उत्तर प्रदेश इस वक्त प्रकृति के भीषण प्रकोप की चपेट में है। राज्य के एक-दो नहीं बल्कि पूरे 37 जिले इन दिनों बाढ़ की भयंकर विभीषिका का सामना कर रहे हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि करीब 3.53 लाख लोग सीधे तौर पर इस आपदा से प्रभावित हुए हैं। खेतों में खड़ी फसलें जलमग्न हो चुकी हैं, गांवों का संपर्क जिला मुख्यालयों से कट गया है और लोग सुरक्षित ठिकानों की तलाश में ऊंचे स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं।
गंगा और सरयू नदी का बढ़ता जलस्तर
राज्य के केंद्रीय जल आयोग और राहत आयुक्त कार्यालय से मिले आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की मुख्य नदियां जैसे गंगा, यमुना, सरयू (घाघरा) और राप्ती उफान पर हैं। विशेष तौर पर पवित्र नदी गंगा कई प्रमुख स्थानों पर खतरे के निशान के बिल्कुल करीब या उससे ऊपर बह रही है। जलस्तर में लगातार हो रही इस वृद्धि ने मैदानी इलाकों और नदी के कछार में रहने वाले लोगों की रातों की नींद उड़ा दी है।
प्रशासन की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और पड़ोसी राज्यों से छोड़े गए पानी के कारण बांधों और बैराजों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। पानी का यह दबाव निचले इलाकों में आफत बनकर टूट रहा है।
प्रभावित जिलों की लंबी सूची और जमीनी हालात
बाढ़ के पानी ने उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल से लेकर तराई और मध्य जिलों तक को अपनी आगोश में ले लिया है। प्रभावित 37 जिलों में प्रयागराज, वाराणसी, बलिया, गाजीपुर, मिर्जापुर, गोरखपुर, देवरिया, लखीमपुर खीरी, बहराइच, और सीतापुर जैसे बड़े जिले शामिल हैं। इन क्षेत्रों में हालात सबसे ज्यादा नाजुक बने हुए हैं।
- फसलों का भारी नुकसान: धान, गन्ना और मौसमी सब्जियों की हजारों एकड़ खड़ी फसलें पानी में डूब चुकी हैं, जिससे किसानों की साल भर की मेहनत बर्बाद हो गई है।
- आवागमन बाधित: दर्जनों गांवों में सड़कें पानी में डूब चुकी हैं। ग्रामीणों को एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है।
- बिजली और पेयजल संकट: सुरक्षा की दृष्टि से कई प्रभावित इलाकों में बिजली आपूर्ति रोक दी गई है, जिससे लोगों को अंधेरे और पेयजल की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासनिक तैयारियां और राहत एवं बचाव कार्य
इस भीषण आपदा से निपटने के लिए राज्य सरकार और जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमों को तैनात किया गया है। साथ ही प्रांतीय रक्षक दल (PAC) की जल पुलिस भी राहत कार्यों में जुटी हुई है।
राहत शिविरों की स्थापना तेजी से की जा रही है, जहां बेघर हुए लोगों के लिए भोजन, पीने का पानी और जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमों को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि बाढ़ के पानी से फैलने वाली जलजनित बीमारियों (जैसे डायरिया, पीलिया और त्वचा रोग) से समय रहते निपटा जा सके।
मौसम विभाग का अगला पूर्वानुमान
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों तक राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रह सकता है। हालांकि, झमाझम बारिश से फिलहाल कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन नदियों के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में हो रही बारिश के कारण मैदानों में उतर रहे पानी से खतरा अभी टला नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नदियों के जलस्तर को घटने में अभी कुछ और दिनों का समय लग सकता है, तब तक तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सरकारी हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें।