झारखंड की राजधानी रांची में पुलिस प्रशासन ने आम नागरिकों और खाकी के बीच की दूरी को कम करने के लिए एक बेहद असरदार कदम उठाया है। शुक्रवार को जिले के तमाम थानों और पुलिस चौकियों (ओपी) में एक विशेष 'जन शिकायत समाधान कार्यक्रम' का आयोजन किया गया। इस अनूठी पहल का मुख्य मकसद लोगों की छोटी-बड़ी परेशानियों को सीधे सुनना और उनका मौके पर ही कानूनी या प्रशासनिक समाधान निकालना था। कार्यक्रम के दौरान आम जनता का भारी उत्साह देखने को मिला और बड़ी संख्या में लोगों ने थाने पहुंचकर अपनी समस्याएं पुलिस अधिकारियों के सामने रखीं।
एसएसपी राकेश रंजन के निर्देश पर एक्शन मोड में उतरी रांची पुलिस
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) राकेश रंजन द्वारा जारी किए गए सख्त और स्पष्ट निर्देशों के बाद, रांची पुलिस पूरी तरह से एक्शन मोड में नजर आई। जनता की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक के सभी बड़े अधिकारी सड़कों पर और थानों में मुस्तैद दिखे।
इस विशेष अभियान के तहत नगर एसपी पारस राणा, ग्रामीण एसपी गौरव गोस्वामी, यातायात एसपी राकेश सिंह समेत जिले के तमाम डीएसपी और थाना प्रभारियों ने अपने-अपने अधिकार क्षेत्र वाले थानों में बैठकर लोगों की फरियाद सुनी। अधिकारियों के इस तरह सीधे जनता के बीच पहुंचकर समस्याएं सुनने से आम लोगों में पुलिस के प्रति भरोसा और अधिक मजबूत होता दिखाई दिया।
एक ही दिन में मिले 110 आवेदन, 70 का हुआ ऑन-द-स्पॉट निपटारा
पुलिस मुख्यालय से मिले आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार को आयोजित इस जन शिकायत समाधान कार्यक्रम के दौरान रांची जिले के अलग-अलग थानों में कुल 110 शिकायतें और आवेदन प्राप्त हुए। पुलिस टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए इनमें से 70 मामलों का त्वरित कार्रवाई करते हुए उसी दिन सफलतापूर्वक निपटारा कर दिया।
जिन मामलों का मौके पर ही समाधान हो गया, उनमें मुख्य रूप से जमीन विवाद, आपसी पड़ोसी झगड़े, घरेलू कलह और छोटे-मोटे वित्तीय लेन-देन से जुड़ी शिकायतें शामिल थीं। पुलिस अधिकारियों ने दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर आपसी सहमति से कई मामलों को सुलझाया, जिससे लोगों के कोर्ट-कचहरी के चक्कर और समय दोनों की बचत हुई।
संवेदनशील मामलों में तत्काल दर्ज की गईं 5 एफआईआर
हर शिकायत का समाधान बातचीत से संभव नहीं होता, और पुलिस ने इस बात को समझते हुए गंभीर मामलों में बिना किसी देरी के सख्त कानूनी कदम उठाए। कुछ संवेदनशील मामलों की प्रकृति को देखते हुए पुलिस ने तुरंत संज्ञान लिया और कुल 5 नई प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर दीं। इन मामलों में आगे की कानूनी जांच और सबूत जुटाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है ताकि दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रमों से पुलिसिंग व्यवस्था में पारदर्शिता आती है और अपराधियों के मन में कानून का डर बना रहता है, वहीं दूसरी ओर आम जनता का पुलिस पर विश्वास और गहरा होता है।
बाकी शिकायतों की गुणवत्तापूर्ण जांच के निर्देश
जो आवेदन या शिकायतें शुक्रवार को पूरी तरह से नहीं सुलझाई जा सकीं, उन्हें लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह गंभीर है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि शेष बची शिकायतों की गुणवत्तापूर्ण तरीके से गहराई से जांच की जा रही है। संबंधित सभी थाना प्रभारियों को यह सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे इन लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करें और निर्धारित समय सीमा के भीतर उचित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें।
जनता और पुलिस के बीच बढ़ रहा है संवाद
आम तौर पर थानों के चक्कर काटने से कतराने वाले आम नागरिक इस कार्यक्रम के जरिए खुलकर अपनी बात रखने थाने पहुंचे। बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं ने बढ़-चढ़कर अपनी समस्याएं साझा कीं। पुलिस अधिकारियों ने भी पूरी संवेदनशीलता के साथ हर एक की बात सुनी और उन्हें न्याय का भरोसा दिलाया।
- त्वरित न्याय: छोटे विवादों का मौके पर ही निपटारा होने से आम जनता को राहत।
- पारदर्शिता: अधिकारियों की सीधी मौजूदगी से पुलिसिया कामकाज में पारदर्शिता।
- विश्वास बहाली: जनता और पुलिस के बीच की खाई को पाटने की दिशा में एक बड़ा कदम।
रांची पुलिस के इस जन शिकायत समाधान कार्यक्रम की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि यदि प्रशासन चाहे, तो जमीनी स्तर पर जनता की समस्याओं का समाधान बहुत कम समय में किया जा सकता है। आने वाले दिनों में भी इस तरह के अभियानों के जारी रहने की उम्मीद है, ताकि अपराध पर लगाम कसने के साथ-साथ आम जनजीवन को भी पूरी तरह सुरक्षित और सुगम बनाया जा सके।