खाद्य पदार्थों की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए तमिलनाडु सरकार ने केंद्र सरकार का दरवाजा खटखटाया है। राज्य में चावल, दाल, खाद्य तेल और प्याज के खुदरा दाम राष्ट्रीय औसत से अधिक होने के कारण सरकार ने इन पर स्टॉकहोल्डिंग लिमिट लगाने की अनुमति मांगी है।
तमिलनाडु सरकार ने केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय को एक पत्र लिखकर यह मांग उठाई है। राज्य का तर्क है कि आम जनता को उचित कीमतों पर आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराने के लिए यह प्रतिबंध लगाना बेहद जरूरी है। उपभोक्ता मामलों के विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-सितंबर अवधि के दौरान तमिलनाडु में कई प्रमुख खाद्य पदार्थों के मासिक औसत खुदरा दाम पूरे देश के औसत से अधिक दर्ज किए गए हैं।
राष्ट्रीय औसत से अधिक हैं तमिलनाडु में कीमतें
सितंबर महीने के आंकड़ों के मुताबिक, तमिलनाडु में चावल 61.66 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा था, जबकि इसका राष्ट्रीय औसत 46.20 रुपये प्रति किलोग्राम था। इसी तरह अरहर दाल का भाव 134.23 रुपये प्रति किलोग्राम रहा, जो कि अखिल भारतीय औसत 124.41 रुपये प्रति किलोग्राम से ज्यादा है। राज्य में प्याज की कीमत 59.28 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 52.96 रुपये प्रति किलोग्राम थी। पाम ऑयल का दाम भी राज्य में 160.28 रुपये प्रति लीटर रहा, जो राष्ट्रीय औसत 150.91 रुपये प्रति लीटर से अधिक है।
वैश्विक कारकों और अल नीनो का दिया हवाला
राज्य सरकार ने केंद्र को भेजे अपने प्रस्ताव में वैश्विक कारकों और अल नीनो के कारण फसल खराब होने का हवाला दिया है। सरकार का तर्क है कि इन परिस्थितियों का फायदा उठाकर थोक व्यापारी और मिल मालिक बड़े पैमाने पर माल का भंडारण कर सकते हैं, जिससे जमाखोरी और कालाबाजारी को बढ़ावा मिलेगा। इससे महंगाई का दबाव और बढ़ेगा तथा उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति कमजोर होगी।
प्रस्तावित स्टॉक सीमा और पिछले आदेशों का संदर्भ
आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 के तहत केंद्र सरकार को यह अधिकार है कि वह बाजार में जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक सीमा तय कर सके। वर्तमान में इन निर्दिष्ट वस्तुओं पर कोई स्टॉक सीमा लागू नहीं है। सूत्रों के अनुसार, तमिलनाडु ने केंद्र द्वारा पूर्व के वर्षों में जारी किए गए आदेशों के आधार पर ही स्टॉक सीमा तय करने का प्रस्ताव दिया है।
- चावल और धान: थोक विक्रेताओं के लिए 2,000 मीट्रिक टन और खुदरा विक्रेताओं के लिए आठ मीट्रिक टन की सीमा प्रस्तावित की गई है। मिल मालिक केवल एक महीने की उत्पादन क्षमता के बराबर ही स्टॉक रख सकेंगे। इसके लिए केंद्र के 16 जनवरी 2026 के गेहूं स्टॉक आदेश का हवाला दिया गया है।
- अरहर और उड़द दाल: थोक विक्रेताओं के लिए 200 मीट्रिक टन और खुदरा विक्रेताओं के लिए पांच मीट्रिक टन की सीमा तय करने का प्रस्ताव है। इसके लिए 11 जुलाई 2024 के उस आदेश को आधार बनाया गया है जो अरहर और चना पर लागू किया गया था।
- खाद्य तेल: सरसों, पाम, सूरजमुखी, मूंगफली का तेल और वनस्पति के लिए थोक विक्रेताओं हेतु 500 क्विंटल और खुदरा विक्रेताओं हेतु 30 क्विंटल की सीमा प्रस्तावित है। इसके लिए 30 मार्च 2022 के पुराने आदेश का संदर्भ दिया गया है।
- प्याज: थोक विक्रेताओं के लिए 25 मीट्रिक टन और खुदरा विक्रेताओं के लिए दो मीट्रिक टन की सीमा का प्रस्ताव है। इसके समर्थन में 23 अक्टूबर 2020 के केंद्र सरकार के आदेश का हवाला दिया गया है।