19 लाख आबादी वाले नासिक में मनपा के सोशल मीडिया फॉलोअर्स महज 1.54 लाख हैं। डिजिटल टीम पर लाखों खर्च के बावजूद संवाद कमजोर होने के आरोप।
स्मार्ट सिटी के दावों के बीच नासिक महानगरपालिका की ऑनलाइन उपस्थिति और सोशल मीडिया रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शहर की 19 लाख से अधिक आबादी के मुकाबले मनपा के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कुल फॉलोअर्स की संख्या मात्र 1.54 लाख के आसपास बताई जा रही है। डिजिटल टीम और बाहरी एजेंसियों पर हर महीने बड़ी धनराशि खर्च होने के बावजूद नागरिकों तक जरूरी सूचनाएं और जनहित से जुड़ी जानकारियां प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पा रही हैं।
जनसंख्या और डिजिटल पहुंच में बड़ा अंतर
वर्ष 2011 में नासिक शहर की आबादी लगभग 15 लाख थी, जो समय के साथ बढ़कर अब 19 लाख से अधिक हो गई है। इसके विपरीत, महानगरपालिका के आधिकारिक सोशल मीडिया पेजों की पहुंच इस आबादी के दसवें हिस्से से भी कम यानी करीब 1.54 लाख फॉलोअर्स तक ही सीमित है। दूसरी ओर, स्थानीय स्तर पर सक्रिय कई कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की व्यक्तिगत डिजिटल पहुंच भी मनपा के आधिकारिक आंकड़ों के बराबर या उससे अधिक आंकी जा रही है। यही वजह है कि शहर के कई नागरिक स्थानीय अपडेट्स और सूचनाओं के लिए निजी पेजों पर अधिक निर्भर नजर आते हैं।
पारंपरिक सरकारी पोस्ट और रचनात्मकता की कमी
देश के कई अन्य महानगर निगम आकर्षक रील्स, वीडियो, ट्रेंडिंग फॉर्मेट और रचनात्मक अभियानों के जरिए जनता से सीधा संवाद स्थापित कर रहे हैं। इसके उलट, नासिक मनपा के सोशल मीडिया हैंडल पर ज्यादातर पारंपरिक सरकारी परिपत्रों, लंबे टेक्स्ट संदेशों और प्रशासनिक आदेशों को ही साझा किया जाता है। स्थानीय निवासी शुभम धात्रक का कहना है कि आज के दौर में छोटी-बड़ी हर जानकारी सोशल मीडिया पर आसानी से मिल जाती है, लेकिन मनपा के पेजों पर केवल जटिल सरकारी आदेश ही नजर आते हैं।
नागरिकों का यह भी आरोप है कि आपातकालीन सूचनाएं, ट्रैफिक डायवर्जन, विकास कार्यों की स्थिति, सड़कों के गड्ढे और पानी की कटौती जैसी जरूरी जानकारियां समय पर साझा नहीं की जाती हैं। रचनात्मक और सरल भाषा के अभाव में कई पोस्ट पर लाइक्स और कमेंट्स की संख्या 100 का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाती है, जिससे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जन-भागीदारी बेहद सीमित दिखाई देती है।
शिकायतों के समाधान और प्रक्रिया पर उठे सवाल
केवल सूचनाओं के प्रसारण तक ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम से आने वाली नागरिकों की शिकायतों और उनके समाधान को लेकर भी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। कई मामलों में यह शिकायत सामने आई है कि नागरिकों द्वारा ऑनलाइन पूछे गए सवालों पर उचित कार्रवाई या संतोषजनक जवाब दिए बिना ही मामलों को बंद कर दिया जाता है। इससे डिजिटल माध्यमों के प्रति आम जनता का भरोसा प्रभावित हो रहा है। जानकारों का सुझाव है कि मनपा प्रशासन को युवा वर्ग से लेकर बुजुर्गों तक की समझ में आने वाली सरल और सहज भाषा का उपयोग करना चाहिए ताकि डिजिटल संवाद अधिक प्रभावी और उपयोगी बन सके।