राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को प्राथमिकता देते हुए केंद्र सरकार ने इंटरनेट-नेटिव चैनलों और लाइव टीवी ऐप्स के संचालन के लिए नए एवं कड़े दिशा-निर्देश तय किए हैं। इसके तहत अब बिना पारंपरिक सरकारी लाइसेंस के कोई भी इंटरनेट-नेटिव चैनल समाचार और समसामयिक विषयों का प्रसारण नहीं कर सकेगा।
नए प्रावधानों के मुताबिक, देश में संचालित होने वाले सभी लाइव टीवी ऐप्स केवल उन्हीं न्यूज चैनलों को अपने प्लेटफॉर्म पर दिखाने के लिए अधिकृत होंगे, जिनके पास वैध सैटेलाइट ब्रॉडकास्टिंग लाइसेंस मौजूद है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य डिजिटल माध्यमों पर प्रसारित होने वाली समाचार सामग्री की विश्वसनीयता और राष्ट्रीय सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करना है।
डेटा सुरक्षा और उपभोक्ता निवारण तंत्र
नए नियमों के अनुसार, सभी लाइव टीवी ऐप्स संचालकों के लिए उपयोगकर्ताओं के व्यक्तिगत डेटा और उनकी व्यूइंग हिस्ट्री यानी देखने के इतिहास को देश की भौगोलिक सीमाओं के भीतर ही सुरक्षित रखना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा, दर्शकों या उपभोक्ताओं द्वारा दर्ज कराई जाने वाली शिकायतों के त्वरित समाधान की पूरी जिम्मेदारी संबंधित एप्लीकेशन प्रदाता (ऐप ऑपरेटर) की होगी।
टीवी रेटिंग प्रणाली में डिजिटल व्यूअरशिप शामिल
दूरदर्शन और अन्य चैनलों की तरह अब इंटरनेट आधारित लाइव टेलीविजन देखने वाले दर्शकों के आंकड़ों को भी व्यापक टीवी रेटिंग प्रणाली, जैसे बार्क (BARC), के दायरे में शामिल किया जाएगा। इस व्यवस्था से यह स्पष्ट हो सकेगा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर विभिन्न टीवी चैनलों को दर्शकों के बीच कितनी लोकप्रियता मिल रही है।
किन प्लेटफॉर्म्स को मिली है छूट
ये नए नियम सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर एक समान रूप से लागू नहीं होंगे। ब्रॉडकास्टर्स के अपने खुद के मालिकाना हक वाले ओटीटी प्लेटफॉर्म, जैसे जियोसिनेमा और डिज्नी+ हॉटस्टार (जो केवल अपने ही नेटवर्क के चैनल प्रसारित करते हैं), तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर की जाने वाली व्यक्तिगत लाइव स्ट्रीमिंग को इन नियमों के दायरे से बाहर रखा गया है।