नागपुर पुलिस की तहसील शाखा ने एक व्यक्ति को झूठे मामले में फंसाकर तीन करोड़ रुपये की भारी-भरकम फिरौती वसूलने की एक सुनियोजित साजिश का पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी को उत्तर प्रदेश के आगरा से दबोचा है, जिसने एक युवती को पांच लाख रुपये का लालच देकर यह गंदा खेल रचा था।
नागपुर की तहसील पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत सामने आए इस सनसनीखेज मामले में पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) जोन-3 राहुल मदने ने आधिकारिक जानकारी साझा की है। पुलिस के अनुसार, इस पूरी साजिश का मुख्य सूत्रधार आदित्य सुरेशचंद्र गुप्ता (30) है, जिसे उत्तर प्रदेश के आगरा शहर से गिरफ्तार किया गया है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी के खिलाफ देश के अन्य महानगरों जैसे पुणे और दिल्ली में भी इस तरह के संदिग्ध मामलों में संलिप्त रहने की जानकारी मिली है।
सोशल मीडिया ऐप के जरिए हुई थी पहचान
पुलिस जांच में पता चला है कि इस साजिश का शिकार बनी 19 वर्षीय युवती मोमिनपुरा इलाके की रहने वाली है। यह युवती शिक्षा और मनोरंजन से जुड़े विषयों पर रील्स व वीडियो बनाने का काम करती है और काफी समय से 'मौका' नामक एप्लीकेशन पर सक्रिय थी। इसी डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए उसकी जान-पहचान मुख्य आरोपी आदित्य गुप्ता से हुई थी, जिसके बाद दोनों के बीच संपर्क बढ़ा और फिरौती की इस कथित साजिश की पटकथा लिखी गई।
राजस्थान निवासी को फंसाने की थी योजना
कुछ दिन पहले इसी युवती की औपचारिक शिकायत के आधार पर राजस्थान के रहने वाले इरफान अली सहित चार लोगों के खिलाफ तहसील थाने में मामला दर्ज किया गया था। शिकायत में गंभीर आरोप लगाए गए थे कि इरफान अली ने खुद को राजनीतिक पहुंच वाला व्यक्ति बताकर युवती को अच्छी नौकरी दिलाने का झांसा दिया। इसके अलावा उस पर वर्चुअल सेक्स के लिए प्रेरित करने और बाद में अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देने के आरोप भी लगाए गए थे, ताकि पीड़ित पक्ष पर कानूनी शिकंजा कसा जा सके।
थाने में पूछताछ के दौरान खुला राज
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जब तहसील पुलिस ने अश्लील वीडियो से जुड़े तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों के लिए युवती का मोबाइल डेटा मांगा और उसे विस्तृत पूछताछ के लिए थाने बुलाया, तब यह फर्जीवाड़ा बेनकाब हुआ। जिस समय युवती का बयान दर्ज किया जा रहा था, उस वक्त मुख्य आरोपी आदित्य गुप्ता भी उसके साथ थाने आया था। पूछताछ के दौरान पुलिस को यह अजीब लगा कि युवती से पूछे जा रहे सवालों के जवाब खुद आदित्य दे रहा था।
आदित्य ने पुलिस पर अपना प्रभाव जमाने के लिए राजनीतिक और कॉर्पोरेट जगत में उच्च स्तर की पकड़ होने का हवाला दिया तथा वरिष्ठ प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों से सीधे संपर्क होने की बात कहकर जांच को मोड़ने और प्रभावित करने का प्रयास किया। उसके इस संदिग्ध आचरण से पुलिस अधिकारियों का शक गहरा गया।
पाँच लाख रुपये का दिया गया था लालच
मामले की गंभीरता को भांपते हुए इंस्पेक्टर संजय मेवे के मार्गदर्शन में पुलिस उप-निरीक्षक (PSI) संदीप भिताले ने युवती से अलग से मनोवैज्ञानिक और कड़ाई से पूछताछ की। इस दौरान युवती बुरी तरह घबरा गई और उसने स्वीकार किया कि उसने इरफान अली को कभी नहीं पहचाना और न ही सोशल मीडिया के अलावा उसकी उससे कोई व्यक्तिगत बातचीत थी।
युवती ने पुलिस के सामने खुलासा किया कि उसने अपनी मर्जी से नहीं, बल्कि आदित्य गुप्ता के बहकावे और पांच लाख रुपये नकद देने के लालच में आकर यह झूठी शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस की आगे की तफ्तीश में यह बात पुख्ता हुई कि इन मनगढ़ंत और फर्जी सबूतों के आधार पर इरफान अली को कानून के शिकंजे में फंसाकर उससे तीन करोड़ रुपये की भारी रकम ऐंठने की पूरी योजना बनाई गई थी।
आगरा से गिरफ्तारी और आगे की जांच
तथ्यों के पुख्ता होने के बाद नागपुर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी आदित्य गुप्ता को उत्तर प्रदेश के आगरा से दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उसे आगे की पूछताछ के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया है। नागपुर पुलिस अब इस बात की भी गहराई से पड़ताल कर रही है कि इस सिंडिकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा पुणे और दिल्ली में आदित्य के खिलाफ दर्ज मामलों की वास्तविक स्थिति क्या है।