छत्रपति संभाजीनगर में 1 से 7 नवंबर तक BRICS शाश्वत जीवनशैली सप्ताह का आयोजन। मिशन लाइफ के तहत कचरा प्रबंधन और जल स्वच्छता पर जोर।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की पहल पर छत्रपति संभाजीनगर जिले में 1 से 7 नवंबर तक ‘शाश्वत जीवन शैली सप्ताह’ का आयोजन किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को एक जनआंदोलन का रूप देना और नागरिकों की दैनिक जीवनशैली में टिकाऊ बदलाव लाना है।
वर्ष 2026 में भारत की BRICS अध्यक्षता की पृष्ठभूमि में इस विशेष सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। इसके तहत पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देने और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कई कार्यक्रम तय किए गए हैं। जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी मिन्नू पीएम ने जिले के सभी नागरिकों से इस अभियान में शामिल होकर इसे सफल बनाने की अपील की है।
मिशन लाइफ के सात संकल्पों पर केंद्रित गतिविधियां
इस सप्ताह के दौरान आयोजित होने वाली सभी गतिविधियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मिशन लाइफ’ (LiFE - Lifestyle for Environment) की सात प्रमुख संकल्पनाओं पर आधारित हैं। प्रशासन का प्रयास है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित न रहकर नागरिकों की रोजमर्रा की आदतों का हिस्सा बने। इसके लिए विशेष जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
कार्यक्रम के तहत ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के प्रति लोगों को जागरूक करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नागरिकों को अपने घरों में ही कचरे को सूखा और गीला यानी अलग-अलग श्रेणियों में पृथक करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके साथ ही प्लास्टिक के अत्यधिक उपयोग को रोकने और इसके विकल्पों को अपनाने का संदेश दिया जा रहा है।
3R सिद्धांत और ग्रे-वाटर प्रबंधन का प्रचार
प्लास्टिक कचरे की समस्या से निपटने के लिए सप्ताह के दौरान कचरा प्रबंधन के 3R सिद्धांत—Reduce (कम उपयोग), Reuse (पुनः उपयोग) और Recycle (पुनर्चक्रण)—का व्यापक प्रचार किया जा रहा है। लोगों को सिखाया जा रहा है कि कैसे वे दैनिक जीवन में इन तीन उपायों को अपनाकर कचरे के उत्पादन को कम कर सकते हैं।
सप्ताह की गतिविधियों में जल संरक्षण और ग्रे-वाटर (घरों से निकलने वाले हल्के अपशिष्ट जल) प्रबंधन को भी प्रमुखता दी गई है। घरों और व्यावसायिक परिसरों से निकलने वाले ऐसे पानी के उचित प्रबंधन और उसके पुनः उपयोग की तकनीकों पर जानकारी दी जा रही है। इसके अतिरिक्त, सार्वजनिक स्थानों और स्थानीय जल स्रोतों की स्वच्छता के लिए विशेष सफाई अभियान भी आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि टिकाऊ स्वच्छता की संस्कृति को बढ़ावा मिल सके।