कर्नाटक की सियासत में इस समय भूचाल आया हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राज्य की कांग्रेस सरकार में लोक निर्माण विभाग (PWD) के मंत्री सतीश जारकीहोली और उनके करीबियों से जुड़े कुल 21 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है। इस कार्रवाई ने केवल कर्नाटक ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। जांच के दौरान जो खुलासे सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं, क्योंकि जांच के तार अब भारत की सीमाओं को लांघकर अफ्रीकी देशों तक जा पहुंचे हैं।
बेंगलुरु से लेकर कोलकाता तक एक साथ चली कार्रवाई
ईडी के बेंगलुरु जोनल ऑफिस द्वारा यह बड़ा तलाशी अभियान सुनियोजित तरीके से चलाया गया। इस रेड के दायरे में बेंगलुरु, बेलगावी, गोकक और कोलकाता जैसे प्रमुख शहर शामिल रहे। केंद्रीय जांच एजेंसी ने यह कार्रवाई फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के प्रावधानों के तहत की है, जिसमें अघोषित विदेशी निवेश और सीमा पार के संदिग्ध कारोबारी लेन-देन को मुख्य आधार बनाया गया है।
इस हाई-प्रोफाइल छापेमारी की आंच सिर्फ मंत्री सतीश जारकीहोली तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि उनके परिवार के अन्य सदस्यों तक भी पहुंची। जांच के घेरे में उनकी बेटी और चिक्कोडी से सांसद प्रियंका जारकीहोली, उनके बेटे राहुल जारकीहोली के साथ-साथ कई अन्य करीबी रिश्तेदार और व्यावसायिक सहयोगी भी आए हैं। एजेंसी इन सभी के ठिकानों पर लगातार दस्तावेजों की छंटनी कर रही है।
अफ्रीका तक फैला कारोबार: कांगो और जाम्बिया कनेक्शन
इस पूरी जांच का सबसे दिलचस्प और रहस्यमयी पहलू वह दस्तावेज हैं, जो विदेशी माइनिंग (खनन) कंपनियों से जुड़े हुए हैं। ईडी के सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, जारकीहोली परिवार के सदस्यों की कई विदेशी कंपनियों में बेनामी या प्रत्यक्ष हिस्सेदारी के पुख्ता सुराग हाथ लगे हैं।
इन विदेशी कंपनियों में मुख्य रूप से अफ्रीकी देश कांगो की 'एल्डोराडो माइनिंग रिसोर्सेज' और जाम्बिया की 'नवा ऑरम माइनिंग लिमिटेड' जैसी कंपनियां शामिल हैं। इसके अलावा, जांच एजेंसी का यह भी दावा है कि मंत्री सतीश जारकीहोली ने कांगो की एक अन्य सोने के खनन से जुड़ी कंपनी 'मैग्नीट्यूड स्टार एसएआरएल' में लगभग 40 प्रतिशत तक की बड़ी हिस्सेदारी हासिल कर रखी है। अफ्रीका में फैली इन खनन संपत्तियों और विदेशी शेल कंपनियों से जुड़े तमाम दस्तावेज अब ईडी के कब्जे में हैं, जिनकी फोरेंसिक जांच की जा रही है।
करोड़ों की नकदी और विदेशी मुद्रा बरामद
छापेमारी के दौरान जांच अधिकारियों को भारी मात्रा में भौतिक साक्ष्य और नकदी मिली है। शुरुआती ब्यौरों के अनुसार, विभिन्न ठिकानों से कुल 3.3 करोड़ रुपये की बेहिसाब भारतीय नकदी बरामद की गई है। इसके साथ ही लगभग 15 लाख रुपये मूल्य की विदेशी मुद्रा भी जब्त की गई है, जिसमें प्रमुख रूप से अमेरिकी डॉलर और यूरो शामिल हैं।
इतनी बड़ी मात्रा में कैश और विदेशी करंसी मिलने के बाद से वित्तीय अनियमितताओं के शक को और अधिक बल मिला है। एजेंसी अब यह कड़ी जोड़ने की कोशिश कर रही है कि क्या इस नकदी का सीधा संबंध हवाला चैनलों के जरिए विदेश भेजने या विदेशी संपत्तियों को खरीदने से है।
पीडब्ल्यूडी टेंडर और रिश्वत का नया एंगल
इस पूरे प्रकरण में एक प्राइवेट कंपनी की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, जिसका नाम 'भारत वाणिज्य ईस्टर्न प्राइवेट लिमिटेड' (BVEPL) बताया जा रहा है। जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोप है कि इस कंपनी ने पीडब्ल्यूडी विभाग से मनचाहे टेंडर हासिल करने के एवज में भारी-भरकम रिश्वत पहुंचाई थी।
एजेंसी अब इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही है कि क्या सरकारी ठेकों के जरिए कमाए गए काले धन को विदेशों में खपाया जा रहा था। इस कड़ी को सुलझाने के लिए जब्त किए गए डिजिटल डिवाइस, लैपटॉप, मोबाइल फोन, बैंक खातों के स्टेटमेंट और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की तकनीकी जांच की जा रही है।
राजनीतिक गलियारों में मचा हड़कंप
चूंकि यह मामला सीधे तौर पर सत्ताधारी पार्टी के एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री से जुड़ा है, इसलिए राज्य की राजनीति पूरी तरह से गरमा गई है। विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार पर आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं, वहीं दूसरी ओर मंत्री और उनके समर्थकों की तरफ से इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा बताया जा रहा है। हालांकि, जांच एजेंसी के पास मौजूद अफ्रीकी कंपनियों के दस्तावेज और डिजिटल सबूत इस मामले को आने वाले दिनों में और अधिक पेचीदा बना सकते हैं।
आगे क्या हो सकता है?
मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह साफ है कि आने वाले दिनों में कुछ और बड़े खुलासे हो सकते हैं। ईडी जल्द ही इस मामले में संलिप्त लोगों को समन भेजकर पूछताछ के लिए बुला सकती है। विदेशी मुद्रा अधिनियम (FEMA) और प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत यह जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे अंतरराष्ट्रीय ट्रांजैक्शन की परतें भी खुलती जाएंगी। देश की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि केंद्रीय जांच एजेंसी इस अंतरराष्ट्रीय माइनिंग और टेंडर रिश्वत नेटवर्क की गुत्थी को किस प्रकार पूरी तरह से बेनकाब करती है।