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मोहाली आईटी सिटी में फंसा 7 हजार प्लॉट धारकों का मामला, एन्हांसमेंट चार्ज पर बैठक टली

मोहाली आईटी सिटी में फंसा 7 हजार प्लॉट धारकों का मामला, एन्हांसमेंट चार्ज पर बैठक टली

मोहाली के आईटी सिटी इलाके में इन दिनों हजारों प्लॉट मालिकों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एन्हांसमेंट चार्ज (Enhancement Charges) के जटिल और उलझे हुए मुद्दे को सुलझाने के लिए तय की गई महत्वपूर्ण बैठक एक बार फिर टाल दी गई है। इस हालिया घटनाक्रम से करीब 7,000 प्लॉट होल्डर्स और निवेशकों में गहरी निराशा और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। लोग लगातार यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर उनकी समस्याओं का स्थाई समाधान कब निकलेगा और उन्हें कब इन वित्तीय झंझटों से राहत मिलेगी।

क्यों टली गमाडा की महत्वपूर्ण बैठक?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस हाई-प्रोफाइल बैठक के स्थगित होने के पीछे प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हालिया कार्रवाई को मुख्य कारण बताया जा रहा है। एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट की गतिविधियों और जांच के चलते ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) के कई प्रमुख अधिकारी बैठक में उपस्थित नहीं हो सके। अधिकारियों की गैर-मौजूदगी के कारण जनता से जुड़े इस अतिसंवेदनशील मामले पर आगे की चर्चा रोकनी पड़ी।

स्थानीय क्षेत्र के पार्षद नसीब सिंह संधू ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि प्रशासनिक व्यस्तताओं और अधिकारियों के उपलब्ध न हो पाने के कारण मंगलवार को निर्धारित बैठक नहीं हो पाई। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्लॉट धारकों की चिंताओं को दूर करने के लिए जल्द ही एक नई तारीख तय की जाएगी, जिसकी सूचना आधिकारिक तौर पर पब्लिक नोटिस जारी करके दी जाएगी।

15 सितंबर की बैठक में भी नहीं मिले थे संतोषजनक जवाब

यह पहला मौका नहीं है जब प्लॉट होल्डर्स को निराशा हाथ लगी हो। इससे पहले 15 सितंबर को हुई बैठक में भी गमाडा के अधिकारी जनता के तीखे सवालों के स्पष्ट जवाब देने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए थे। उस दौरान भी बैठक बेनतीजा समाप्त हुई थी, जिससे लोगों में रोष और बढ़ गया था।

इलाके के प्रभावित प्लॉट धारकों और ट्रांसफरी का कहना है कि उन्हें प्रशासन की ओर से अचानक भारी-भरकम एन्हांसमेंट चार्ज के नोटिस थमा दिए गए हैं। 7,845 रुपये प्रति वर्ग गज की यह भारी राशि किस फॉर्मूले के तहत तय की गई है, इसका कोई भी तार्किक और संतोषजनक विवरण अभी तक साझा नहीं किया गया है।

प्लॉट मालिकों की प्रमुख मांगें और तीखे सवाल

  • विस्तृत ब्रेकअप की मांग: जमीन अधिग्रहण के मुआवजे, अदालती फैसलों के बाद बढ़ी हुई राशि, डेवलपमेंट चार्ज और कुल एन्हांसमेंट की पूरी गणना का स्पष्ट गणित मांगा गया है।
  • आवंटन के समय क्यों छिपाई गई बात?: वर्ष 2011 में शुरू हुए भूमि अधिग्रहण विवाद पर अदालत का बड़ा फैसला वर्ष 2015 में ही आ चुका था। ऐसे में जब वर्ष 2019 और 2020 में प्लॉट आवंटित किए जा रहे थे, तब यह एन्हांसमेंट राशि उसमें क्यों नहीं जोड़ी गई?
  • ब्याज वसूलने का आधार क्या है?: वर्ष 2015 से लेकर 2020 तक की अवधि की राशि पर अब भारी-भरकम ब्याज किस नियम के तहत वसूला जा रहा है, इसका जवाब मांगा जा रहा है।

अतिरिक्त वित्तीय बोझ से जूझ रहे निवेशक और उद्योगपति

इस पूरे प्रशासनिक पेंच का असर मोहाली आईटी सिटी के लगभग 7,000 आवंटियों और ट्रांसफरी पर पड़ रहा है। हालांकि, इनमें से करीब 200 औद्योगिक प्लॉट (Industrial Plot) मालिकों पर इसका वित्तीय असर सबसे ज्यादा गंभीर रूप से पड़ रहा है, क्योंकि उनकी देनदारियां और परियोजनाएं इस विवाद के चलते अधर में लटकी हुई हैं।

प्रभावित लोगों का तर्क है कि यदि अदालत का फैसला 2015 में ही आ गया था, तो बाद में प्लॉट बेचते या आवंटित करते वक्त ही गमाडा को अपनी देनदारियां स्पष्ट करनी चाहिए थीं। इतने लंबे अंतराल के बाद अचानक मूल रकम के साथ-साथ भारी ब्याज की मांग करना आम नागरिकों और निवेशकों की जेब पर एक बहुत बड़ा डाका डालने जैसा है। अलग-अलग समय पर और अलग-अलग दरों पर प्लॉट खरीदने वालों पर एक समान एन्हांसमेंट राशि थोपने के औचित्य पर भी गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

अब आगे क्या होगा?

वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए मोहाली आईटी सिटी के तमाम प्लॉट होल्डर्स की निगाहें अब गमाडा द्वारा जारी किए जाने वाले उस पब्लिक नोटिस पर टिकी हैं, जिसमें अगली बैठक की नई तारीख का ऐलान किया जाएगा। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि अगली बार जब अधिकारी मेज पर बैठेंगे, तो वे एन्हांसमेंट की पूरी और पारदर्शी गणना लेकर आएंगे ताकि इस अनिश्चितता के दौर को हमेशा के लिए खत्म किया जा सके।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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