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नागपुर में दही-हांडी विवाद: तेज डीजे और पुलिस से भिड़ंत पर बीजेपी कार्यकर्ताओं पर FIR

नागपुर में दही-हांडी विवाद: तेज डीजे और पुलिस से भिड़ंत पर बीजेपी कार्यकर्ताओं पर FIR

महाराष्ट्र के नागपुर शहर से इस वक्त एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां कानून और प्रशासन के नियमों की अनदेखी करना आयोजकों को भारी पड़ गया है। नागपुर के चर्चित छोटा ताजबाग इलाके में आयोजित एक दही-हांडी उत्सव के दौरान तय डेसिबल सीमा से काफी तेज आवाज में डीजे बजाने और मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों के साथ तीखी नोकझोक करने के मामले में आखिरकार पुलिस ने सख्त एक्शन लिया है। इस कार्यक्रम के मुख्य आयोजकों और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से जुड़े कार्यकर्ताओं के खिलाफ आधिकारिक तौर पर मामला दर्ज कर लिया गया है। इस पूरी घटना ने एक बार फिर से राजनीतिक रसूख और प्रशासनिक नियमों के टकराव को सुर्खियों में ला दिया है।

छोटा ताजबाग में हुआ था भव्य आयोजन

मिली जानकारी के मुताबिक, नागपुर के संवेदनशील और व्यस्त माने जाने वाले छोटा ताजबाग चौक पर हर साल की तरह इस बार भी दही-हांडी स्पर्धा का भव्य आयोजन किया गया था। यूं तो इस कार्यक्रम का जिम्मा स्थानीय युवा कार्यकर्ताओं और मंडल के पास था, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह बात किसी से छिपी नहीं है कि इस आयोजन के पीछे स्थानीय विधायक मोहन मते की सक्रिय भूमिका रहती है। रविवार की शाम को आयोजित इस कार्यक्रम में भारी संख्या में युवाओं और आम जनता की भीड़ उमड़ी थी। उत्सव का माहौल अपने चरम पर था, लेकिन यह उत्सव धीरे-धीरे कानून के दायरे से बाहर निकलता चला गया।

प्रशासन के सख्त निर्देशों की उड़ी धज्जियां

गौरतलब है कि नागपुर में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस प्रशासन ने पहले ही कड़े दिशानिर्देश जारी किए थे। सीपी विश्वास नांगरे पाटिल की तरफ से स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में बीम-लेजर लाइटों का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट और पर्यावरण मंत्रालय द्वारा तय किए गए ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम (Noise Pollution Rules) का सख्ती से पालन कराया जाना अनिवार्य किया गया था।

परंतु, छोटा ताजबाग के इस आयोजन स्थल पर नियमों की धज्जियां उड़ती हुई साफ नजर आईं। प्रशासन के तमाम आदेशों को ताक पर रखकर कार्यक्रम स्थल पर न केवल शक्तिशाली बीम-लेजर लाइटें लगाई गईं, बल्कि कान के पर्दे फाड़ देने वाली तेज आवाज में डीजे भी बजाया गया।

पुलिस और आयोजकों के बीच तीखी झड़प

जब डीजे की अवांछित और तेज आवाज से आसपास के रिहायशी इलाकों में परेशानी बढ़ने लगी, तो ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने तुरंत आयोजकों और साउंड सिस्टम ऑपरेटर से संपर्क किया। पुलिस ने उन्हें शालीनता से आवाज कम करने की हिदायत दी। लेकिन स्थिति तब बेकाबू हो गई जब पुलिसकर्मी चेतावनी देने के लिए आगे बढ़े।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब विधायक मोहन मते ने खुद मंच से माइक संभाला और खुलेआम पुलिस को ललकारा। उन्होंने माइक पर घोषणा करते हुए कहा कि डीजे को कोई भी पुलिसकर्मी हाथ नहीं लगाएगा और न ही कोई पुलिसवाला स्टेज या साउंड सिस्टम के पास आएगा। विधायक के इस तेवर के बाद माहौल पूरी तरह गर्मा गया और पुलिस को उनके करीब जाने से रोक दिया गया।

डेसिबल मीटर में साबित हुआ ध्वनि प्रदूषण

विवाद बढ़ने के बावजूद पुलिस ने अपनी तकनीकी जांच जारी रखी। पुलिस टीम ने आधुनिक मशीन (साउंड मीटर) की मदद से मौके पर जाकर डेसिबल की जांच की। जांच के दौरान यह बात आधिकारिक तौर पर सामने आई कि डीजे की आवाज निर्धारित 100 डेसिबल की सुरक्षित सीमा को पार कर चुकी थी। दो बार की गई इस जांच में ध्वनि प्रदूषण के नियमों का खुला उल्लंघन पाया गया।

चूंकि उस वक्त कार्यक्रम स्थल पर भारी भीड़ जमा थी और किसी भी तरह की भगदड़ या अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पुलिस ने मौके पर तुरंत सख्त कदम उठाने से परहेज किया। हालांकि, तय समय सीमा यानी रात के 10 बजे तक साउंड सिस्टम बंद करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन आयोजकों ने पुलिस की इस अपील को पूरी तरह अनसुना कर दिया। रात के 10:30 बजे तक नियमों को ताक पर रखकर डीजे धड़ल्ले से बजता रहा और पुलिस के साथ तीखी बहस जारी रही।

घटना के दो दिन बाद दर्ज हुई एफआईआर

घटना के दो दिन बीत जाने के बाद, मंगलवार को पुलिस विभाग ने इस मामले में कड़ा रुख अख्तियार किया। सब-इंस्पेक्टर सचिन फुंदे की औपचारिक शिकायत के आधार पर पुलिस ने आयोजकों और साउंड सिस्टम संचालक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

कानून का शिकंजा जिन लोगों पर कसा है, उनमें भारतीय जनता युवा मोर्चा के कई जाने-माने नाम शामिल हैं। पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में कुलदीप माटे, अर्पित मलघाटे, केतन साठवने, अक्षय खराबे, उदय ढोमने, राजेश काले, विजय ठाकुर, अंकुश भुरे, आर्यन पलांदूरकर, सूरज बंसोड़, चेतन राठोड़, अनिकेत साबले समेत अन्य अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है।

प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल

इस पूरी घटना के सामने आने के बाद नागपुर के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। एक तरफ जहां आम नागरिक और पर्यावरण प्रेमी पुलिस की इस कार्रवाई को कानून के राज की स्थापना के लिए जरूरी बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ यह सवाल भी उठाए जा रहे हैं कि जब कार्यक्रम के दौरान ही सरेआम नियम तोड़े जा रहे थे और पुलिस अधिकारियों को ललकारा जा रहा था, तब पुलिस ने मौके पर ही तुरंत दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की? क्या राजनीतिक दबाव के चलते पुलिस को दो दिन का इंतजार करना पड़ा?

फिलहाल, नागपुर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस आगे क्या और कितनी कड़ी कार्रवाई करती है, क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर कानून की सर्वोच्चता और राजनेताओं के रसूख के बीच की खींचतान से जुड़ा हुआ है।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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