महाराष्ट्र की राजनीतिक फिज़ा में एक बार फिर से गर्माहट आ गई है। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और एसआईआर (SIR) के मुद्दों को लेकर राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टियों में शुमार कांग्रेस ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। आगामी 28 सितंबर 2026 को पूरे महाराष्ट्र में कांग्रेस पार्टी एक बड़ा राज्यव्यापी आंदोलन करने जा रही है। इस आंदोलन का मुख्य केंद्र मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करना है। पार्टी का आरोप है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली निष्पक्ष नहीं रही है, जिसे लेकर जनता के बीच एक बड़ा संदेश देने की तैयारी की जा रही है।
क्यों गरमाई महाराष्ट्र की सियासत?
पिछले कुछ महीनों से महाराष्ट्र की राजनीति में चुनावी प्रक्रियाओं और प्रशासनिक फैसलों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। राज्य के राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि किस तरह से विपक्षी दलों को दरकिनार किया जा रहा है। कांग्रेस पार्टी का यह आगामी आंदोलन महज एक सांकेतिक विरोध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि इसे आने वाले बड़े राजनीतिक संघर्ष के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि यदि समय रहते चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थानों की कार्यप्रणाली पर सवाल नहीं उठाए गए, तो लोकतंत्र की नींव कमज़ोर होगी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पूरे विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा पिछले कई दिनों से तैयार की जा रही थी। पार्टी के प्रदेश स्तर के तमाम बड़े नेताओं ने गुप्त बैठकों का दौर चलाकर इस आंदोलन को सफल बनाने की रणनीति बनाई है। जिला मुख्यालयों से लेकर तहसील स्तर तक कांग्रेस कार्यकर्ताओं को सक्रिय रहने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर गंभीर सवाल
कांग्रेस पार्टी ने सीधे तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली पर उंगलियां उठाई हैं। पार्टी नेताओं का तर्क है कि देश के सबसे बड़े संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से पूरी तरह से निष्पक्षता की उम्मीद की जाती है, लेकिन हालिया मामलों में लिए गए फैसले संदेह के घेरे में हैं। एसआईआर (SIR) से जुड़े मामलों को लेकर पार्टी ने कड़ा एतराज जताया है।
- निष्पक्षता का अभाव: कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव आयोग के फैसलों में सत्ता पक्ष को अनुचित लाभ पहुंचाने की बू आती है।
- एसआईआर पर आपत्ति: एसआईआर से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों को भरोसे में नहीं लिया गया, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।
- तत्काल कार्रवाई की मांग: पार्टी ने राष्ट्रपति और संबंधित उच्च अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर CEC के खिलाफ निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग दोहराई है।
28 सितंबर को सड़कों पर उतरेगी कांग्रेस
आंदोलन के दिन यानी 28 सितंबर को महाराष्ट्र के तमाम बड़े शहरों—मुंबई, पुणे, नागपुर, और औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर) में जोरदार प्रदर्शन देखने को मिल सकता है। कांग्रेस के कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी करेंगे। पार्टी का दावा है कि इस आंदोलन में लाखों की संख्या में आम नागरिक, युवा और पार्टी कार्यकर्ता शामिल होंगे।
सुरक्षा एजेंसियों ने भी इस हाई-प्रोफाइल आंदोलन को देखते हुए अपनी तैयारियां पुख्ता कर ली हैं। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किए जाने की संभावना है ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में बनी रहे।
राजनीतिक विश्लेषकों की क्या है राय?
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आंदोलन कांग्रेस पार्टी के लिए अपनी ज़मीन को और अधिक मजबूत करने का एक बेहतरीन मौका है। राज्य में चुनावी सरगर्मी हमेशा बनी रहती है और ऐसे में जनता के मुद्दों को सड़क पर उठाना विपक्षी दलों की प्राथमिक जिम्मेदारी भी है। हालांकि, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि इस राज्यव्यापी प्रदर्शन का चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर कितना असर पड़ता है।
क्या इस आंदोलन के बाद चुनाव आयोग की तरफ से कोई आधिकारिक सफाई सामने आएगी या फिर यह विवाद और अधिक तूल पकड़ेगा? यह आने वाले कुछ ही दिनों में साफ हो पाएगा। फिलहाल, महाराष्ट्र का सियासी पारा अपने चरम पर है और सभी की निगाहें 28 सितंबर को होने वाले इस बड़े प्रदर्शन पर टिकी हुई हैं।