नासिक महानगरपालिका (Nashik Municipal Corporation) की स्थायी समिति की हालिया बैठक किसी अखाड़े से कम नजर नहीं आई। शहर के बुनियादी मुद्दों और आम जनता से जुड़ी समस्याओं पर अधिकारियों की उदासीनता देखकर पार्षदों का गुस्सा फूट पड़ा। बैठक की शुरुआत से ही माहौल गरमा गया था और देखते ही देखते यह तीखी बहस में बदल गया। पार्षदों ने पानी के मनमाने बिलों से लेकर प्रॉपर्टी टैक्स कनेक्शन के नाम पर खुलेआम रिश्वत वसूले जाने तक के गंभीर आरोप लगाए, जिससे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया।
सभागार में मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों को पार्षदों के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। आम नागरिकों की परेशानियों को लंबे समय से नजरअंदाज किए जाने से आहत जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस हाई-वोल्टेज बैठक में कौन-कौन से मुख्य मुद्दे छाए रहे और किन घोटालों व लापरवाहियों पर पर्दाफाश हुआ।
पानीपट्टी बिलों में धांधली और जनता पर आर्थिक बोझ
बैठक के दौरान सबसे बड़ा और तीखा मुद्दा पानी के बिलों में हो रही भारी गड़बड़ी का रहा। समिति के सदस्य योगेश गाडेकर ने इस विषय पर बोलते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने सदन को बताया कि जिन नागरिकों के घरों में पानी के मीटर बंद पड़े हैं, उनके लिए पहले एक तय नियम था। पूर्व व्यवस्था के अनुसार, बंद मीटरों पर पिछले साल के औसत के आधार पर बिल जेनरेट किया जाता था।
लेकिन अब बिना किसी मैदानी जांच या भौतिक सत्यापन के नागरिकों को मनमाने और चार से पांच गुना अधिक राशि के बिल भेजे जा रहे हैं। इस बेतहाशा बढ़ोतरी ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। महंगाई के इस दौर में पानी के भारी-भरकम बिल चुकाना गरीब और मध्यम वर्ग के लिए बेहद मुश्किल हो गया है। पार्षदों ने इस मनमानी को तुरंत रोकने और बिलों की नए सिरे से जांच करने की जोरदार मांग की।
प्रॉपर्टी टैक्स कनेक्शन के नाम पर खुलेआम रिश्वतखोरी
पानी के बिलों के हंगामे के बीच एक और सबसे सनसनीखेज मामला सामने आया, जिसने भ्रष्टाचार की पोल खोल दी। सदस्य दीपाली कुलकर्णी ने वडाला नाका और साठेनगर इलाके की बदहाल स्थिति का हवाला देते हुए प्रशासन को आड़े हाथों लिया। उन्होंने बताया कि इन क्षेत्रों में ड्रेनेज लाइनें पूरी तरह से ओवरफ्लो हो चुकी हैं और गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। बार-बार शिकायतें दर्ज कराने के बाद भी जिम्मेदार विभाग के कान पर जूं तक नहीं रेंगी है।
इसके साथ ही दीपाली कुलकर्णी ने एक ऐसा आरोप लगाया जिससे सदन में सन्नाटा छा गया। उन्होंने दावा किया कि साठेनगर इलाके में नया प्रॉपर्टी टैक्स कनेक्शन जारी करने के एवज में मनपा के कुछ निचले स्तर के कर्मचारी आम नागरिकों से खुलेआम 5 से 10 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहे हैं। भ्रष्टाचार का यह खुला खेल देखकर सदस्यों ने दोषियों के खिलाफ तत्काल निलंबन और कड़ी विभागीय जांच की मांग उठाई।
आवारा कुत्तों का बढ़ता खौफ और नागरिकों की सुरक्षा
शहर के बुनियादी ढांचे और करों के अलावा, आम जनता की सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील मुद्दा भी बैठक में छाया रहा। नासिक शहर में आवारा कुत्तों (Stray Dogs) के बढ़ते खतरे को लेकर सदस्य रंजना बोराडे और बाला निगल ने प्रशासन पर तीखा हमला बोला।
बाला निगल ने अत्यधिक आक्रोश जताते हुए कहा कि शहर में विकास कार्यों के नाम पर भले ही बजट खर्च किया जा रहा है, लेकिन अगर शहरवासियों की जान ही सुरक्षित नहीं है, तो ऐसे विकास का क्या मतलब? आवारा कुत्तों के आतंक से बच्चे और बुजुर्ग घर से बाहर निकलने में डर रहे हैं। पार्षदों ने मांग की कि अन्य विकास कार्यों को भले ही कुछ समय के लिए धीमा कर दिया जाए, लेकिन आवारा कुत्तों के आतंक से निजात पाने के लिए तुरंत प्रभावी कदम उठाए जाएं।
बजट के क्रियान्वयन पर आयुक्त से तीखी नोकझोंक
बैठक का एक अन्य महत्वपूर्ण हिस्सा बढ़े हुए बजट के क्रियान्वयन और शहर में चल रहे विकास कार्यों की गति को लेकर रहा। नगरसेविका भारती ताजनपूरे और मनपा आयुक्त मनीषा खत्री के बीच इस दौरान तीखी नोकझोंक देखने को मिली। पार्षदों का आरोप था कि स्वीकृत होने के बावजूद जमीनी स्तर पर काम नजर नहीं आ रहा है, जिससे जनता का पैसा कागजों तक ही सीमित रह गया है।
स्थायी समिति के सभापति मच्छिंद्र सानप की अध्यक्षता में संपन्न हुई इस बैठक में मनपा आयुक्त मनीषा खत्री, अतिरिक्त आयुक्त अमित रंजन, स्मिता झगड़े सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ विभागाधिकारी प्रमुखता से उपस्थित थे। जब पार्षदों ने एक के बाद एक जनसमस्याओं के अंबार और प्रशासनिक उदासीनता के सबूत पेश किए, तो अधिकारियों के पास संतोषजनक जवाब देने के लिए शब्द कम पड़ गए।
निष्कर्ष और आगे की कार्रवाई
यह बैठक इस बात का प्रमाण है कि यदि जनप्रतिनिधि सक्रिय हों, तो नौकरशाही की मनमानी पर लगाम लगाई जा सकती है। पानी के बिलों की धांधली, रिश्वतखोरी के आरोप और आवारा कुत्तों के आतंक जैसे गंभीर मुद्दों पर प्रशासन को अब कड़े एक्शन लेने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। नासिक की जनता अब इन आश्वासनों के पूरा होने का इंतजार कर रही है ताकि उन्हें रोजमर्रा की इन मूलभूत परेशानियों से स्थायी मुक्ति मिल सके।