छत्रपति संभाजीनगर के पड़ेगांव-मिटमिटा मार्ग पर चारपदरी सड़क के निर्माण और मुख्य जलवाहिनी के अधूरे काम को लेकर तकनीकी संकट गहरा गया है। सड़क चौड़ीकरण के कारण कई स्थानों पर पाइप उखाड़कर किनारे रख दिए गए हैं, जिससे भविष्य में जलापूर्ति बाधित होने और नई सड़क को दोबारा खोदने की आशंका जताई जा रही है।
छत्रपति संभाजीनगर शहर में चल रहे बुनियादी विकास कार्यों के बीच पड़ेगांव-मिटमिटा मार्ग पर एक गंभीर तकनीकी समस्या सामने आई है। यहां चारपदरी सड़क बनाने के लिए चौड़ीकरण का काम तेजी से चल रहा है, जिसके दायरे में मुख्य जलवाहिनी आ रही है। निर्माण कार्य के दौरान कई स्थानों पर बिछाए गए पाइपों को उखाड़कर सड़क किनारे रख दिया गया है, जबकि पूरी जलवाहिनी बिछाने का कार्य अभी तक अधूरा पड़ा है। इस स्थिति के चलते सड़क निर्माण और जलापूर्ति परियोजना के बीच प्रशासनिक व तकनीकी समन्वय की कमी साफ दिखाई दे रही है।
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने उठाई स्थानांतरण की मांग
इस पूरे घटनाक्रम पर चिंता जताते हुए शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के उपशहर प्रमुख एवं महानगरपालिका में गुटनेता गणेश लोखंडे ने जलवाहिनी को तत्काल सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के कार्यकारी अभियंता को आधिकारिक ज्ञापन सौंपा है। गणेश लोखंडे का कहना है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में पानी की आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है।
सड़क और जलापूर्ति परियोजनाओं में तालमेल का अभाव
पड़ेगांव से मिटमिटा और उससे जुड़े आसपास के रिहायशी इलाकों में पेयजल आपूर्ति सुचारू रखने के लिए महानगरपालिका और महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के संयुक्त प्रयासों से मुख्य जलवाहिनी बिछाई जा रही है। इसी के समानांतर सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा इस मार्ग को चारपदरी सड़क के रूप में विकसित किया जा रहा है। सड़क की चौड़ाई बढ़ाने के लिए पहले रास्ते के किनारे के अतिक्रमण हटाए गए, जिसके बाद यह स्पष्ट हुआ कि निर्धारित योजना के तहत बिछाई जा रही जलवाहिनी अब सड़क के बिल्कुल मध्य भाग में आ रही है। सड़क का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन जलवाहिनी का काम अधूरा होने के कारण दोनों विभागों के बीच आपसी तालमेल का अभाव जनता के लिए परेशानी का सबब बन सकता है.
मिटमिटा से देवगिरी वैली तक असमंजस की स्थिति
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पड़ेगांव-मिटमिटा मार्ग पर कई हिस्सों में मुख्य जलवाहिनी का कार्य अधूरा है। मिटमिटा से लेकर देवगिरी वैली, पीस होम और उसके आसपास के तमाम इलाकों में भी पाइपों के सड़क किनारे पड़े होने की बात सामने आई है। इससे न केवल जलवाहिनी का काम समय पर पूरा होने पर संदेह है, बल्कि खुले में पड़े महंगे पाइपों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। जानकारों का मानना है कि यदि सड़क निर्माण पूरा होने के बाद भविष्य में कभी जलवाहिनी में रिसाव, टूट-फूट या अन्य तकनीकी खराबी आती है, तो उसकी मरम्मत के लिए नवनिर्मित सड़क को दोबारा खोदना पड़ेगा। इससे न केवल सरकारी खजाने पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ेगा, बल्कि यातायात भी प्रभावित होगा और आम नागरिकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ेगा।
निर्माण पूरा होने से पहले समाधान की अपील
गणेश लोखंडे ने जोर देकर कहा है कि सड़क का निर्माण कार्य पूरी तरह से मुकम्मल होने से पहले ही जलवाहिनी के स्थानांतरण पर ठोस निर्णय लिया जाना आवश्यक है। इसके लिए सड़क निर्माण करने वाली एजेंसी, छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका और महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के अधिकारियों को एक मंच पर आकर तकनीकी समन्वय स्थापित करना चाहिए और इसका व्यावहारिक समाधान निकालना चाहिए। जलवाहिनी को समय रहते सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने से भविष्य में होने वाली जलापूर्ति की समस्याओं को पूरी तरह टाला जा सकता है। विकास कार्यों के साथ-साथ नागरिकों के लिए बुनियादी सुविधाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है ताकि जनता को किसी प्रकार की दिक्कत न हो।