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नेपाल बाढ़ का खौफनाक मंजर: चितवन की मोर्चरी में अपनों को तलाशते बेबस लोग

नेपाल बाढ़ का खौफनाक मंजर: चितवन की मोर्चरी में अपनों को तलाशते बेबस लोग

प्रकृति के इस भयंकर प्रकोप ने हिलाकर रख दिया है

प्रकृति जब अपना विकराल रूप दिखाती है, तो इंसान के पास केवल लाचारी और आंसू ही बचते हैं। कुछ ऐसा ही हृदयविदारक दृश्य इन दिनों नेपाल के चितवन जिले से सामने आ रहा है, जहाँ विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने तबाही के ऐसे निशान छोड़े हैं जिन्हें देखकर किसी का भी कलेजा कांप उठेगा। मूसलाधार बारिश और उसके बाद आई आपदा ने पूरे जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। इस आपदा में सबसे अधिक कहर रसुवा और नुवाकोट जिलों पर टूटा है, जहाँ भारी तबाही की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। लेकिन जब बात जानमाल के नुकसान और उसकी भयावहता की आती है, तो चितवन का मंजर सबसे अधिक झकझोर देने वाला है।

मोर्चरी के बाहर अपनों की अंतहीन तलाश

चितवन के स्थानीय अस्पतालों की मोर्चरी अब पूरी तरह से भर चुकी है। हालात ये हैं कि वहां शवों को रखने के लिए भी पर्याप्त जगह नहीं बची है। मोर्चरी के बाहर खड़े लोगों के चेहरों पर जो सूनी आंखें और बेबसी है, वह किसी भी संवेदनशील इंसान को रुलाने के लिए काफी है। कोई अपने भाई को ढूंढ रहा है, तो कोई अपने माता-पिता या बच्चों की सुध लेने के लिए अधिकारियों के आगे हाथ जोड़ रहा है। हर कोई बस एक ही उम्मीद में जी रहा है कि शायद अगला शव उनके किसी अपने का न हो, या फिर अगर वही हो, तो कम से कम उन्हें अपनों का अंतिम संस्कार करने का मौका मिल सके।

रसुवा और नुवाकोट में सबसे ज्यादा नुकसान

प्रशासनिक आंकड़ों और ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, इस बार के मानसून ने नेपाल के कई पहाड़ी और मैदानी इलाकों को बुरी तरह प्रभावित किया है। विशेष रूप से रसुवा और नुवाकोट ऐसे क्षेत्र रहे हैं जहाँ भूमिस्खलन ने दर्जनों बस्तियों को मलबे के नीचे दबा दिया। घरों के घर रातों-रात नेस्तनाबूद हो गए। लोग जब तक कुछ समझ पाते, तब तक सैलाब सब कुछ बहा ले गया। इन इलाकों से सुरक्षित बचाए गए लोगों को राहत शिविरों में शरण दी गई है, लेकिन अपनों को खोने का गम और भविष्य की अनिश्चितता उनके चेहरों पर साफ झलकती है।

चितवन में क्यों मिल रहे हैं सबसे ज्यादा शव?

भौगोलिक स्थिति के कारण चितवन वह क्षेत्र बन गया है जहाँ नदियों के तेज बहाव और भूस्खलन के मलबे के साथ बहकर सबसे ज्यादा शव पहुंचे हैं। नदियां अपने साथ ऊपर के पहाड़ी इलाकों से सब कुछ बहाकर इस मैदानी और घाटी वाले हिस्से तक ले आई हैं। यही वजह है कि चितवन के विभिन्न अस्पतालों और मोर्चरी में लगातार शवों के पहुंचने का सिलसिला जारी है। स्थानीय प्रशासन और बचाव दल लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे हुए हैं, लेकिन शवों की इतनी बड़ी संख्या के सामने व्यवस्थाएं भी कम पड़ती नजर आ रही हैं।

बचाव कार्यों में आ रही भारी मुश्किलें

  • खराब मौसम: लगातार हो रही बारिश और घने कोहरे के कारण हेलिकॉप्टर और अन्य बचाव वाहनों की आवाजाही में भारी बाधा आ रही है।
  • कटे हुए रास्ते: मुख्य मार्ग और पुल बह जाने के कारण राहत सामग्री और मेडिकल टीमों का प्रभावित इलाकों तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है।
  • संसाधनों की कमी: एक साथ इतने बड़े पैमाने पर तबाही होने के कारण स्थानीय प्रशासन के संसाधन भी नाकाफी साबित हो रहे हैं।

आम जनता का दर्द और प्रशासन की अपील

मोर्चरी के बाहर बिलखते परिजनों का कहना है कि उन्हें अपनों के जीवित या मृत होने की पुख्ता जानकारी तक नहीं मिल पा रही है। प्रशासन ने डीएनए सैंपल लेने की प्रक्रिया शुरू की है ताकि अज्ञात शवों की शिनाख्त की जा सके, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में समय लग रहा है। सरकार और राहत एजेंसियों ने लोगों से अपील की है कि वे धैर्य बनाए रखें और अफवाहों पर ध्यान न दें। साथ ही, आपदा प्रभावित क्षेत्रों में लगातार राहत और बचाव कार्य जारी रखने का भरोसा दिलाया गया है।

यह त्रासदी केवल नेपाल के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि प्रकृति के साथ खिलवाड़ का परिणाम कितना भयानक हो सकता है। चितवन की मोर्चरी के बाहर खड़ी वह भीड़ सिर्फ इंसानों का हुजूम नहीं है, बल्कि यह उस टूटे हुए भरोसे और उम्मीद का प्रतीक है जो हर आपदा के बाद पीछे छूट जाता है। आने वाले दिनों में स्थिति कितनी सुधर पाएगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि राहत कार्य कितनी तेजी से आगे बढ़ते हैं, लेकिन फिलहाल यहां का हर एक कोना सिर्फ आंसुओं और दर्द की दास्तान कह रहा है।

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ममता पाठक

ममता पाठक

Chief Editor

ममता पाठक न्यूज़रूम की संपादकीय दिशा तय करने वाली प्रमुख स्तंभ हैं। अंतरराष्ट्रीय खबरों की गहरी समझ और वर्षों के अनुभव के साथ, वे कंटेंट की गुणवत्त...

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