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लखनऊ-गोरखपुर में जलभराव पर अखिलेश का वार, कहा- भ्रष्टाचार से फेल हुई ड्रेनेज व्यवस्था

लखनऊ-गोरखपुर में जलभराव पर अखिलेश का वार, कहा- भ्रष्टाचार से फेल हुई ड्रेनेज व्यवस्था

उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर इस समय भारी मानसूनी बारिश और उसके बाद की बेबसी की तस्वीर बयां कर रहे हैं। राजधानी लखनऊ से लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जिले गोरखपुर तक, हर तरफ जलभराव ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। इस गंभीर हालात पर राजनीतिक सरगर्मी भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (बीजपी) सरकार पर तीखा हमला बोला है। उनका सीधा आरोप है कि शहरों की यह दुर्दशा प्रकृति की मार से नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार का परिणाम है।

अखिलेश यादव का तीखा हमला: 'जलनिकासी व्यवस्था पूरी तरह फेल'

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों से सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के शहरों में जो जलभराव की स्थिति उत्पन्न हुई है, उसका मुख्य कारण जरूरत से ज्यादा बारिश होना नहीं है। उन्होंने दो टूक कहा कि यह समस्या पूरी तरह से 'भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार' की देन है, जिसके कारण शहरों की जलनिकासी (ड्रेनेज) व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा कर बैठ गई है।

उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, 'जब शहर की छोटी नालियों से लेकर बड़े-बड़े नाले तक गंदगी और गाद (Silt) से अटे पड़े हैं, तो पानी आखिर बहेगा कहां? सरकार कागजों पर तो बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन धरातल पर नालों की सफाई के नाम पर केवल खानापूर्ति और भ्रष्टाचार किया जाता है।' अखिलेश के मुताबिक, जल निकासी के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण हल्की बारिश में भी सड़कें तालाब बन जाती हैं और लोगों के घरों तक में गंदा पानी घुस जाता है.नदियों की स्थिति और गाद (Silt) का मुद्दा

शहरों के जलभराव के अलावा अखिलेश यादव ने प्राकृतिक जल स्रोतों यानी नदियों की बदहाली का मुद्दा भी पुरजोर तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की नदियां अपनी स्वाभाविक क्षमता खोती जा रही हैं क्योंकि उनके तल में भारी मात्रा में गाद जमा हो चुकी है।

उन्होंने भविष्य की कार्ययोजना पर बात करते हुए कहा कि जब समाजवादी पार्टी की सरकार आएगी या जब भी इस दिशा में सही नीतियां बनेंगी, तो नदियों से इस गाद को निकालकर उन्हें गहरा किया जाएगा। उनका मानना है कि नदियों के तल साफ होने से उनका प्राकृतिक बहाव सुगम होगा और बाढ़ या जलभराव की स्थिति से निपटने में बड़ी मदद मिलेगी। नदियों की उपेक्षा आज पूरे शहरी पारिस्थितिकी तंत्र को भारी पड़ रही है।

बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें: लखनऊ से गोरखपुर तक हाहाकार

सितंबर 2026 के इन दिनों में हो रही भारी बारिश ने उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे की पोल खोल दी है।

  • राजधानी लखनऊ का हाल: मूसलाधार बारिश के चलते लखनऊ की कई प्रमुख सड़कें पानी में डूब चुकी हैं। कई जगहों पर गाड़ियां पानी में बंद हो गईं तो एक बोलेरो के गड्ढे में फंसने की भी खबर सामने आई। इसके अलावा, गोमती नदी का जलस्तर भी उफान पर है, जिससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं।बिजली आपूर्ति पर असर: भारी बारिश और जलभराव के कारण राज्यभर में विद्युत आपूर्ति व्यवस्था पर भी बुरा असर पड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लगभग 15 लाख बिजली उपभोक्ता अंधेरे में रहने को मजबूर हैं, जबकि सुरक्षा कारणों से सैकड़ों फीडर और सब-स्टेशन बंद करने पड़े हैं।
  • गोरखपुर और अन्य शहर: मुख्यमंत्री के अपने गृह क्षेत्र गोरखपुर समेत कई अन्य जिलों में भी बारिश ने जल निकासी के दावों की हवा निकाल दी है। जनता सड़कों पर जलभराव के बीच आवाजाही करने को मजबूर है।

राजनीतिक बयानबाजी का दौर तेज

जलभराव के इस मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम पर है। जहां एक तरफ विपक्ष सरकार को बुनियादी सुविधाओं के अभाव और भ्रष्टाचार के लिए घेर रहा है, वहीं दूसरी तरफ सत्ता पक्ष के नेता भी पलटवार करने में पीछे नहीं हैं। केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने विपक्ष के बयानों पर पलटवार करते हुए कहा है कि सरकार आपदा से निपटने के लिए पूरी मुस्तैदी से काम कर रही है और राहत कार्य युद्ध स्तर पर जारी हैं।

हालांकि, आम जनता का सवाल यही है कि हर साल मानसून के आने से पहले बड़े-बड़े विज्ञापनों और दावों के बावजूद शहर क्यों पानी-पानी हो जाते हैं? जनता को जलभराव और ट्रैफिक जाम के इस चक्रव्यूह से कब मुक्ति मिलेगी, यह सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है।

फिलहाल, मौसम विभाग के पूर्वानुमानों को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड पर है, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त यह है कि यूपी के शहरी विकास और ड्रेनेज सिस्टम को मजबूत करने के लिए अभी बहुत काम किया जाना बाकी है। अखिलेश यादव के बयानों ने इस मुद्दे को एक बार फिर गरमा दिया है और आने वाले दिनों में यह राजनीति के केंद्र में रहने वाला है।


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तनु उपाध्याय

तनु उपाध्याय

Senior Sub Editor

तनु उपाध्याय एंटरटेनमेंट जगत की हलचल को करीब से समझती हैं और उसे दर्शकों के सामने आकर्षक अंदाज में पेश करती हैं। फिल्मों, टीवी, ओटीटी और वायरल ट्रे...

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