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नेपाल-चीन सीमा पर मंडराया बड़ा खतरा, 290 भारतीय लापता; बाढ़ से उफारी नदियां

नेपाल-चीन सीमा पर मंडराया बड़ा खतरा, 290 भारतीय लापता; बाढ़ से उफारी नदियां

हिमालयी क्षेत्र में प्रकृति का एक ऐसा भयंकर तांडव देखने को मिल रहा है जिसने पिछले कई दशकों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। नेपाल और चीन की सीमा पर मंडरा रहे एक नए और बड़े खतरे ने दोनों देशों के प्रशासनिक तंत्र को नींद से जगा दिया है। सीमावर्ती इलाकों में लगातार हो रही भारी बारिश और भौगोलिक हलचल के बीच स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में मरने वालों की कुल संख्या 389 का आंकड़ा पार कर चुकी है, जबकि राहत और बचाव कार्य अभी भी युद्ध स्तर पर जारी हैं।

इस बीच, सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि नेपाल के विभिन्न हिस्सों में यात्रा या कामकाज के सिलसिले में गए कम से कम 290 भारतीय नागरिक अभी भी पूरी तरह से 'असंपर्क' (Uncontactable) बने हुए हैं। इन नागरिकों के साथ कोई संवाद न हो पाने के कारण उनके परिजनों और भारतीय विदेश मंत्रालय की सांसें अटकी हुई हैं। भारतीय दूतावास स्थानीय प्रशासन के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है ताकि लापता लोगों का जल्द से जल्द सुराग लगाया जा सके।

भारत और चीन की सीमाओं पर दो नई झीलों का निर्माण

मौजूदा संकट के पीछे सबसे बड़ा कारण नेपाल और चीन की साझा सीमा के दोनों तरफ दो नई झीलों (Glacial Lakes) का अचानक बन जाना है। वैज्ञानिकों और भू-विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार भूस्खलन और पहाड़ों के दरकने के कारण प्राकृतिक जलमार्गों का रास्ता रुक गया था, जिसके चलते ये खतरनाक झीलें अस्तित्व में आ गईं।

अब स्थिति यह है कि ये दोनों झीलें कभी भी फट सकती हैं (Threaten to Burst)। यदि इनमें से एक भी झील का बांध टूटता है, तो नीचे की घाटियों में ऐसा जलप्रलय आएगा जिसकी कल्पना करना भी सिहरन पैदा कर देता है। नेपाल और चीनी प्रशासन ने संयुक्त रूप से चेतावनी जारी करते हुए निचले इलाकों में रहने वाले हजारों लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए हैं।

प्रशासन और सुरक्षा बलों के सामने रेस्क्यू की बड़ी चुनौती

राहत एजेंसियों के लिए इस आपदा से निपटना लोहे के चने चबाने जैसा साबित हो रहा है। भारी भूस्खलन के कारण कई मुख्य मार्ग पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिससे राहत सामग्री और बचाव दलों का प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है। सेना के हेलिकॉप्टरों की मदद ली जा रही है, लेकिन खराब मौसम और लगातार छाए रहने वाले घने बादलों के कारण हवाई उड़ानें भी बार-बार बाधित हो रही हैं।

  • आपदा से जुड़ी मुख्य बातें:
  • मृतकों की संख्या 389 के पार पहुंच चुकी है और आंकड़े बढ़ने की आशंका है।
  • सीमा के दोनों तरफ बनी नई झीलों से बाढ़ का खतरा कई गुना बढ़ गया है।
  • लगभग 290 भारतीय नागरिकों से संपर्क टूटने के बाद कूटनीतिक स्तर पर चिंता बढ़ी है।
  • प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर लोगों से नदियां पार न करने की अपील की है।

लापता भारतीयों की तलाश तेज, हेल्पलाइन नंबर जारी

भारतीय नागरिकों के संपर्क में न होने की खबर मिलने के बाद नई दिल्ली में भी हलचल तेज हो गई है। विदेश मंत्रालय ने काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के साथ एक विशेष समन्वय कक्ष (Control Room) स्थापित किया है। नेपाल सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग के साथ मिलकर उन इलाकों की मैपिंग की जा रही है जहां इन भारतीयों के फंसे होने की सबसे ज्यादा संभावना है।

प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रहे स्थानीय गाइडों और ट्रेकर्स की मदद भी ली जा रही है। कई स्थानों पर मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह ठप हो चुके हैं, जो संपर्क न हो पाने का एक सबसे बड़ा तकनीकी कारण माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही संचार सेवाएं बहाल होंगी, लापता लोगों की सही स्थिति का पता चल सकेगा।

वैज्ञानिकों की चेतावनी: क्लाइमेट चेंज का खतरनाक रूप

पर्यावरणविदों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं अनियंत्रित विकास और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का सीधा परिणाम हैं। हिमालयी क्षेत्र की नाजुक पारिस्थितिकी (Fragile Ecosystem) इस तरह के भारी दबाव को झेलने में असमर्थ साबित हो रही है। समय रहते यदि ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इस क्षेत्र में इस तरह की आपदाएं और अधिक भयानक रूप ले सकती हैं।

फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें नेपाल और चीन की सीमा पर टिकी हैं। हर गुजरते घंटे के साथ झील के फटने का खतरा बढ़ता जा रहा है, और सुरक्षा एजेंसियां प्रार्थना कर रही हैं कि किसी तरह इस आसन्न तबाही को टाला जा सके या कम से कम किया जा सके।

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ममता पाठक

ममता पाठक

Chief Editor

ममता पाठक न्यूज़रूम की संपादकीय दिशा तय करने वाली प्रमुख स्तंभ हैं। अंतरराष्ट्रीय खबरों की गहरी समझ और वर्षों के अनुभव के साथ, वे कंटेंट की गुणवत्त...

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