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छत्रपति संभाजीनगर में अवैध प्लॉटिंग पर मनपा का शिकंजा, 609 प्लॉट ध्वस्त

छत्रपति संभाजीनगर में अवैध प्लॉटिंग पर मनपा का शिकंजा, 609 प्लॉट ध्वस्त

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में जमीन खरीद-फरोख्त करने वालों और अवैध कॉलोनाइजरों के खिलाफ महानगरपालिका (मनपा) ने अब तक का सबसे सख्त रुख अपनाया है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में धड़ल्ले से चल रहे अवैध प्लॉटिंग के खेल पर प्रशासन का हथौड़ा चल गया है। शहर के संवेदनशील इलाकों में बिना किसी सरकारी अनुमति और ले-आउट अप्रूवल के तैयार किए गए कुल 609 अनधिकृत प्लॉटों को पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर दिया गया है। इस बड़ी कार्रवाई से उन भू-माफियाओं और डेवलपर्स में भारी हड़कंप मच गया है, जो नियमों को ताक पर रखकर आम जनता की गाढ़ी कमाई को दांव पर लगा रहे थे।

पहाडसिंगपुरा से भावसिंगपुरा तक चला बुलडोजर

प्रशासन से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई सुनियोजित तरीके से कई दिनों की गोपनीय जांच के बाद अंजाम दी गई है। महानगरपालिका के अमले ने पुलिस बल की मौजूदगी में पहाडसिंगपुरा, नारेगांव और भावसिंगपुरा जैसे तेजी से विकसित हो रहे इलाकों में ताबड़तोड़ छापे मारे। इन इलाकों में जमीनों के बड़े टुकड़ों पर बिना एनए (Non-Agricultural) परमिशन और टाउन प्लानिंग की मंजूरी के अवैध रूप से छोटे-छोटे प्लॉट काटकर बेचे जा रहे थे।

पहाडसिंगपुरा में 180 प्लॉटों पर हुई कार्रवाई

कार्रवाई की शुरुआत पहाडसिंगपुरा क्षेत्र से हुई। यहां हनुमान टेकड़ी के पास स्थित गट क्रमांक 37 में लगभग चार एकड़ के विशाल क्षेत्रफल में बड़े पैमाने पर अनधिकृत प्लॉटिंग की गई थी। इस पूरे गोरखधंधे के तार विकासक शीतल डहाले से जुड़े बताए जा रहे हैं। मनपा के तोड़फोड़ दस्ते ने मौके पर पहुंचकर यहां बनाए गए सभी 180 अवैध प्लॉटों को आधिकारिक रूप से निष्कासित कर दिया।

नारेगांव में 270 प्लॉट और सीमेंट की सड़कें जमींदोज

नारेगांव इलाके में तो अवैध कारोबारियों ने हद ही पार कर दी थी। यहां गट क्रमांक 5, तथा गट क्रमांक 20 और 21 के अंतर्गत कुल 270 अनधिकृत प्लॉटों पर मनपा का बुलडोजर गरजा। खास बात यह है कि इन अवैध कॉलोनियों में ग्राहकों को लुभाने के लिए बिना अनुमति के ही पक्के सीमेंट के रास्ते और बुनियादी ढांचे तक खड़े कर दिए गए थे। मनपा की टीम ने इन अवैध निर्माणों और रास्तों को पूरी तरह से तोड़ दिया। इस मामले में विकासक शौकत हादी और अनिल डायगव्हाणे पाटील के खिलाफ कड़े कदम उठाए गए हैं।

भावसिंगपुरा में 159 प्लॉट निष्कासित

इस अभियान के अगले चरण में भावसिंगपुरा के गट क्रमांक 21/1 और 22 पर कार्रवाई की गई। यहां करीब साढ़े तीन एकड़ के क्षेत्र में लगभग 159 अनधिकृत प्लॉट काटे गए थे। यह अवैध प्लॉटिंग विकासक दादाराव लोखंडे से संबंधित थी। प्रशासन ने यहां भी सख्त रुख अपनाते हुए ले-आउट के तमाम निशानों को मिटा दिया और स्पष्ट संदेश दिया कि शहर में नियमों के खिलाफ एक इंच जमीन पर भी कब्जा या प्लॉटिंग बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

हर्सूल में छह भू-माफियाओं पर फौजदारी मुकदमे दर्ज

सिर्फ प्लॉटों को तोड़ना ही नहीं, बल्कि इस अवैध धंधे में शामिल लोगों पर कानूनी शिकंजा भी कसना शुरू कर दिया गया है। हर्सूल क्षेत्र में महानगरपालिका की अनुमति के बिना साढ़े 13 एकड़ जैसी विशाल जमीन पर अनाधिकृत ले-आउट तैयार कर प्लॉटिंग करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। हर्सूल के सर्वे क्रमांक 15, 279, 275 और 61 के अंतर्गत बड़े पैमाने पर यह खेल चल रहा था।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मनपा के इमारत निरीक्षक संतोष जनार्धन वाचासुंदर ने खुद आगे आकर थाने में शिकायत दर्ज कराई। उनकी शिकायत के आधार पर महाराष्ट्र प्रादेशिक नगररचना अधिनियम (MRTP Act) की धारा 52 के तहत कुल तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं। इस कार्रवाई के बाद से कई बड़े डेवलपर्स भूमिगत हो गए हैं और पुलिस उनकी सरगर्मी से तलाश कर रही है।

कैसे खुला अवैध प्लॉटिंग का यह पूरा राज?

सूत्रों के मुताबिक, इस पूरी कार्रवाई के पीछे मनपा अधिकारियों की गहरी निगरानी और सतर्कता है। महानगरपालिका के जिम्मेदार अधिकारियों ने बीते दिनों यानी 30 अगस्त, 31 अगस्त और 2 सितंबर को संबंधित क्षेत्रों का व्यक्तिगत रूप से स्थलीय निरीक्षण (Site Visit) किया था। इस दौरान मौके पर जो हकीकत सामने आई, वह दस्तावेजों से बिल्कुल उलट थी।

जांच में यह स्पष्ट हो गया कि बिना किसी वैध ले-आउट मंजूरी के धड़ल्ले से प्लॉट काटे जा रहे हैं और भोले-भाले नागरिकों को बसाने के नाम पर फंसाया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की अनधिकृत प्लॉटिंग से अंततः आम जनता को ही भारी आर्थिक नुकसान और कानूनी झंझटों का सामना करना पड़ता है। लोग अपनी जिंदगी भर की जमापूंजी ऐसे भूखंडों में निवेश कर देते हैं, जिन पर बाद में प्रशासन का बुलडोजर चल जाता है और न तो वहां बिजली-पानी मिलती है और न ही रजिस्ट्री हो पाती है।

प्रशासन की कड़ी चेतावनी: आगे भी जारी रहेगा अभियान

इस पूरे महा-अभियान को अंजाम देने के पीछे महानगरपालिका के शीर्ष अधिकारियों की स्पष्ट नीति थी। आयुक्त अमोल येडगे, अतिक्रमण नियंत्रण अधिकारी संतोष वाहुले, तथा क्षेत्र क्रमांक 4 के पदनिर्देशित अधिकारी उदय मानवतकर के मार्गदर्शन और सख्त निर्देशों के बाद ही यह पूरी कानूनी और मैदानी कार्रवाई संभव हो पाई है।

प्रशासन ने शहर की जनता से भी अपील की है कि वे किसी भी प्रॉपर्टी या प्लॉट को खरीदने से पहले महानगरपालिका से उसके वैध ले-आउट और एनए परमिशन की पूरी जांच जरूर कर लें। किसी भी धोखे से बचने के लिए बिना अनुमति वाली कॉलोनियों में निवेश करने से बचें। मनपा अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में अवैध प्लॉटिंग और अवैध निर्माण के खिलाफ यह अभियान और अधिक आक्रामक तरीके से जारी रहेगा। शहर में कहीं भी नियमों को तोड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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