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Stock Market Outlook: अगले हफ्ते बाजार की चाल तय करेंगे ये 3 बड़े ट्रिगर्स!

Stock Market Outlook: अगले हफ्ते बाजार की चाल तय करेंगे ये 3 बड़े ट्रिगर्स!

भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला हफ्ता निवेशकों के मन में गहरी चिंता छोड़ गया है। वैश्विक दबाव और चौतरफा बिकवाली के चलते बाजार के प्रमुख सूचकांक अपने महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तरों से काफी नीचे फिसल चुके हैं। ऐसे में, हर निवेशक के जेहन में बस एक ही सवाल घूम रहा है कि क्या आने वाला हफ्ता बाजार को उबार पाएगा या गिरावट का यह दौर अभी और लंबा खिंचेगा? विशेषज्ञों की मानें तो अगले सप्ताह कुछ बहुत ही अहम घटनाएं और आंकड़े सामने आने वाले हैं, जो बाजार की अगली और बड़ी चाल तय करेंगे।

पिछले हफ्ते बाजार में क्यों आई भारी गिरावट?

बीता कारोबारी हफ्ता छुट्टियों के चलते छोटा जरूर था, लेकिन उतार-चढ़ाव के मामले में यह बहुत भारी साबित हुआ। हफ्ते की शुरुआत से ही बिकवाली का जो दौर शुरू हुआ, वह थमने का नाम नहीं ले रहा था। सोमवार को ही सेंसेक्स में 1.52 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद के सत्रों में भी कमजोरी का यही सिलसिला जारी रहा। गुरुवार को आई एक और गिरावट ने निवेशकों की कमर तोड़ दी।

साप्ताहिक आंकड़ों पर नजर डालें तो सेंसेक्स 1,670.84 अंकों का गोता लगाकर 71,909.70 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं दूसरी ओर, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 3 प्रतिशत से अधिक लुढ़ककर 22,421.95 के स्तर पर आ गया। बाजार के जानकारों का कहना है कि यह करेक्शन का एक दौर है, जो लंबे समय से चढ़ रहे बाजार में एक जरूरी लेकिन दर्दनाक प्रक्रिया है।

तकनीकी रूप से कहां टिकता है निफ्टी?

तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी का हालिया प्रदर्शन चिंताजनक रहा है क्योंकि यह लगातार आठवें हफ्ते गिरावट के साथ बंद हुआ है। निफ्टी का साप्ताहिक आरएसआई (रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स) लुढ़ककर लगभग 31.06 के स्तर पर आ गया है। यह 50 के तटस्थ स्तर से काफी नीचे है और बाजार में कमज़ोर मोमेंटम को साफ तौर पर दर्शाता है।

  • रेजिस्टेंस (अवरोध) स्तर: आने वाले दिनों में निफ्टी के लिए 22,800 और 23,000 का स्तर कड़ा प्रतिरोध साबित होगा। जब तक बाजार इसके ऊपर टिकने में कामयाब नहीं होता, तब तक बिकवाली का दबाव बना रह सकता है।
  • सपोर्ट (समर्थन) स्तर: नीचे की तरफ 22,350 और 22,180 के अहम स्तरों पर निवेशकों की नजरें टिकी रहेंगी। यदि ये स्तर टूटते हैं, तो गिरावट और गहरी हो सकती है।
  • ओवरसोल्ड जोन: आरएसआई के ओवरसोल्ड जोन के करीब पहुंचने के कारण इस बात की पूरी संभावना है कि निचले स्तरों पर कुछ शॉर्ट-कवरिंग या तकनीकी रिकवरी देखने को मिल सके।

अगले हफ्ते के 3 सबसे बड़े ट्रिगर्स

आने वाले कारोबारी सप्ताह में बाजार की दिशा तय करने वाले तीन सबसे बड़े उत्प्रेरक (Triggers) सामने आने वाले हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि वे कौन से कारक हैं जो निवेशकों की किस्मत बदल सकते हैं:

1. आरबीआई की मौद्रिक नीति समीक्षा (RBI Monetary Policy)

घरेलू मोर्चे पर सबसे बड़ा इवेंट भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा है। केंद्रीय बैंक ब्याज दरों (Repo Rate) पर क्या फैसला लेता है, इस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हैं। इसके अलावा, महंगाई (Inflation) को लेकर आरबीआई का रुख और देश की जीडीपी ग्रोथ को लेकर उसका अनुमान क्या रहता है, यह देश के वित्तीय बाजारों के लिए सबसे अहम संकेत होगा।

2. कंपनियों के दूसरी तिमाही (Q2) के नतीजे

अब जबकि अक्टूबर का महीना चल रहा है, कॉरपोरेट जगत के दूसरी तिमाही (Q2 FY27) के वित्तीय नतीजे आने शुरू होने वाले हैं। निवेशकों और फंड हाउसों की नजर इस बात पर होगी कि दिग्गज कंपनियों ने इस तिमाही में कैसा प्रदर्शन किया है। जिन कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर आएंगे, वहां शेयरों में जबरदस्त एक्शन देखने को मिल सकता है, जबकि खराब नतीजों वाले शेयर दबाव में रह सकते हैं।

3. पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की चाल

वैश्विक स्तर पर मिडिल ईस्ट यानी पश्चिम एशिया में चल रहा भू-राजनीतिक तनाव अभी भी निवेशकों की नींद उड़ाए हुए है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस क्षेत्र से तनाव कम होने या शांति बहाली के कोई भी सकारात्मक संकेत मिलते हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में एक तेज और राहत भरी तेजी (Relief Rally) देखने को मिल सकती है। इसके विपरीत, तनाव बढ़ने पर बाजार फिर गोता लगा सकता है।

घरेलू अर्थव्यवस्था के मजबूत आंकड़े दे रहे हैं ढांढस

एक तरफ जहां वैश्विक अनिश्चितताएं और विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली बाजार को डरा रही है, वहीं दूसरी तरफ देश के भीतर से आ रहे आर्थिक आंकड़े बेहद उत्साहजनक हैं। भारत की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि (IIP) के ताजा आंकड़े मजबूत अर्थव्यवस्था की गवाही दे रहे हैं।

अगस्त महीने में देश का IIP बढ़कर 8 प्रतिशत पर पहुंच गया, जो कि जुलाई के संशोधित 7.4 प्रतिशत के मुकाबले काफी बेहतर है। खासकर विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्र में 9 प्रतिशत और बिजली एवं गैस आपूर्ति क्षेत्र में 12.3 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। यह इस बात का सबूत है कि देश की बुनियादी आर्थिक सेहत अभी भी बेहद मजबूत है और लंबी अवधि के निवेशकों के लिए घबराने की कोई जरूरत नहीं है।

कच्चे तेल और वैश्विक बाजारों का रुख

ऊर्जा बाजार से भी निवेशकों के लिए कुछ राहत भरी खबरें आ रही हैं। ब्रेंट क्रूड अपने हालिया उच्च स्तरों से थोड़ा नीचे आया है। इसका मुख्य कारण यह है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से कच्चे तेल की आपूर्ति धीरे-धीरे युद्ध-पूर्व के स्तरों के करीब लौटने लगी है। इससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में थोड़ी स्थिरता आई है, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देश को बड़ी राहत मिली है।

इसके अलावा, अमेरिकी अर्थव्यवस्था से आने वाले आंकड़े जैसे नॉन-फार्म पेरोल्स और आईएसएम मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई भी वैश्विक बाजारों की दिशा तय करेंगे। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड्स का बढ़ना और वहां की महंगाई के आंकड़े सीधे तौर पर भारतीय बाजारों को प्रभावित करते हैं, इसलिए विदेशी बाजारों की हर हलचल पर पैनी नजर रखनी होगी.

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

मौजूदा बाजार की स्थिति को देखते हुए छोटे निवेशकों और ट्रेडर्स को अत्यधिक सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। बाजार में वोलैटिलिटी ( उतार-चढ़ाव) काफी ज्यादा रह सकती है, इसलिए बिना स्टॉप-लॉस के ट्रेड करने से बचें। लॉन्ग-हीरो और क्वालिटी शेयरों में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए यह समय घबराने का नहीं, बल्कि चुनिंदा शेयरों को एसआईपी (SIP) के जरिए धीरे-धीरे जोड़ने का है। आरबीआई के फैसलों और क्यू2 के शुरुआती नतीजों आने के बाद ही बाजार की वास्तविक दिशा साफ हो पाएगी।

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काव्या त्रिपाठी

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Senior Editor

काव्या त्रिपाठी बिजनेस और टेक्नोलॉजी की जटिल दुनिया को सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती हैं। वे आर्थिक बदलाव, स्टार्टअप इकोसिस्...

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