झारखंड की राजधानी रांची में छोटी-छोटी बातें किस तरह बड़े आपराधिक मामलों में बदल जाती हैं, इसकी एक बानगी सुखदेवनगर थाना क्षेत्र से सामने आई है। सड़क पर गाड़ी हटाने के एक मामूली से विवाद ने ऐसा तूल पकड़ा कि देखते ही देखते बात मारपीट और लूटपाट तक जा पहुंची। इस घटना ने एक बार फिर शहरी इलाकों में बढ़ते सड़क पर गुस्से (रोड रेज) और असामाजिक तत्वों के बढ़तेौहसले पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले में दो मुख्य आरोपितों को दबोच लिया है और उनके पास से लूटा गया सामान भी बरामद कर लिया है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना 06 सितंबर को रांची के व्यस्त सुखदेवनगर थाना क्षेत्र के अमरूद बगान इलाके में घटी। पीड़ित पिंकू कुमार चौधरी अपने निजी वाहन से रोजाना की तरह अपने घर की ओर लौट रहे थे। जब वे इलाके में स्थित हरेगोबिंद नर्सिंग होम के पास पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि सड़क के बीचों-बीच एक कार और एक टेंपो बेतरतीब तरीके से खड़े हैं, जिसकी वजह से ट्रैफिक बाधित हो रहा था और वहां से गुजरना मुश्किल हो गया था।
चूंकि रास्ता रुक गया था, इसलिए पिंकू कुमार ने शालीनता से वहां मौजूद टेंपो चालक सूरज यादव से अपनी गाड़ी थोड़ा आगे या हटाने का आग्रह किया। किसी को यह अंदाजा नहीं था कि एक सामान्य सा अनुरोध इतनी बड़ी हिंसा का कारण बन जाएगा।
विवाद से खूनी संघर्ष तक का सफर
गाड़ी हटाने को कहने पर टेंपो चालक सूरज यादव आगबबूला हो गया। उसने अपनी बात मनवाने और धौंस जमाने के लिए तुरंत अपने बेटों—रोहित यादव, मोहित यादव और अंशु यादव—के साथ-साथ 4 से 5 अन्य अज्ञात लोगों को भी मौके पर बुला लिया। चंद मिनटों में ही वहां भारी भीड़ जमा हो गई और आरोपियों ने पिंकू कुमार को घेर लिया।
आरोपियों ने पहले पीड़ित के साथ अद्यभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए गाली-गलौज शुरू की और फिर देखते ही देखते उन पर लात-घूंसों से हमला कर दिया। अपनी जान बचाने और स्थिति से निकलने के लिए जब पिंकू ने मौके से भागने की कोशिश की, तो हमलावरों ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया और बेरहमी से पीटकर गंभीर रूप से घायल कर दिया।
मारपीट के दौरान गले से छीनी सोने की चेन
गुंडागर्दी का सिलसिला यहीं नहीं थमा। मारपीट के इस माहौल का फायदा उठाते हुए हमलावरों ने पीड़ित के गले से सोने की चेन भी बलपूर्वक खींच ली। इसके बाद आरोपियों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी और दोबारा उस रास्ते पर न दिखने की चेतावनी देते हुए वहां से भगा दिया। इस पूरी घटना से इलाके के लोगों में दहशत का माहौल बन गया।
घटना के तुरंत बाद डरे-सहमे पीड़ित पिंकू कुमार ने बिना देर किए सुखदेवनगर थाना पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फौरन भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच का दायरा बढ़ा दिया।
पुलिस की विशेष टीम और ताबड़तोड़ छापेमारी
मामले की संवेदनशीलता को भांपते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर कोतवाली सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) निखिल राय के नेतृत्व में एक विशेष छापेमारी दल (रेड टीम) का गठन किया गया। पुलिस टीम ने तकनीकी सर्विलांस और स्थानीय इनपुट के आधार पर जाल बिछाया।
पुलिस ने अपनी रणनीति को अमलीजामा पहनाते हुए 10 सितंबर की रात को ताबड़तोड़ दबिश दी और इस कांड में संलिप्त दो प्रमुख आरोपियों—मोहित कुमार और राजेन्द्र महली—को उनकेघरों से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने उनसे कड़ाई से पूछताछ की, तो उनकी निशानदेही पर घटना के दौरान लूटी गई सोने की कीमती चेन भी बरामद कर ली गई।
अन्य आरोपियों की तलाश जारी
शुक्रवार को मामले का खुलासा करते हुए कोतवाली एएसपी निखिल राय ने मीडिया को बताया कि पुलिस इस मामले में बेहद संजीदा है। गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों से पूछताछ के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। वहीं, इस पूरी वारदात में शामिल अन्य आरोपी जैसे सूरज यादव, रोहित यादव, अंशु यादव और उनके अन्य साथियों की धरपकड़ के लिए लगातार विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था को हाथ में लेने वाले किसी भी बख्शा नहीं जाएगा। इस घटना ने एक बार फिर शहर के नागरिकों के बीच यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि सड़कों पर जरा सी असहिष्णुता कितनी खतरनाक साबित हो सकती है।