झारखंड विधानसभा सचिवालय से इस वक्त एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है। विधानसभा सचिवालय में चालक के पद पर लंबे समय से अपनी निष्ठावान सेवाएं दे रहे सुरेश साव का शुक्रवार को असामयिक निधन हो गया। उनके इस अचानक चले जाने से पूरे प्रशासनिक महकमे और उनके परिवार में मातम पसरा हुआ है। सहकर्मी अपने एक बेहद ही मिलनसार और कर्तव्यनिष्ठ साथी को खोने से गहरे सदमे में हैं।
अंतिम दर्शन के लिए विधानसभा परिसर लाया गया पार्थिव शरीर
सुरेश साव के निधन की खबर मिलते ही झारखंड विधानसभा परिसर में शोक की लहर दौड़ गई। उनके सम्मान और अंतिम दर्शन के लिए उनके पार्थिव शरीर को विधानसभा लाया गया। जैसे ही उनका पार्थिव शरीर वहां पहुंचा, वहां मौजूद हर एक व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। अधिकारियों से लेकर चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों तक, हर किसी ने आगे बढ़कर अपने प्रिय साथी को अश्रुपूर्ण नेत्रों से अंतिम विदाई दी।
इस दौरान एक शोक सभा का भी आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित सभी लोगों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा। मौन रखकर ईश्वर से प्रार्थना की गई कि वे दिवंगत की आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और इस भारी दुख की घड़ी में उनके शोकसंतप्त परिवार को सहनशक्ति प्रदान करें।
दो दशक से अधिक का लंबा और समर्पित कार्यकाल
झारखंड विधानसभा के प्रभारी सचिव रंजीत कुमार ने शोक सभा के दौरान सुरेश साव के जीवन और उनके लंबे कार्यकाल पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सुरेश साव मूल रूप से पलामू जिले के डालटनगंज के रहने वाले थे। उनका पैतृक गांव जमुने, रजावाडीह था, जहां से निकलकर उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर राजधानी रांची में अपनी पहचान बनाई थी।
प्रभारी सचिव ने जानकारी दी कि सुरेश साव ने 28 जुलाई 2004 को झारखंड विधानसभा में चालक के रूप में अपनी सेवा की शुरुआत की थी। पिछले दो दशकों से अधिक समय (लगभग 22 साल) से वे पूरी ईमानदारी, कर्तव्यपरायणता और मुस्तैदी के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे थे। इस लंबी अवधि के दौरान उन्होंने विधानसभा के कई महत्वपूर्ण पदाधिकारियों और अतिथियों को अपनी सेवाएं दी थीं। उनके काम के प्रति समर्पण को हमेशा याद रखा जाएगा।
सहकर्मियों ने याद किए पुराने संस्मरण
शोक सभा के दौरान विधानसभा के कई अन्य चालकों और कर्मचारियों ने सुरेश साव के साथ बिताए पलों को याद किया। उनके सहकर्मियों का कहना था कि सुरेश जी बेहद मृदुभाषी, शांत स्वभाव के और हमेशा मदद के लिए तत्पर रहने वाले व्यक्ति थे। कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी वे अपनी ड्यूटी को सर्वोपरि रखते थे। विधानसभा की व्यस्त कार्यप्रणाली और सत्र के दौरान उनकी सक्रियता देखने लायक होती थी।
- 28 जुलाई 2004: सुरेश साव ने झारखंड विधानसभा में चालक पद संभाला था।
- मूल निवास: ग्राम-जमुने, रजावाडीह, डालटनगंज (पलामू), झारखंड।
- कार्यकाल: 22 वर्षों से अधिक की बेदाग और समर्पित सेवा।
- विशेषता: अपने सहकर्मियों के बीच मिलनसार और बेहद अनुशासित स्वभाव के लिए प्रसिद्ध।
प्रशासनिक गलियारों में शोक की गहरी छाया
एक लंबे समय तक किसी संस्था के साथ जुड़े रहने वाला कर्मचारी केवल एक पद धारक नहीं रहता, बल्कि वह उस संस्था के परिवार का एक अभिन्न हिस्सा बन जाता है। सुरेश साव भी झारखंड विधानसभा परिवार के एक मजबूत स्तंभ की तरह थे। उनके इस तरह अचानक दुनिया से चले जाने से प्रशासनिक गलियारों में एक खालीपन आ गया है, जिसे भर पाना आसान नहीं होगा।
वर्तमान में सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर भी लोग उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, तमाम विधायकों और सचिवालय के सभी अधिकारियों ने शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की है। संकट की इस घड़ी में पूरा विधानसभा सचिवालय परिवार उनके परिजनों के साथ खड़ा है।
इस प्रकार, एक समर्पित लोक सेवक का यूं चले जाना न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि झारखंड प्रशासनिक सेवा के लिए भी एक अपूरणीय क्षति है। उनकी यादें और उनके द्वारा दी गई सेवाएं हमेशा विधानसभा के इतिहास में दर्ज रहेंगी।