होने वाली देरी को खत्म करने के लिए बीएमसी ने इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाने का फैसला किया है। अब तक कई मामलों में कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) और वर्क स्टॉप नोटिस की हार्ड कॉपी भेजने में काफी समय बर्बाद होता था, जिससे जमीनी स्तर पर तुरंत कार्रवाई नहीं हो पाती थी।

इस समस्या से पार पाने के लिए अब नोटिस सीधे 'ऑटो-डीसीआर' (Auto-DCR) सिस्टम पर अपलोड किए जाएंगे। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि मुंबई के किसी भी वॉर्ड में तैनात बीएमसी अधिकारी एक क्लिक में यह देख सकेंगे कि संबंधित निर्माण परियोजना को कोई नोटिस जारी हुआ है या नहीं। यदि कोई बिल्डर तय समय सीमा के भीतर अपना जवाब या जरूरी दस्तावेज जमा नहीं करता है, तो सिस्टम के जरिए ही अगले चरण की कानूनी कार्रवाई तेज कर दी जाएगी।

आईओडी (IOD) और संशोधित प्लान में जुड़ेंगी सख्त शर्तें

प्रशासन ने इस बार लूपहोल्स को पूरी तरह से बंद करने की ठान ली है। नई व्यवस्था के तहत किसी भी नई निर्माण परियोजना के आईओडी (Intimation of Disapproval) और संशोधित प्लान में वायु प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी सभी शर्तों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा।

इतना ही नहीं, प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले संबंधित बिल्डर और उसके मुख्य आर्किटेक्ट को लिखित रूप में एक अंडरटेकिंग (शपथ पत्र) देनी होगी। इस अंडरटेकिंग में यह स्पष्ट करना होगा कि वे साइट पर धूल और प्रदूषण को रोकने के लिए सभी आवश्यक उपायों जैसे एंटी-स्मॉग गन, ग्रीन नेट और पानी का छिड़काव का सख्ती से पालन करेंगे। यदि बाद में औचक निरीक्षण के दौरान नियमों की धज्जियां उड़ती पाई गईं, तो बिना किसी अतिरिक्त नोटिस के सीधी कार्रवाई का रास्ता अपनाया जाएगा।

डीसीपीआर-2034 के रेगुलेशन 12 के तहत होगी कार्रवाई

यह पूरी कार्रवाई मनमाने तरीके से नहीं, बल्कि तय कानूनी प्रावधानों के तहत की जा रही है। बीएमसी ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई डेवलपर बाज नहीं आता है, तो उसके खिलाफ डीसीपीआर-2034 (DCPR-2034) के रेगुलेशन 12 के प्रावधानों को लागू किया जाएगा। इसके तहत दोषी प्रोजेक्ट्स की डेवलपमेंट परमिशन को पूरी तरह से रद्द (Cancel) करने का अधिकार बीएमसी अधिकारियों के पास होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि बीएमसी का यह कदम मुंबई की हवा को सुधारने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। हालांकि, इसकी सफलता पूरी तरह से मैदानी स्तर पर होने वाले सघन निरीक्षण और अधिकारियों की ईमानदारी पर निर्भर करेगी। आम नागरिकों और पर्यावरणविदों ने भी इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि पिछले कुछ सालों में निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल ने आम लोगों का जीना मुहाल कर दिया था। अब देखना यह होगा कि इस सख्ती के बाद मुंबई के बिल्डर्स प्रदूषण नियंत्रण के नियमों को लेकर कितने गंभीर होते हैं।

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नसीम अहमद

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नसीम अहमद जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं। उन...

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