खरीददारी करते वक्त हम अक्सर पैकेट पर लिखे बड़े-बड़े दावों पर आंख मूंदकर भरोसा कर लेते हैं। हमें लगता है कि किसी प्रतिष्ठित या बड़े सुपरमार्केट में बिकने वाली हर चीज पूरी तरह सुरक्षित और मानकों पर खरी होगी। लेकिन झारखंड के जमशेदपुर से जो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है, वह आपके इस भरोसे को हिलाकर रख सकती है। देश के सर्वोच्च खाद्य नियामक के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, शहर के नामचीन रिटेल स्टोर्स में खुलेआम ऐसे खाद्य उत्पाद बिक रहे थे जिन पर गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं।
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की सख्ती के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने जमशेदपुर के कई प्रमुख बाजारों और मॉल में औचक निरीक्षण किया। इस दौरान जो खुलासे हुए, उन्होंने अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। शहर के बड़े शॉपिंग ब्रांड्स के स्टोरों में वे तमाम उत्पाद धड़ल्ले से बिकते मिले, जिनकी बिक्री पर नियामक पहले ही रोक लगा चुका है।
इन बड़े ब्रांड्स के स्टोरों पर गिरी गाज
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने जिन प्रतिष्ठानों पर शिकंजा कसा है, उनमें शहर के सबसे लोकप्रिय शॉपिंग डेस्टिनेशन शामिल हैं। इस सूची में परसुडीह और अन्य इलाकों के बड़े नाम प्रमुखता से शामिल हैं:
- डी-मार्ट (D-Mart) - शहर के कई लोकप्रिय आउटलेट्स।
- रिलायंस रिटेल लिमिटेड (Reliance Retail) - डिमना रोड समेत अन्य प्रमुख स्टोर।
- विशाल मेगा मार्ट (Vishal Mega Mart) - जुगसलाई और पारडीह स्थित स्टोर।
- अपना मार्ट और राही अपना मार्ट (Mango & Parsudih) - स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर संचालित होने वाले स्टोर।
इन सभी प्रतिष्ठानों को खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से कड़े शब्दों में नोटिस जारी किया गया है। अधिकारियों ने न केवल इन उत्पादों की तत्काल प्रभाव से बिक्री रोकने को कहा है, बल्कि पूरे स्टॉक को बाजार से वापस मंगाने का सख्त निर्देश भी दिया है।
किन उत्पादों पर है विवाद? आखिर क्या है मामला?
फूड सेफ्टी ऑफिसर संजय कुमार के नेतृत्व में चलाए जा रहे इस विशेष जांच अभियान के दौरान स्टोरों की शेल्फ पर कई ऐसे जाने-माने ब्रांड्स के उत्पाद रखे मिले, जिन्हें भ्रामक दावों (Misleading Claims) और गलत लेबलिंग (Mis-labeling) के चलते FSSAI की रेड लिस्ट में डाला गया है।
जांच टीम को जिन प्रमुख उत्पादों का स्टॉक मिला, उनमें ये नाम शामिल हैं:
- रेड बुल एनर्जी ड्रिंक (Red Bull Energy Drink)
- स्टिंग एनर्जी ड्रिंक (Sting Energy)
- कैंपा एनर्जी ड्रिंक (Campa Energy Drink)
- सफ़ोला गोल्ड और सफ़ोला टोटल हार्ट प्रो कुकिंग ऑयल
- फॉर्च्यून सोयाबीन ऑयल (Fortune Soybean Oil)
- चोको पाई ऑरेंज बिस्कुट और लोटे चोको पाई
- पतंजलि दूध बिस्कुट
- किंडर जाय (Kinder Joy)
- मान्स्टर एनर्जी और गेटोरेड स्पोर्ट्स ड्रिंक
अमूल शुगर-फ्री आइसक्रीआपको बता दें कि FSSAI, नई दिल्ली और झारखंड के अपर मुख्य सचिव सह खाद्य सुरक्षा आयुक्त के स्पष्ट निर्देश पर पूरे राज्य में ऐसे उत्पादों की मैपिंग और जांच की जा रही है। नियामक ने देश भर में कुल 115 ऐसे खाद्य उत्पादों को चिन्हित किया है जिनके विज्ञापनों में भ्रामक दावे किए गए थे या जिनके मानकों में खामियां पाई गई थीं।
बड़ा सवाल: पाबंदी के बावजूद स्टोरों तक कैसे पहुंचे ये उत्पाद?
इस पूरी कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह उठ रहा है कि जब इन उत्पादों की बिक्री और निर्माण से जुड़े दावों पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी थी, तो ये जमशेदपुर के बड़े रिटेल स्टोरों के फ्लोर तक कैसे पहुंच गए? क्या सप्लाई चेन में बैठे लोगों ने नियमों को ताक पर रख दिया या फिर स्टोर प्रबंधन ने मुनाफे के चक्कर में नियमों की अनदेखी की?
खाद्य सुरक्षा विभाग अब इस पूरे सप्लाई नेटवर्क की थाह लेने में जुट गया है। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इन प्रतिबंधित या संदेहास्पद उत्पादों की सप्लाई किस चैनल्स के जरिए इन बड़े स्टोरों तक पहुंच रही थी। आखिर कौन सी ऐसी खामी है जिसकी वजह से उपभोक्ताओं की सेहत के साथ यह खिलवाड़ जारी था?
प्रशासन की दो टूक: नियमों का पालन नहीं हुआ तो होगी कानूनी कार्रवाई
विभाग के अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि यह अभियान यहीं रुकने वाला नहीं है। आने वाले दिनों में जमशेदपुर के अन्य छोटे-बड़े थोक और खुदरा विक्रेताओं पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी।
"प्रतिष्ठानों में खाद्य-पदार्थों की गुणवत्ता और लेबलिंग की बारीकी से जांच की जा रही है। FSSAI द्वारा आदेशित सभी संदेhaस्पद उत्पादों को तुरंत वापस करने और उनकी बिक्री रोकने के निर्देश दे दिए गए हैं। यदि इसके बाद भी किसी दुकान या स्टोर में ये उत्पाद पाए जाते हैं, तो खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत बेहद कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी," - संजय कुमार, फूड सेफ्टी ऑफिस
आम जनता के लिए क्या है सीख?
यह घटना एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करती है कि उपभोक्ताओं को खुद भी अपने अधिकारों और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना पड़ेगा। बड़े ब्रांड या चमकीले पैकेट देखकर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय, खाद्य पदार्थों के पैकेट पर लिखी सामग्री, उसके दावों और FSSAI के लाइसेंस नंबर की जांच करना बेहद जरूरी है। यदि आपको भी अपने नजदीकी स्टोर में ऐसे किसी भ्रामक दावे वाले उत्पाद की बिक्री की जानकारी मिलती है, तो आप इसकी शिकायत सीधे खाद्य सुरक्षा विभाग से कर सकते हैं।रम