राजनीतिक गलियारों में बयानों के तीर लगातार चल रहे हैं। इसी कड़ी में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पिछड़ा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश पाल ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर जमकर हमला बोला है। प्रयागराज में अपने प्रवास के दौरान उन्होंने राहुल गांधी के उस कथित बयान और नैरेटिव पर सवाल खड़े किए जिसमें वे खुद को हिंदू और ब्राह्मण बताते हैं। प्रकाश पाल ने साफ शब्दों में कहा कि यह सिर्फ एक राजनीतिक दिखावा और फर्जी नैरेटिव है, जिसे जनता अब अच्छी तरह समझ चुकी है।
मंगलवार को प्रयागराज पहुंचने पर प्रकाश पाल ने फिरोज गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर पारसी कब्रिस्तान पहुंचकर उनकी मज़ार पर पुष्प अर्पित किए और श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने मीडिया से खुलकर बात की और विपक्ष के कई बड़े नेताओं को कटघरे में खड़ा किया। आइए जानते हैं उनके इस दौरे और बयानों के पीछे की पूरी राजनीतिक हलचल के बारे में विस्तार से।
फिरोज गांधी की मज़ार और राहुल गांधी पर तीखा प्रहार
प्रयागराज के पारसी कब्रिस्तान में फिरोज गांधी की मज़ार पर श्रद्धांजलि देने के बाद प्रकाश पाल ने राहुल गांधी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी के दादा फिरोज गांधी की कब्र इसी कब्रिस्तान में है, लेकिन सच सामने आने और पोल खुलने के डर से राहुल गांधी कभी यहां नहीं आते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गांधी परिवार लगातार अपनी जड़ों और इतिहास को लेकर जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहा है.
भाजपा नेता ने आगे कहा कि गांधी परिवार अब धीरे-धीरे खुद को महात्मा गांधी से जोड़ने का प्रयास कर रहा है। प्रियंका गांधी द्वारा महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दिए जाने के संदर्भ का जिक्र करते हुए उन्होंने दो टूक कहा कि इस परिवार को देश की जनता को गुमराह करना अब बंद कर देना चाहिए।
सोनू निगम के नाम का दिया अनोखा उदाहरण
बयानबाजी के दौरान प्रकाश पाल ने एक दिलचस्प उदाहरण दिया। गांधी उपनाम को लेकर चल रही बहस पर उन्होंने प्रसिद्ध गायक सोनू निगम का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार गायक सोनू निगम के नाम में 'निगम' शब्द होने मात्र से उनका नगर निगम से कोई लेना-देना नहीं हो जाता, ठीक उसी प्रकार केवल 'गांधी' उपनाम होने से राहुल गांधी का महात्मा गांधी से कोई खून का रिश्ता या वैचारिक संबंध साबित नहीं हो जाता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका यह उदाहरण किसी का अपमान करने के लिए नहीं था, बल्कि अपनी बात को सरल तरीके से जनता तक पहुँचाने के लिए था।
अखिलेश यादव के 'पीडीए' फॉर्मूले पर भी उठे सवाल
साल 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच राजनीतिक दलों की सरगर्मी बढ़ गई है। इसी परिप्रेक्ष्य में प्रकाश पाल ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के बहुचर्चित 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नारे को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव का पीडीए फॉर्मूला और कुछ नहीं बल्कि एक ढकोसला और दिखावा मात्र है।
- पिछड़ों और दलितों के अधिकार: भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि पिछली समाजवादी पार्टी की सरकारों के कार्यकाल के दौरान पिछड़ों, दलितों और सामान्य वर्ग के अधिकारों का जमकर हनन किया गया और उनके हक छीने गए।
- खुली चुनौती: प्रकाश पाल ने अखिलेश यादव को चुनौती दी कि वे अपनी पार्टी के शासनकाल के कार्यों और आंकड़ों को लेकर सीधे जनता के बीच जाएं और अपने कार्यकाल का हिसाब दें।
- भ्रम फैलाने की राजनीति: उन्होंने कहा कि जिस प्रकार कांग्रेस नेता जाति और धर्म के नाम पर देश को बांटने का प्रयास कर रहे हैं, उसी तरह सपा प्रमुख भी प्रदेश की जनता को भ्रमित कर रहे हैं।
सहारनपुर मस्जिद विवाद और न्यायालय के आदेश पर बयान
सहारनपुर में हाल ही में हुई मस्जिद गिराए जाने की कार्रवाई को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर भी प्रकाश पाल ने पलटवार किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरी कार्रवाई किसी राजनीतिक दल के इशारे पर नहीं, बल्कि माननीय न्यायालय के आदेशों के पालन में की गई है।
उन्होंने विपक्ष पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि सपा और कांग्रेस जैसे दल देश के संविधान और न्यायपालिका का सम्मान नहीं करते हैं। वंदे मातरम् को लेकर विपक्ष के रुख और अदालत के फैसलों के विरोध को उन्होंने उनके दोहरे चरित्र का सबसे बड़ा प्रमाण बताया।
"देश में ऐसी कई जगहें और मस्जिदें हैं, जिनकी यदि गहराई से खुदाई की जाए तो वहां प्राचीन मंदिरों और भारतीय अवशेषों के मिलने के दावे किए जाते हैं। कांग्रेस को अगर खोदा जाए तो उसके भीतर से केवल मुगल और आतंकवादी ही निकलेंगे।" - प्रकाश पाल, भाजपा पिछड़ा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष
स्थानीय नेतृत्व की रही मौजूदगी
इस प्रेस वार्ता और श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान भाजपा के कई दिग्गज नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। इनमें प्रमुख रूप से भाजपा पिछड़ा मोर्चा काशी क्षेत्र के अध्यक्ष अश्वनी पटेल, मोर्चा महानगर प्रभारी मनोज कुशवाहा, महानगर अध्यक्ष आनंद जायसवाल, अंगद पटेल, पीयूष जायसवाल, राजू पटेल, पूजा बिंद, दीपिका मौर्य, विजय गुप्ता, परमेश्वर, कृष्णपाल सिंह, नातेश्वर कुशवाहा और मीडिया विभाग से जुड़े विवेक मिश्रा सहित भारी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
यह पूरा घटनाक्रम आने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक सरगर्मी को और अधिक तेज करता नजर आ रहा है। एक तरफ जहां विपक्ष सरकार को घेरने में जुटा है, वहीं सत्ता पक्ष भी आक्रामक रुख अपनाते हुए हर एक मुद्दे पर कड़ा जवाब दे रहा है। देखना यह होगा कि जनता इन सियासी बयानों और दावों को किस रूप में लेती है।