उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और कड़ाके की ठंड के बीच एक गौशाला में 20 बेजुबान गोवंशों की मौत हो गई है। प्रारंभिक जांच और समिति के बयानों के अनुसार, इन मवेशियों की मौत का मुख्य कारण 'हाइपोथर्मिया' (शरीर का तापमान खतरनाक रूप से गिर जाना) बताया जा रहा है। इस घटना के बाद से स्थानीय प्रशासन और पशुपालन विभाग में हड़कंप मच गया है।
लगातार तीन दिन की बारिश बनी काल
मिली जानकारी के अनुसार, बदायूं जनपद में पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश हो रही है, जिससे मौसम में अचानक भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस बेरहम मौसम की मार सबसे ज्यादा विकास खंड म्याऊँ के अंतर्गत आने वाली अभिगांव गौशाला के बेजुबान जीवों पर पड़ी। लगातार भीगने और ठंड व हवा के थपेड़ों को सहन न कर पाने के कारण इन मवेशियों की सेहत तेजी से बिगड़ने लगी, जो अंततः उनकी जानलेवा साबित हुई।
मौसम के इस अचानक बदले मिजाज और भारी बारिश ने प्रबंधकों को भी संभलने का मौका नहीं दिया। हालांकि, गौशाला का संचालन करने वाली संस्था की ओर से तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किए गए थे, लेकिन प्रकृति के इस कहर के आगे कई प्रयास विफल साबित हुए।
शारदा जन कल्याण समिति द्वारा संचालित है गौशाला
यह अभिगांव गौशाला 'शारदा जन कल्याण समिति' द्वारा संचालित की जाती है। समिति की ओर से इस पूरी दुर्घटना पर आधिकारिक रूप से गहरा शोक व्यक्त किया गया है। समिति के पदाधिकारियों ने इस घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए स्पष्ट किया है कि मवेशियों को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए गए थे, लेकिन अत्यधिक ठंड और बारिश के कारण स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।
समिति द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस गौशाला में कुल 428 गोवंश आश्रय लिए हुए थे। आपदा की इस घड़ी में अचानक तापमान गिरने से कई मवेशी गंभीर रूप से बीमार पड़ गए।
मौतों का विस्तृत विवरण
समिति के आधिकारिक बयानों के अनुसार, इस पूरी आपदा के दौरान गोवंशों के नुकसान का ब्योरा इस प्रकार है:
- गौशाला में कुल पंजीकृत गोवंशों की संख्या: 428
- मौसम की चपेट में आकर सीधे दम तोड़ने वाले गोवंश: 6
- गंभीर हालत के बाद इलाज के दौरान दम तोड़ने वाले गोवंश: 14
- कुल हुई मौतें: 20
इस प्रकार कुल 20 गोवंशों की इस प्राकृतिक आपदा में जान चली गई, जिससे पशु प्रेमियों और स्थानीय लोगों में भारी शोक की लहर दौड़ गई है।
शेष गोवंशों को सुरक्षित स्थानों पर किया गया शिफ्ट
एक तरफ जहां 20 मवेशियों की मौत से शोक का माहौल है, वहीं समिति और प्रशासनिक कर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए बाकी बचे हुए गोवंशों की जान बचाने के लिए तुरंत बड़े कदम उठाए। घटना की गंभीरता को देखते हुए गौशाला के शेड और अन्य कमरों में पानी भरने या ठंडक बढ़ने से रोकने के लिए तुरंत व्यवस्था की गई।
समिति के प्रतिनिधियों ने बताया कि गौशाला में मौजूद शेष सभी स्वस्थ और बीमार गोवंशों को तुरंत प्रभाव से सुरक्षित स्थानों और सूखे कमरों में शिफ्ट कर दिया गया है। पशु चिकित्सकों की टीमों को भी मौके पर तैनात कर दिया गया है ताकि किसी अन्य पशु की सेहत बिगड़ने पर उसे तुरंत मेडिकल सहायता दी जा सके।
हाइपोथर्मिया: मवेशियों के लिए एक छिपा हुआ खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बारिश और सर्द हवाओं के मेल से उत्पन्न होने वाली स्थिति पशुओं के लिए बेहद खतरनाक होती है। जब लगातार कई दिनों तक बारिश होती है और तापमान गिरता है, तो खुले या अर्ध-ढंके स्थानों पर रहने वाले पशुओं का शरीर अपने तापमान को नियंत्रित नहीं कर पाता। इसे हाइपोथर्मिया कहा जाता है। इसमें पशुओं का मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है, वे सुस्त हो जाते हैं और समय पर इलाज न मिलने पर उनकी मौत तक हो जाती है।
बदायूं की इस घटना ने एक बार फिर से देश भर की गौशालाओं में बुनियादी ढांचे, खासकर बरसात और ठंड से बचाव के पुख्ता इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि स्थानीय प्रशासन और समिति इस आपदा को प्राकृतिक मान रही है, लेकिन भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए शेड के रख-रखाव और पशुओं की हेल्थ मॉनिटरिंग पर और अधिक गहराई से काम करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
फिलहाल, स्थिति नियंत्रण में है और प्रशासन लगातार गौशाला पर नजर बनाए हुए है ताकि शेष बचे मवेशियों को सुरक्षित रखा जा सके।