पत्रकारिता के मोर्चे पर उम्र के आखिरी पड़ाव पर पहुंच चुके देश भर के पत्रकारों के आर्थिक संबल को लेकर एक बड़ी और अहम सुगबुगाहट तेज हो गई है। हाल ही में उत्तर प्रदेश के धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र अयोध्या में आयोजित नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (एनयूजे) की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्य परिषद की बैठक में पत्रकारों के कल्याण से जुड़ा एक बेहद महत्वपूर्ण प्रस्ताव जोर-शोर से उठाया गया। इस उच्चस्तरीय मंथन में यह प्रमुख मांग रखी गई कि साठ वर्ष की आयु पूरी कर चुके अनुभवी पत्रकारों को प्रति माह बीस हजार रुपये की पेंशन दी जानी चाहिए, ताकि उनका बुढ़ापा आर्थिक तंगी से सुरक्षित रह सके।
अयोध्या के प्रसिद्ध हनुमान बाग सभागार में आयोजित इस दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम के दौरान देश भर से जुटे मीडिया जगत के नुमाइंदों ने अपने सामने आ रही गंभीर चुनौतियों, सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा के मुद्दों पर खुलकर विचार-विमर्श किया। मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी ने आश्वस्त किया कि वरिष्ठ पत्रकारों के हितों की रक्षा और उनकी इस वित्तीय मांग को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री से उचित माध्यम से वार्ता की जाएगी, ताकि इसे धरातल पर उतारा जा सके।
बदलते दौर में प्रिंट मीडिया और सामाजिक जिम्मेदारी
आज के इस आधुनिक और तकनीकी युग में मीडिया का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। इस बदलाव पर चिंता और चिंतन व्यक्त करते हुए वक्ताओं ने कहा कि डिजिटल और सोशल मीडिया के प्रभाव के बीच पारंपरिक प्रिंट मीडिया की जिम्मेदारी समाज के प्रति कई गुना बढ़ गई है। आज जहां एक तरफ राजनैतिक हस्तियों पर से आम जनता का भरोसा कुछ हद तक डगमगाया है, वहीं दूसरी तरफ मीडिया और पत्रकारों के प्रति समाज की अटूट आस्था आज भी कायम है।
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि सोशल मीडिया के इस दौर में आए दिन भ्रम की स्थिति पैदा होती है और अफवाहें तेजी से फैलती हैं। ऐसे में तथ्यों पर आधारित, परिपक्व और जवाबदेह पत्रकारिता ही लोकतंत्र की असली रीढ़ को मजबूत कर सकती है। प्रिंट मीडिया ने हमेशा से ही समाज को सही दिशा दिखाने का काम किया है और आगे भी लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को बचाए रखने में इसकी भूमिका सर्वोपरि रहेगी।
राम मंदिर आंदोलन और पत्रकारों की ऐतिहासिक भूमिका
चर्चा के दौरान अयोध्या के ऐतिहासिक बदलाव और उसमें मीडिया के योगदान को भी प्रमुखता से याद किया गया। मुख्य अतिथियों और वक्ताओं ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद बने भव्य राम मंदिर के निर्माण में पांच सौ वर्षों का कड़ा संघर्ष और लंबा इतिहास जुड़ा है। इस पूरे जनआंदोलन को एक वैचारिक ऊंचाई देने और इसे सफलता के अंतिम पायदान तक पहुंचाने में देश के पत्रकारों ने जिस निष्ठा और साहस का परिचय दिया, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। इतिहास के पन्नों में राम मंदिर निर्माण के संदर्भ में पत्रकारों की इस महान भूमिका का उल्लेख हमेशा सुनहरे अक्षरों में किया जाएगा।
इस अवसर पर राजनीतिक और वैचारिक चर्चा को आगे बढ़ाते हुए वक्ताओं ने कहा कि काशी में विश्वनाथ कॉरिडोर, विंध्यवासिनी धाम, अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर और मथुरा का विकास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दृढ़ संकल्प और भगीरथ प्रयासों का परिणाम है। आज इन धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि देश अपनी सांस्कृतिक विरासत और आस्था के मार्ग पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है।
नगर विधायक और एनयूजे नेतृत्व के तीखे विचार
कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए अयोध्या के नगर विधायक वेद प्रकाश गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि डबल इंजन सरकार के नेतृत्व में अयोध्या को विश्व की सर्वोत्तम नगरी बनाने का जो सपना देखा गया था, वह अब जमीन पर साकार हो रहा है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर प्रकाश डाला कि किस प्रकार धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के रूप में इस क्षेत्र का कायाकल्प किया गया है, और इसमें समाज को दिशा देने वाले पत्रकारों का सहयोग अमूल्य रहा है।
एनयूजे के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश शर्मा ने संगठन के उद्देश्यों और पत्रकारों की बुनियादी जरूरतों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में मांग दोहराई कि जिस प्रकार अन्य राज्यों जैसे राजस्थान में वरिष्ठ पत्रकारों के हित में योजनाएं संचालित हैं, उसी तर्ज पर उत्तर प्रदेश और केंद्र स्तर पर भी 60 वर्ष से ऊपर के पत्रकारों के लिए 20,000 रुपये मासिक पेंशन का प्रावधान किया जाना समय की सबसे बड़ी मांग है।
पत्रकार एकता और संगठन की सराहना
समारोह के दौरान देश भर के पत्रकारों को एक मंच पर लाने और इस राष्ट्रीय कार्य परिषद की बैठक को लगातार पांचवीं बार सफलता पूर्वक आयोजित करने के लिए स्थानीय आयोजन समिति और एनयूजे के राष्ट्रीय महासचिव त्रियुग नारायण तिवारी के प्रयासों की भूरी-भूरी प्रशंसा की गई। उत्तर प्रदेश के उपाध्यक्ष सर्वेश कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि इस तरह के आयोजनों से न केवल पत्रकारों के बीच आपसी एकजुटता बढ़ती है, बल्कि उनके अधिकारों की लड़ाई को एक नई दिशा और ऊर्जा मिलती है।
बैठक के अंत में यह संकल्प लिया गया कि देश भर के पत्रकारों की सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य बीमा और पेंशन जैसी बुनियादी मांगों को लेकर सरकार के समक्ष पुरजोर तरीके से पैरवी जारी रखी जाएगी, ताकि दिन-रात जनता की आवाज उठाने वाला पत्रकार अपने जीवन के ढलते पड़ाव पर खुद को असहाय महसूस न करे।