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कर्जत स्टेशन पर कोयना एक्सप्रेस में मची अफरा-तफरी, पहियों से उठा धुआं

कर्जत स्टेशन पर कोयना एक्सप्रेस में मची अफरा-तफरी, पहियों से उठा धुआं

महाराष्ट्र के व्यस्त रेल मार्गों में से एक पर शनिवार को उस वक्त बड़ा ड्रामा देखने को मिला, जब कर्जत रेलवे स्टेशन पर खड़ी एक लोकप्रिय एक्सप्रेस ट्रेन के पहियों के पास से अचानक भारी मात्रा में धुआं निकलने लगा। चलती पटरियों और स्टेशनों के बीच सुरक्षा को लेकर हमेशा सतर्क रहने वाले यात्रियों की सांसे तब थम गईं जब उन्होंने ट्रेन के डिब्बों से काला धुआं उठते देखा। इस घटना का एक डरावना वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर हर कोई हैरान है।

कर्जत स्टेशन पर अचानक मची भगदड़

घटना की शुरुआत तब हुई जब कोयना एक्सप्रेस अपने तय शेड्यूल के मुताबिक कर्जत रेलवे स्टेशन पर पहुंची। ट्रेन अभी प्लेटफॉर्म पर पूरी तरह से रुकी ही थी कि तभी उसके पिछले हिस्से में मौजूद एक कोच के पास से अचानक घना धुआं निकलने लगा। पलक झपकते ही स्टेशन परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्लेटफॉर्म पर मौजूद यात्रियों ने जब ट्रेन के पहियों के पास से धुआं और चिंगारियां जैसी स्थिति देखी, तो वे अपनी जान बचाने के लिए कोच से दूर भागने लगे।

स्टेशन पर मौजूद लोगों में कुछ पलों के लिए भारी दहशत फैल गई, क्योंकि किसी को समझ नहीं आ रहा था कि अचानक यह सब कैसे हो गया। गनीमत यह रही कि ट्रेन उस समय स्टेशन पर ही खड़ी थी, वरना चलती ट्रेन में यह तकनीकी फॉल्ट किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकता था। यात्रियों ने तुरंत सूझबूझ दिखाते हुए रेलवे स्टाफ और सुरक्षा कर्मियों को इसकी सूचना दी।

सामने आया हैरान करने वाला वीडियो

इस पूरी घटना का एक वीडियो अब इंटरनेट पर सामने आ चुका है, जिसमें साफ तौर पर देखा जा सकता है कि कैसे ट्रेन के पहियों और ब्रेक सिस्टम के पास से धुआं निकल रहा है। वीडियो में स्टेशन पर खड़े लोगों की बेचैनी और रेलवे कर्मचारियों की दौड़-भाग को साफ महसूस किया जा सकता है। सोशल मीडिया पर यह वीडियो सामने आने के बाद रेलवे की तकनीकी सुरक्षा को लेकर एक बार फिर से बहस छिड़ गई है कि क्या इस तरह की तकनीकी खराबी को पहले नहीं पकड़ा जा सकता था?

क्या थी इस धुएं की असली वजह?

यात्रियों की सूचना के बाद हरकत में आए रेलवे स्टाफ और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। ट्रेन के प्रभावित कोच की गहनता से जांच की गई। जांच के बाद रेलवे अधिकारियों ने साफ किया कि इस पूरी घटना के पीछे की वजह 'ब्रेक बाइंडिंग' (Break Binding) थी।

तकनीकी भाषा में कहें तो जब ट्रेन का ब्रेक मैकेनिज्म किसी तकनीकी खराबी के कारण पहियों से पूरी तरह से अलग नहीं हो पाता और लगातार रगड़ खाता रहता है, तो उसे ब्रेक बाइंडिंग कहते हैं। कोयना एक्सप्रेस के मामले में भी यही हुआ। पहियों और ब्रेक शू के बीच अत्यधिक घर्षण (Friction) पैदा हुआ, जिसके कारण भारी मात्रा में गर्मी (Heat) उत्पन्न हुई और आखिरकार धुएं के रूप में बाहर निकलने लगी।

10 मिनट तक थमे रहे पहिए, बरती गई पूरी सावधानी

यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए रेलवे प्रशासन ने किसी भी तरह का जोखिम उठाने से इनकार कर दिया। कर्जत स्टेशन पर ट्रेन को तत्काल रोक लिया गया। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, ट्रेन शाम 6:26 बजे से लेकर 6:36 बजे तक यानी ठीक 10 मिनट तक स्टेशन पर रुकी रही।

  • तकनीकी टीम की त्वरित कार्रवाई: रेलवे के मैकेनिकल स्टाफ ने बिना समय गंवाए ब्रेक सिस्टम की जांच की।
  • फॉल्ट को किया गया दुरुस्त: ब्रेक बाइंडिंग की समस्या को तुरंत ठीक किया गया ताकि आगे की यात्रा में कोई बाधा न आए।
  • सुरक्षा जांच: यह सुनिश्चित किया गया कि अब पहियों और ब्रेक्स के बीच कोई अनावश्यक घर्षण नहीं हो रहा है।

सभी यात्री पूरी तरह सुरक्षित

दस मिनट के इस तकनीकी हो-हल्ला के बाद जब रेलवे इंजीनियरों ने पूरी तरह से संतुष्ट होकर हरी झंडी दे दी, तब जाकर ट्रेन को अपनी आगे की यात्रा जारी रखने की अनुमति मिली। रेलवे प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि इस घटना में किसी भी यात्री को खरोंच तक नहीं आई है। सभी यात्री पूरी तरह से सुरक्षित हैं और ट्रेन अपने गंतव्य की ओर रवाना हो चुकी है।

रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि इस तरह की अप्रत्याशित तकनीकी घटनाओं के दौरान पैनिक यानी घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। भारतीय रेलवे का तकनीकी अमला और सुरक्षा बल हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद रहता है। यात्रियों की सतर्कता और रेलवे कर्मचारियों की त्वरित प्रतिक्रिया ने एक बार फिर किसी बड़े संभावित हादसे को टाल दिया है।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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