तमिलनाडु की सांस्कृतिक और साहित्यिक दुनिया से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। मशहूर तमिल विद्वान, प्रख्यात डिबेट मॉडरेटर और अभिनेता सोलोमन पप्पैया अब हमारे बीच नहीं रहे। उनके निधन से पूरे दक्षिण भारत, विशेषकर तमिल भाषी जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। साहित्यिक मंचों, टीवी डिबेट्स और अपनी अनूठी वक्ता शैली के जरिए तमिल भाषा और संस्कृति को जन-जन तक पहुँचाने वाले पप्पैया के जाने से कला और साहित्य जगत को एक गहरा आघात लगा है।
शुक्रवार, 11 सितम्बर 2026 को उनके निधन की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया पर शोक संदेशों का तांता लग गया। आम जनता से लेकर फिल्म जगत के सुपरस्टार्स और राज्य के राजनीतिक दिग्गजों ने नम आँखों से उन्हें अंतिम विदाई दी और उनके योगदान को याद किया।
सुपरस्टार रजनीकांत ने व्यक्त किया गहरा शोक
दक्षिण भारतीय सिनेमा के मेगास्टार रजनीकांत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक भावुक पोस्ट शेयर कर प्रोफेसर सोलोमन पप्पैया के निधन पर गहरा दुख जताया है। रजनीकांत ने लिखा कि पप्पैया एक महान तमिल विद्वान थे, जिन्होंने साहित्य और बौद्धिक चर्चाओं को केवल विश्वविद्यालयों या उच्च शिक्षित वर्ग तक सीमित नहीं रहने दिया।
सुपरस्टार ने आगे कहा, "अपनी खास और सहज शैली, बेहतरीन हास्यबोध और प्रभावशाली प्रस्तुति के माध्यम से उन्होंने तमिल भाषा और साहित्य को आम आदमी के जीवन से जोड़ा। उनका जाना हमारे समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है। ईश्वर उनकी दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दे।"
मुख्यमंत्री थलपति विजय ने बताया इसे बड़ी क्षति
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय ने भी सोलोमन पप्पैया के निधन पर तीव्र शोक संवेदना व्यक्त की है। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के आधिकारिक हैंडल से जारी एक विशेष संदेश में मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि पप्पैया ने अपने बेबाक और ज्ञानवर्धक मंचों के जरिए पूरी दुनिया को तमिल भाषा की प्राचीन महानता और तमिल लोगों की गौरवशाली जीवनशैली से परिचित कराया।
मुख्यमंत्री विजय ने उनके भाषणों में मौजूद हास्य की फुहारों, तमिल व्याकरण और शब्दावली पर उनकी गहरी पकड़ तथा जटिल सामाजिक विचारों को भी अत्यंत सरल तरीके से आम जनता तक पहुँचाने की उनकी अद्भुत क्षमता की खुलकर प्रशंसा की।
मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा,
"प्रोफेसर सोलोमन पप्पैया ने पारंपरिक साहित्यिक मंचों को केवल मनोरंजन का साधन नहीं रहने दिया, बल्कि उन्हें ऐसा माध्यम बनाया जो लोगों को सोचने, समझने और वैचारिक मंथन करने के लिए प्रेरित करता था। तमिल भाषा और कला जगत में उनका योगदान इतना विशाल है कि इसकी भरपाई निकट भविष्य में असंभव है। इस दुख की घड़ी में मैं उनके परिवार, प्रियजनों और दुनिया भर के तमिल प्रेमियों के साथ खड़ा हूँ।"
राजनीतिक गलियारों में भी शोक की लहर
सिनेमा और साहित्य के अलावा राजनीतिक दिग्गजों ने भी सोलोमन पप्पैया के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। तमिलनाडु भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि पप्पैया एक प्रख्यात तमिल विद्वान थे जिन्होंने हमेशा समाजोपयोगी विचारों को बढ़ावा दिया। अन्नामलाई ने उनके परिजनों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।
जन-जन के बीच लोकप्रिय थे पप्पैया
सोलोमन पप्पैया केवल एक किताबी विद्वान नहीं थे, बल्कि वे तमिलनाडु के घर-घर में एक जाना-पहचाना चेहरा थे। खासकर टेलीविजन पर प्रसारित होने वाले उनके पट्टिमन्रम् (सांस्कृतिक और सामाजिक बहस कार्यक्रम) बेहद लोकप्रिय थे। इन कार्यक्रमों में उनकी वाक्पटुता, तार्किक क्षमता और विनोदप्रियता दर्शकों को बांधे रखती थी। उन्होंने तमिल भाषा को जीवंत बनाए रखने में जो भूमिका निभाई, वह इतिहास के पन्नों में हमेशा दर्ज रहेगी।
उनका यह जाना एक युग के अंत जैसा है। भले ही वे शारीरिक रूप से अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके द्वारा बोए गए ज्ञान के बीज और तमिल भाषा के प्रति उनका प्रेम आने वाली कई पीढ़ियों का मार्गदर्शन करता रहेगा।