झारखंड की राजनीति में इन दिनों सरगर्मी तेज हो गई है। इसी कड़ी में आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो ने देश की राजधानी दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से एक अहम मुलाकात की है। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने झारखंड से जुड़े कई ज्वलंत और संवेदनशील मुद्दों को गृह मंत्री के सामने पुरजोर तरीके से रखा। इसमें सबसे प्रमुख मांग कुड़मी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिए जाने की रही, जिस पर लंबे समय से चर्चा चल रही है।
कुड़मी समुदाय को एसटी दर्जा देने की पुरानी मांग पर जोर
सुदेश महतो ने अपनी इस उच्चस्तरीय बैठक में मुख्य रूप से झारखंड के कुड़मी समुदाय को अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में शामिल करने का पुरजोर आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इस समुदाय की यह मांग काफी पुरानी और न्यायसंगत है।
सुदेश महतो के अनुसार, यदि कुड़मी समुदाय को एसटी का दर्जा मिल जाता है, तो इससे न केवल इस वर्ग के लोगों को बल्कि पूरे राज्य के सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और आर्थिक ताने-बाने को एक नई दिशा और मजबूती मिलेगी। इस समुदाय की सांस्कृतिक पहचान और अधिकारों की रक्षा के लिए यह कदम बेहद जरूरी माना जा रहा है।
स्थानीय भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने का आग्रह
मुलाकात के दौरान सिर्फ आरक्षण का मुद्दा ही नहीं उठा, बल्कि झारखंड की समृद्ध भाषाई विरासत को बचाने की दिशा में भी गंभीर चर्चा हुई। आजसू प्रमुख ने केंद्र सरकार से मांग की है कि झारखंड की प्रमुख स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाओं—विशेषकर कुड़माली, कुड़ुख और मुंडारी—को भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाए।
उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि भाषाएं केवल संवाद का साधन नहीं होतीं, बल्कि वे किसी भी समाज की आत्मा और उसकी सांस्कृतिक धरोहर का सबसे अहम हिस्सा होती हैं। इन भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन से संबंधित समाजों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सकता है।
जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में अनियमितता पर कड़ा रुख
छात्रों और युवाओं के भविष्य को लेकर आजसू प्रमुख ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं, पेपर लीक मामलों और भारी वित्तीय गड़बड़ियों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री को सौंपे गए ज्ञापन के हवाले से बताया कि वर्तमान में राज्य की कुल 39 परीक्षाएं जांच के दायरे में हैं, जबकि 06 परीक्षाओं को राज्य सरकार द्वारा पहले ही स्थगित किया जा चुका है। इन तमाम मामलों की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने सीबीआई और ईडी से जांच कराने का औपचारिक आग्रह किया है। सुदेश महतो ने दो टूक शब्दों में कहा कि युवाओं का भविष्य और उनके परिश्रम की पारदर्शिता किसी भी सूरत में दांव पर नहीं लगाई जा सकती है।
खनिज प्रभावित क्षेत्रों और डीएमएफ फंड में घोटाले की सीबीआई जांच की मांग
झारखंड अपनी खनिज संपदा के लिए पूरे देश में जाना जाता है, लेकिन विडंबना यह है कि जिन क्षेत्रों से खनिज निकाला जाता है, वहां के स्थानीय लोग अक्सर विकास से वंचित रह जाते हैं। इस विसंगति को दूर करने के लिए सुदेश महतो ने झारखंड में मिनरल बीयरिंग लैंड सेस लगाने की पुरजोर मांग की है।
उन्होंने सुझाव दिया कि इस सेस से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल केवल और केवल खनन प्रभावित क्षेत्रों के परिवारों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए किया जाना चाहिए। इसके साथ ही, इस राशि के उपयोग की निगरानी और कार्यों का निर्धारण सीधे भारत सरकार के स्तर पर होना चाहिए ताकि इसमें किसी तरह की हेरफेर न हो सके।
इसके अलावा, उन्होंने डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) फंड के उपयोग में कथित अनियमितताओं और बड़े पैमाने पर हुए घोटालों की भी सीबीआई जांच कराने की मांग उठाई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि डीएमएफ फंड का मूल उद्देश्य खनन प्रभावित इलाकों के निवासियों के हितों की रक्षा करना है, और इसमें होने वाली किसी भी प्रकार की धांधली बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुदेश महतो की यह मुलाकात आगामी समय में झारखंड की सियासत पर एक बड़ा प्रभाव डाल सकती है। एक तरफ जहां युवा वर्ग परीक्षाओं में धांधली की सीबीआई जांच की मांग से जुड़ा है, वहीं दूसरी طرف कुड़मी समुदाय और स्थानीय भाषाओं के संरक्षण का मुद्दा भी व्यापक जनसमर्थन जुटाने की क्षमता रखता है। अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार इन तमाम मांगों पर क्या और कब तक ठोस कदम उठाती है।