Breaking
► प्रथम विश्व युद्ध की मशहूर डांसर माता हारी, जिन्हें जासूसी के आरोप में दी गई थी फांसी ► अंकिता भंडारी के माता-पिता इंडिया गेट से रिहा, दुष्यंत गौतम की नियुक्ति रद्द करने की मांग ► भोजपुर में बदलेगी पुलिस की कमान, मनीष कुमार सिन्हा संभालेंगे एसपी का प्रभार ► बरेली की जिला सूचनाधिकारी की बहन का लखनऊ में संदिग्ध परिस्थितियों में मिला शव ► नासिक के दत्तनगर में मनपा ने तेज किए जलापूर्ति सुधार के काम, बिछाई गई नई पाइपलाइन ► राजा रघुवंशी हत्याकांड: मां ने उठाई फांसी की मांग, कहा- हमें भी चाहिए न्याय ► प्रयागराज में माफिया अतीक की जमीन पर 602 फ्लैट्स का निर्माण, सीएम योगी करेंगे भूमिपूजन ► मुकेश कुमार शर्मा ने छेमियां चट्टी पर जनसंपर्क कर सुनी समस्याएं ► बांदा में मिट्टी खोदते समय ढहा टीला, दबने से आठ वर्षीय बच्ची की मौत ► रांची में दुर्गा पूजा की सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था कड़ी, एसपी ने किया रूट निरीक्षण ► प्रथम विश्व युद्ध की मशहूर डांसर माता हारी, जिन्हें जासूसी के आरोप में दी गई थी फांसी ► अंकिता भंडारी के माता-पिता इंडिया गेट से रिहा, दुष्यंत गौतम की नियुक्ति रद्द करने की मांग ► भोजपुर में बदलेगी पुलिस की कमान, मनीष कुमार सिन्हा संभालेंगे एसपी का प्रभार ► बरेली की जिला सूचनाधिकारी की बहन का लखनऊ में संदिग्ध परिस्थितियों में मिला शव ► नासिक के दत्तनगर में मनपा ने तेज किए जलापूर्ति सुधार के काम, बिछाई गई नई पाइपलाइन ► राजा रघुवंशी हत्याकांड: मां ने उठाई फांसी की मांग, कहा- हमें भी चाहिए न्याय ► प्रयागराज में माफिया अतीक की जमीन पर 602 फ्लैट्स का निर्माण, सीएम योगी करेंगे भूमिपूजन ► मुकेश कुमार शर्मा ने छेमियां चट्टी पर जनसंपर्क कर सुनी समस्याएं ► बांदा में मिट्टी खोदते समय ढहा टीला, दबने से आठ वर्षीय बच्ची की मौत ► रांची में दुर्गा पूजा की सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था कड़ी, एसपी ने किया रूट निरीक्षण

Chandra Grahan 2026: साल का आखिरी चंद्र ग्रहण शुरू, जानें भारत में इसका असर और टाइमिंग

Chandra Grahan 2026: साल का आखिरी चंद्र ग्रहण शुरू, जानें भारत में इसका असर और टाइमिंग

आकाश मंडल में खगोलीय घटनाओं का सिलसिला लगातार जारी है और इसी कड़ी में साल 2026 का आखिरी चंद्र ग्रहण आज यानी 28 अगस्त को अपने तय समय पर शुरू हो चुका है। आसमान में होने वाले इस अद्भुत परिवर्तन को लेकर खगोल प्रेमियों के साथ-साथ आम जनमानस में भी काफी उत्साह और जिज्ञासा बनी हुई है। आधुनिक विज्ञान जहाँ इस घटना को एक सामान्य खगोलीय परिघटना के रूप में देखता है, वहीं भारतीय सनातन परंपरा और ज्योतिष शास्त्र में इसे विशेष महत्व दिया जाता है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि आज लगने वाले इस चंद्र ग्रहण का समय क्या है, यह भारत में कहां-कहां नजर आएगा और इसका जीवन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।

साल 2026 का आखिरी चंद्र ग्रहण: मुख्य विवरण

खगोलीय गणनाओं के अनुसार, साल का यह दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण आज 28 अगस्त 2026 को घटित हो रहा है। पूर्णिमा की रात को जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच ठीक बीच में आ जाती है, तब चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया पड़ती है और इसे ही चंद्र ग्रहण कहा जाता है। इस बार का ग्रहण कई मायनों में खास है क्योंकि यह वर्ष के आखिरी पड़ाव पर हो रहा खगोलीय परिवर्तन है। देश और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में इसकी दृश्यता को लेकर मौसम विभाग और अंतरिक्ष वैज्ञानिकों द्वारा लगातार अपडेट्स साझा किए जा रहे हैं।

भारत में चंद्र ग्रहण की दृश्यता और समय

किसी भी खगोलीय घटना को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि वह देश विशेष में नजर आएगी या नहीं। आइए जानते हैं कि आज के इस चंद्र ग्रहण को लेकर क्या स्थिति है:

  • क्या भारत में दिखेगा ग्रहण?: भौगोलिक स्थिति और ग्रहण के मार्ग के अनुसार, इस बार का चंद्र ग्रहण भारत के कुछ चुनिंदा हिस्सों में ही आंशिक रूप से या उपच्छाया के रूप में देखा जा सकेगा। अधिकांश क्षेत्रों में इसके सीधे दर्शन दुर्लभ हो सकते हैं।
  • समय चक्र: आज 28 अगस्त की सुबह से ही ग्रहण की प्रक्रिया से जुड़े चरण शुरू हो चुके हैं। विभिन्न समयानुसार इसकी शुरुआत और समाप्ति के चरण तय किए गए हैं।
  • नजर आने वाले क्षेत्र: पूर्वी भारत के कुछ इलाकों या पूर्वोत्तर राज्यों में इसके कुछ प्रभावों को अनुभव किया जा सकता है, जबकि पश्चिमी और मध्य भारत में इसके नजर आने की संभावना बेहद कम है।

सूतक काल और उसका महत्व

भारतीय ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण से ठीक कुछ घंटे पहले 'सूतक काल' शुरू हो जाता है। चूंकि आज लगने वाला यह ग्रहण भारत में पूर्ण रूप से दृश्यमान नहीं है, इसलिए ज्योतिषीय जानकारों का मानना है कि इसके सूतक नियमों का पालन देश के हर हिस्से में अनिवार्य रूप से लागू नहीं होगा। हालांकि, जिन स्थानों पर यह स्पष्ट रूप से दिखाई देगा, वहां परंपरा के अनुसार नियमों का पालन किया जा रहा है।

सूतक काल के दौरान आमतौर पर निम्नलिखित बातों का ध्यान रखा जाता है:

  • मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और मूर्तियों को स्पर्श करने से बचा जाता है।
  • गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है ताकि वे और उनका होने वाला शिशु सुरक्षित रहें।
  • खाने-पीने की चीजों में तुलसी के पत्ते डालने की परंपरा है ताकि नकारात्मक प्रभाव से भोजन की शुद्धता बनी रहे।
  • नकारात्मक विचारों को त्यागकर ईश्वर का ध्यान और मंत्र जाप करने पर जोर दिया जाता है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण और खगोलीय महत्व

वैज्ञानिकों के लिए चंद्र ग्रहण हमेशा से अध्ययन का एक बेहतरीन विषय रहा है। जब चंद्रमा पृथ्वी की उपच्छाया या प्रच्छाया से गुजरता है, तो उसकी चमक में हल्का बदलाव आता है। कई बार चंद्रमा का रंग थोड़ा तांबे जैसा या मटमैला नजर आता है, जिसे 'ब्लड मून' जैसी संज्ञा दी जाती है। हालांकि हर ग्रहण एक जैसा नहीं होता। आज का यह ग्रहण अंतरिक्ष विज्ञान में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए ब्रह्मांड के नियमों को समझने का एक और अवसर लेकर आया है।

आम जनजीवन पर प्रभाव और सावधानियां

आधुनिक दौर में विज्ञान ने हमें यह सिखाया है कि चंद्र ग्रहण एक प्राकृतिक और तार्किक प्रक्रिया है, जिससे डरने की कोई आवश्यकता नहीं है। नग्न आंखों से ग्रहण देखने को लेकर हालांकि कोई बड़ा खतरा नहीं होता क्योंकि चंद्र ग्रहण सूर्य ग्रहण की तरह हानिकारक पराबैंगनी किरणें नहीं छोड़ता, फिर भी इसे देखने के लिए सामान्य सावधानियां बरती जा सकती हैं।

अगर आप भी आज के इस खगोलीय बदलाव के साक्षी बनना चाहते हैं, तो अपने नजदीकी मौसम या अंतरिक्ष विज्ञान केंद्र के अपडेट्स पर नजर रख सकते हैं। इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों पर भी कई वैज्ञानिक संस्थाएं इस पूरी घटना की लाइव स्ट्रीमिंग कर रही हैं ताकि दुनिया के किसी भी कोने में बैठा व्यक्ति इसे बिना किसी बाधा के देख सके।

निष्कर्ष

साल 2026 का आखिरी चंद्र ग्रहण एक बार फिर से हमें यह याद दिलाता है कि हमारी यह पृथ्वी और पूरा सौरमंडल कितनी व्यवस्थित गति से चल रहा है। चाहे इसे धार्मिक चश्मे से देखा जाए या वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, यह घटना प्रकृति के अनूठे रहस्यों को हमारे सामने लाती है। जैसे-जैसे आज का दिन आगे बढ़ेगा, इस खगोलीय परिघटना के प्रभाव और इसके सुंदर दृश्यों की तस्वीरें भी धीरे-धीरे सामने आती जाएंगी।

About the Author

रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

Writer

रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

Read More

अगली खबर पढ़ें:

आगे पढ़ें →