प्रकृति जब अपना विकराल रूप दिखाती है, तो इंसान की व्यवस्थाओं की असली परीक्षा होती है। उत्तर प्रदेश इन दिनों कुछ इसी तरह की प्राकृतिक चुनौती का सामना कर रहा है। राज्य के करीब 25 जिले इस समय बाढ़ की चपेट में हैं, जिससे जनजीवन आंशिक रूप से प्रभावित हुआ है। हालांकि, इस आपदा से निपटने के लिए प्रशासनिक मशीनरी पूरी ताकत से मैदान में उतर चुकी है। मुख्यमंत्री स्तर से मिल रहे लगातार दिशा-निर्देशों के बाद राहत और बचाव कार्यों ने रफ्तार पकड़ ली है, ताकि हर उस व्यक्ति तक मदद पहुंच सके जो पानी के इस घेरे में फंसा हुआ है।
अबतक 21 हजार से अधिक लोग सुरक्षित ठिकानों पर शिफ्ट
उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय से मिले ताजा आंकड़ों के अनुसार, राज्य के विभिन्न बाढ़ प्रभावित इलाकों से अब तक कुल 21,350 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। अकेले एक दिन के भीतर लगभग 8 हजार नागरिकों को जलमग्न क्षेत्रों से निकालकर सुरक्षित शिविरों तक पहुंचाया गया। प्रशासन की यह कोशिश है कि किसी भी नागरिक को खतरे के बीच न रहना पड़े।
इस बड़े बचाव अभियान को अंजाम देने के लिए प्रशासनिक अमले ने जल परिवहन का बड़े पैमाने पर सहारा लिया है। नदी के तेज बहाव और जलभराव वाले रास्तों पर आवाजाही के लिए अब तक कुल 2,385 नावों और हाई-स्पीड मोटरबोट्स को लगाया गया है। इन बोट्स की मदद से राहत दल लगातार गांवों के भीतर तक पहुंच रहे हैं और फंसे हुए लोगों को बाहर निकाल रहे हैं।
राहत शिविरों में मिल रही है आश्रय और सुविधाएं
घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर आने वाले लोगों के लिए प्रशासन ने विशेष राहत शिविरों का जाल बिछाया है। वर्तमान में इन अस्थायी आश्रय स्थलों पर 2,972 लोग रह रहे हैं। इन शिविरों में उनके ठहरने, खाने-पीने और बुनियादी सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जा रहा है, ताकि आपदा के इस समय में उन्हें किसी प्रकार की मानसिक या शारीरिक असुविधा का सामना न करना पड़े।
भूखे पेट न रहे कोई: 9.31 लाख से अधिक लंच पैकेट वितरित
आपदा के इस दौर में भोजन की व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती होती है। सरकार ने इस मोर्चे पर युद्ध स्तर पर काम किया है। केवल एक दिन के भीतर ही 72,620 लंच पैकेट और करीब 9,937 विशेष बाढ़ राहत किट जरूरतमंदों के बीच बांटे गए। यदि शुरुआत से अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें, तो यह संख्या काफी बड़ी है।
राज्यभर में अब तक कुल 9.31 लाख से अधिक लंच पैकेट और 1.49 लाख से अधिक खाद्यान्न पैकेटों का वितरण किया जा चुका है। इन खाद्यान्न पैकेटों में रोजमर्रा की जरूरत का सामान शामिल है, जिससे प्रभावित परिवार खुद भी भोजन तैयार कर सकें। प्रशासनिक टीमें खुद घर-घर जाकर या नावों के जरिए इन पैकेटों को उन तक पहुंचा रही हैं, जिनके रास्ते पूरी तरह कट चुके हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं का पहरा: 1,165 मेडिकल टीमें तैनात
बाढ़ के बाद अमूमन जलजनित बीमारियां (Water-borne diseases) फैलने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। गंदे पानी और उमस के माहौल में डायरिया, उल्टी-दस्त और चर्म रोग जैसी समस्याएं पैर पसारने लगती हैं। इस खतरे को भांपते हुए स्वास्थ्य विभाग को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा गया है।
प्रभावित क्षेत्रों में कुल 1,165 मेडिकल टीमों का गठन किया गया है, जो लगातार कैंप लगाकर लोगों के स्वास्थ्य की जांच कर रही हैं। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए अब तक 7.22 लाख से अधिक क्लोरीन टैबलेट्स का वितरण किया जा चुका है, ताकि लोग शुद्ध पानी का ही इस्तेमाल करें। इसके अलावा, डिहाइड्रेशन से निपटने के लिए 2.97 लाख से अधिक ओआरएस (ORS) पैकेट भी बांटे गए हैं। राहत की बात यह है कि इतनी बड़ी आपदा के बावजूद अब तक किसी भी प्रकार की जनहानि या पशुहानि की सूचना नहीं मिली है, जो प्रशासनिक सतर्कता का प्रमाण है।
इंसानों के साथ-साथ मवेशियों का भी रखा जा रहा है पूरा ख्याल
पारिवारिक नुकसान के साथ-साथ पशुपालकों के सामने अपने मवेशियों के चारे का संकट खड़ा हो जाता है। सरकार ने इस पहलू को भी नजरअंदाज नहीं किया है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में इंसानी राहत के साथ-साथ पशुधन की सुरक्षा और उनके चारे का पूरा प्रबंध किया गया है।
मवेशियों की भूख मिटाने के लिए अब तक लगभग 6,956 क्विंटल भूसा प्रभावित जिलों में वितरित किया जा चुका है। पशु चिकित्सकों की विशेष टीमें भी इन क्षेत्रों में तैनात हैं जो पशुओं में होने वाली संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए टीकाकरण और उपचार का कार्य कर रही हैं।
इन 25 जिलों में सबसे ज्यादा असर
उत्तर प्रदेश के जिन जिलों में बाढ़ का प्रभाव सबसे अधिक देखा जा रहा है और जहां प्रशासनिक राहत तंत्र पूरी तरह सक्रिय है, उनकी सूची लंबी है। इन जिलों में प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- अयोध्या
- आजमगढ़
- बहराइच
- बदायूं
- बलिया
- बाराबंकी
- बस्ती
- फर्रुखाबाद
- गाजीपुर
- गोंडा
- गोरखपुर
- हरदोई
- कासगंज
- कौशाम्बी
- कानपुर नगर
- लखीमपुर खीरी
- मुरादाबाद
- प्रयागराज
- रायबरेली
- रामपुर
- संत कबीर नगर
- सीतापुर
- शाहजहांपुर
- उन्नाव
- वाराणसी
प्रशासन और स्थानीय आपदा प्रबंधन बल स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के साथ ही राहत और बचाव के तौर-तरीकों में भी बदलाव किया जा रहा है। मौसम विभाग के पूर्वानुमानों को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए चौबीसों घंटे तैयार रहें, ताकि आम जनजीवन जल्द से जल्द सामान्य हो सके।