गोंडा के तरबगंज तहसील क्षेत्र में भूमि फर्जीवाड़े का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां छह वर्ष पहले दम तोड़ चुकी एक महिला को राजस्व अभिलेखों और दस्तावेजों में जिंदा दिखाकर करीब एक एकड़ जमीन का अवैध रूप से बैनामा करा लिया गया। इस गंभीर धोखाधड़ी के बाद पीड़ित परिवार न्याय के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहा है।
कोतवाली देहात अंतर्गत रामनगर तरहर के रहने वाले अनंतराम ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई है। उनका कहना है कि उनकी दिवंगत मां प्रेमलता के नाम तरबगंज के विशुनपुर गांव में तीन अलग-अलग गाटों में कुल मिलाकर लगभग एक एकड़ (करीब एक एकड़) भूमि दर्ज थी। यह पैतृक संपत्ति उनकी मां को उनके नाना रिबई से वरासत के जरिए प्राप्त हुई थी।
छह साल पहले हो चुकी है महिला की मौत
शिकायतकर्ता अनंतराम के अनुसार, उनकी मां प्रेमलता का निधन 15 अप्रैल 2019 को ही हो चुका है। उनके पास मां का आधिकारिक मृत्यु प्रमाण पत्र भी उपलब्ध है। मां के निधन के बाद से ही परिवार लगातार तहसील कार्यालय के चक्कर काट रहा था ताकि जमीन उनके और अन्य वारिसों के नाम दर्ज हो सके, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के चलते समय पर वरासत दर्ज नहीं हो सकी। इसी का फायदा उठाकर शातिर भू-माफिया और जालसाजों ने जुलाई 2026 में एक बड़ा खेल कर डाला।
दूसरी महिला को खड़ा कर कराया बैनामा
आरोप है कि जुलाई 2026 में जालसाजों ने सोची-समझी साजिश के तहत किसी अन्य महिला को प्रेमलता के रूप में पेश किया। फर्जी पहचान और कूटरचित दस्तावेजों के सहारे इस मृत महिला की बेशकीमती जमीन का बैनामा अन्य लोगों के नाम करा लिया गया। इतना ही नहीं, जालसाजी का दायरा यहीं नहीं रुका, बल्कि इसके बाद इस अवैध हस्तांतरण को आधार बनाते हुए राजस्व अभिलेखों में भी नए क्रेता का नाम दर्ज करा लिया गया।
शिकायत में यह भी गंभीर आरोप लगाया गया है कि इस पूरी प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए जाति संबंधी दस्तावेजों में भी हेरफेर किया गया है, जिसके जरिए आरक्षित वर्ग की भूमि का अवैध बैनामा कराया गया। यह विवादित जमीन गोंडा-सिंगहाचंदा चौराहा मार्ग पर स्थित है, जिसके कारण इसकी बाजार में अच्छी खासी कीमत आंकी जा रही है।
पुलिस और प्रशासन ने शुरू की जांच
मामले के तूल पकड़ने के बाद स्थानीय पुलिस हरकत में आई है। कोतवाली प्रभारी श्रीधर पाठक ने मीडिया को जानकारी दी है कि इस पूरे प्रकरण की जांच उप निरीक्षक जितेंद्र पांडेय को सौंप दी गई है। वहीं, क्षेत्राधिकारी (सीओ) डॉ. उमेश्वर प्रभात सिंह ने स्पष्ट किया है कि मामले की गहराई से छानबीन की जा रही है और जांच में आरोप सही पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।