उत्तराखंड की बहुचर्चित अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की परीक्षाओं में हुई धांधली का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर आ गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने वर्ष 2016 की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VPDO) भर्ती परीक्षा में हुई व्यापक स्तर की अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। ताजा कार्रवाई के तहत केंद्रीय एजेंसी ने राजधानी देहरादून में ताबड़तोड़ छापेमारी की, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इस बड़ी कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में बेहिसाबी नकदी, सोना और लग्जरी घड़ियां बरामद की गई हैं, जिससे राजनीतिक गलियारों में भी हड़कंप मच गया है।
धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत बड़ी कार्रवाई
प्राप्त जानकारी के अनुसार, केंद्रीय जांच एजेंसी ने धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत यह सख्त कदम उठाया है। जांच के दायरे में केवल बिचौलिए या निचले स्तर के कर्मचारी ही नहीं, बल्कि आयोग के शीर्ष पदों पर रहे जिम्मेदार अधिकारी भी शामिल हैं। तलाशी अभियान के दौरान आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष, तत्कालीन सचिव, परीक्षा नियंत्रक, ओएमआर शीट (OMR Sheets) की प्रोसेसिंग का जिम्मा संभालने वाली प्राइवेट कंप्यूटर एजेंसी के मालिक और कथित दलालों के ठिकानों को खंगाला गया।
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह पूरा मामला देहरादून के विजिलेंस थाने में दर्ज मूल प्राथमिकी (FIR) और उससे जुड़ी अन्य तीन प्राथमिकियों के आधार पर आगे बढ़ रहा है। शुरुआती दौर की जांच में यह बात सामने आई थी कि वीपीडीओ परीक्षा की ओएमआर उत्तर पुस्तिकाओं को आयोग के महफूज और सुरक्षित कक्ष से निकालकर तत्कालीन सचिव के निजी आवास पर ले जाया गया था। यहीं से धांधली का पूरा खेल शुरू हुआ था।
कैसे रची गई थी ओएमआर शीट बदलने की साजिश?
एजेंसी की अब तक की तफ्तीश में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि तत्कालीन सचिव के आवास पर ले जाई गई ओएमआर शीट में उन प्रपत्रों को छांटा गया, जिनमें कम गोले भरे गए थे। इसके बाद उनके अनुक्रमांक (Roll Numbers) नोट कर लिए गए। इन नंबरों को निजी कंप्यूटर एजेंसी के कर्मचारियों तक पहुंचाया गया।
आरोप है कि इन भ्रष्ट कर्मचारियों ने बिचौलियों के साथ मिलकर मोटी रकम वसूली। इसके एवज में ओएमआर शीट में खाली गोलों को दोबारा भरा गया और उनमें बड़े पैमाने पर फेरबदल किया गया। हेरफेर के बाद इन उत्तर पुस्तिकाओं को बेहद चालाकी से दोबारा सील कर दिया गया ताकि किसी को शक न हो। इस पूरी साजिश की परतें उधेड़ने के लिए अब ईडी डिजिटल और फिजिकल सबूतों को खंगाल रही है।
पूर्व सीएम के निजी सहायक के आवास पर ED का छापा
इस पूरी कार्रवाई के दौरान सबसे बड़ा और चर्चित नाम चंदन सिंह जीना का सामने आया है। चंदन सिंह जीना वर्तमान में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश सिंह रावत के निजी सहायक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इतना ही नहीं, वह वर्ष 2014 से 2017 के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री के कार्यकाल में विशेष कार्याधिकारी (OSD) के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।
ईडी की टीम ने जब चंदन सिंह जीना के आवास पर धावा बोला, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। उनके घर से जांच के दौरान जो मिला, उसने वित्तीय अनियमितता की सभी सीमाओं को पार कर दिया:
- बेहिसाबी नकदी: घर की तलाशी के दौरान 32 लाख रुपये की भारी-भरकम नकद राशि बरामद की गई, जिसका कोई संतोषजनक हिसाब वह नहीं दे सके।
- कीमती सोना: छापे में लगभग 200.5 ग्राम वजन के सोने के 13 सिक्के और 7 सोने की चेन मिलीं।
- लग्जरी घड़ियों का शौक: रोलेक्स (Rolex), राडो (Rado), पियाजे (Piaget), मोवाडो (Movado), टिसॉट (Tissot) और कैसियो एडिफाइस जैसे दुनिया के महंगे और प्रतिष्ठित ब्रांडों की कुल 12 कलाई घड़ियां जब्त की गईं।
बैंक खाते फ्रीज और करोड़ों की संपत्तियां सील
नकद और जेवरात के अलावा, जांच एजेंसी ने चंदन सिंह जीना और उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों को भी शिकंजे में ले लिया है। PMLA की धारा 17(1ए) के तहत इन सभी खातों को फ्रीज कर दिया गया है। इन खातों में कुल 52,16,312 रुपये की रकम जमा पाई गई है। इसके साथ ही उनका मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया गया है, जिसे अब डेटा रिकवरी और गहन फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा।
वित्तीय विशेषज्ञों और एजेंसी के आकलन के मुताबिक, चंदन सिंह जीना के आवास से अब तक जो संपत्तियां जब्त या फ्रीज की गई हैं, उनकी मौजूदा कुल कीमत करीब 1.28 करोड़ रुपये आंकी गई है। दिलचस्प बात यह है कि इसमें अभी उन 12 महंगी घड़ियों का बाजार मूल्यांकन शामिल नहीं है, जिनकी कीमत का अलग से आकलन किया जा रहा है। मूल्यांकन पूरा होने के बाद यह आंकड़ा और भी ऊपर जा सकता है।
अन्य अधिकारियों के यहां भी मिले बेहिसाबी सबूत
चंदन सिंह जीना ही नहीं, बल्कि इस छापेमारी के दायरे में आए अन्य पूर्व यूकेएसएसएससी अधिकारियों और संदिग्धों के यहां से भी सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। कई अन्य परिसरों से भी अलग-अलग मात्रा में अघोषित नकदी और सोने के आभूषण बरामद किए गए हैं। मामले से जुड़े तमाम लोगों के मोबाइल फोन और डिजिटल डिवाइस जब्त कर लिए गए हैं, जिनकी फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद कई और बड़े चेहरों के बेनकाब होने की संभावना जताई जा रही है।
भर्ती परीक्षाओं की पवित्रता से खिलवाड़ करने वाले इस बड़े रैकेट की जड़ें कितनी गहरी हैं, यह आने वाले दिनों में जांच के आगे बढ़ने पर ही पूरी तरह साफ हो पाएगा। फिलहाल, केंद्रीय एजेंसी की इस सख्त कार्रवाई से उत्तराखंड के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में खलबली मची हुई है, और युवाओं की उम्मीदों के साथ धोखाधड़ी करने वालों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।