जुर्म की दुनिया के शातिर चेहरे अक्सर ऐसी चालाकी दिखाते हैं कि कानून के पहरेदारों को भी उन्हें दबोचने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ता है। ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला इन दिनों देश के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले शहरी इलाकों यानी ट्राईसिटी (पंचकूला, चंडीगढ़ और मोहाली) से सामने आया है। यहां पुलिस ने एक ऐसे खतरनाक जीजा-साले के गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने पिछले कुछ समय से पूरे इलाके में अपनी वारदातों से आतंक मचा रखा था। हैरानी की बात यह है कि ये शातिर अपराधी दिल्ली से बाइक चुराते थे, उस पर फर्जी नंबर प्लेट लगाते थे और फिर ट्राईसिटी में आकर राह चलते लोगों को अपना शिकार बनाते थे।
1800 सीसीटीवी कैमरों को खंगालने के बाद हाथ लगी सफलता
पंचकूला पुलिस की क्राइम ब्रांच-2 ने इस शातिर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दोनों आरोपियों को धर दबोचा है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों तक पहुंचना इतना आसान नहीं था। अपराधियों के सुराग तलाशने के लिए पुलिस टीमों ने तकनीकी सर्विलांस और मैनुअल इंटेलिजेंस का सहारा लेते हुए करीब 1800 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। दिन-रात की कड़ी मेहनत के बाद आखिरकार पुलिस उन तक पहुंचने में कामयाब रही। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के रहने वाले 46 वर्षीय विक्की उर्फ देवेंद्र और उसके साले उस्मान अली के रूप में हुई है, जो उत्तर-पूर्वी दिल्ली का रहने वाला है।
जांच में यह भी चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि मुख्य आरोपी विक्की पिछले करीब 20 वर्षों से ट्राईसिटी क्षेत्र में अलग-अलग तरीकों से आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय रहा है। वह इस इलाके के चप्पे-चप्पे से वाकिफ था, जिसका फायदा उठाकर वह पुलिस की आंखों में धूल झोंकता आ रहा था। पुलिस ने दोनों को अदालत में पेश कर पांच दिन के पुलिस रिमांड पर लिया है, ताकि उनसे पूछताछ कर लूटे गए सामान और अन्य वारदातों के बारे में पूरी जानकारी जुटाई जा सके।
अनोखा तरीका: चोरी की बाइक और काली टेप से फर्जी नंबर प्लेट
अपराधियों के तौर-तरीके इतने शातिर थे कि आम नागरिक तो दूर, पुलिस के लिए भी उन्हें ट्रैक करना चुनौतीपूर्ण हो गया था। एसीपी क्राइम अमन कुमार ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि ये आरोपी दिन के समय एक स्पोर्ट्स बाइक पर सवार होकर इलाके में घूमते थे और सुनसान या कम भीड़भाड़ वाले रास्तों की रेकी करते थे। अपनी पहचान छिपाने के लिए वे बाइक पर फर्जी नंबर प्लेट लगाकर चलते थे। इस फर्जी नंबर प्लेट को तैयार करने के लिए वे बेहद शातिर तरीके से काली टेप का इस्तेमाल करते थे ताकि कोई दूर से असली और नकली नंबर का फर्क न समझ सके।
गिरोह के काम करने का तरीका भी बंटा हुआ था। वाहन को विक्की चलाता था, जबकि पीछे उसका साला उस्मान अली बैठता था और मौके का फायदा उठाकर राहगीरों के गले से सोने की चेन या कीमती सामान झपट लेता था। पुलिस जांच में एक और दिलचस्प बात यह भी सामने आई है कि उस्मान अली को कम दिखाई देता है, इसके बावजूद वह इस तरह की वारदातों में पूरी चालाकी से अपने जीजा का साथ देता था। इसी साल 25 जुलाई को सेक्टर-16 की एक महिला की सोने की चेन झपटने की घटना को भी इन्होंने ही अंजाम दिया था।
डेराबस्सी में बना रखा था ठिकाना
पुलिस पूछताछ में यह बात भी साफ हुई है कि ये शातिर अपराधी सीधे दिल्ली से वारदात करने नहीं आते थे। वे अपनी योजना को बहुत ही सफाई से अंजाम देते थे। विक्की दिल्ली से चोरी की बाइक लेकर सीधे ट्राईसिटी पहुंचता था। यहाँ उन्होंने डेराबस्सी में एक फ्लैट किराए पर ले रखा था। डेराबस्सी का यह फ्लैट उनका मुख्य बेस कैंप था। वे यहीं रुकते थे, यहीं से बाइक लेकर अलग-अलग इलाकों में रेकी करने निकलते थे और वारदात को अंजाम देने के बाद वापस इसी फ्लैट में लौट आते थे। कुछ समय यहाँ बिताने के बाद वे बाइक समेत वापस दिल्ली निकल जाते थे। इस तरह वे स्थानीय पुलिस की रडार से बचने की पूरी कोशिश करते थे।
'ऑपरेशन हंटडाउन' के तहत पुलिस की बड़ी कार्रवाई
पंचकूला में बढ़ रही स्नैचिंग और वाहन चोरी की वारदातों पर लगाम कसने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह सख्त नजर आ रहा है। पुलिस कमिश्नर पंकज नैन के दिशा-निर्देशों के तहत शहर में एक विशेष अभियान 'ऑपरेशन हंटडाउन' चलाया जा रहा है। इस अभियान के सकारात्मक परिणाम भी अब सामने आने लगे हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो सितंबर महीने के दौरान क्राइम यूनिट-1, 2 और 3 की संयुक्त टीमों ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए 19 अलग-अलग मामलों को सुलझाया है और कुल 36 आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है।
इस पूरे अभियान के संबंध में जानकारी देते हुए डीसीपी क्राइम एंड ट्रैफिक अमरिंदर सिंह ने बताया कि पकड़े गए इन तमाम आरोपियों के पास से भारी मात्रा में अवैध सामान बरामद किया गया है। पुलिस ने इनके कब्जे से नकदी, 6 मोबाइल फोन और विभिन्न प्रकार के 78 वाहन बरामद किए हैं। बरामद किए गए इन वाहनों में बाइक के अलावा एक्टिवा, कार और टिप्पर तक शामिल हैं। पुलिस के इस विशेष अभियान से न केवल जीजा-साले के इस बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, बल्कि अन्य वाहन चोर गिरोहों की कमर भी टूटी है।
सुरक्षा के लिहाज से नागरिकों के लिए जरूरी सबक
इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अपराधी कितनी भी शातिर योजना क्यों न बनाएं, तकनीकी और मुस्तैद पुलिसिंग के आगे वे बच नहीं सकते। हालांकि, आम नागरिकों के लिए भी यह एक बड़ा संदेश है कि सुनसान रास्तों पर चलते समय अपनी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस को दें ताकि इस तरह के अपराधियों को जड़ से खत्म किया जा सके।