दीपावली से पहले केवीआईसी ने काशी के 160 कुम्हार परिवारों को आधुनिक विद्युत चालित चाक वितरित किए। कुम्हारों को पॉटरी उद्यमी बनाने का है लक्ष्य।
केवीआईसी अध्यक्ष मनोज गोयल ने नमो घाट पर आयोजित कार्यक्रम में बांटे आधुनिक उपकरण, वोकल फॉर लोकल और स्वदेशी अपनाने की अपील।
दीपावली के पावन पर्व से ठीक पहले वाराणसी के कुम्हार परिवारों को स्वरोजगार और आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में एक बड़ी सौगात मिली है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत आने वाले खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) की ओर से काशी के नमो घाट पर एक विशेष वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में आयोग के अध्यक्ष मनोज गोयल ने ग्रामोद्योग विकास योजना के तहत कुम्हार सशक्तीकरण योजना के अंतर्गत कुल 160 कुम्हार परिवारों को आधुनिक विद्युत चालित चाक (Modern Electric Potter's Wheel) वितरित किए।
‘खादी वाली दिवाली’ थीम पर आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के एमएसएमई राज्यमंत्री हंसराज विश्वकर्मा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक कला को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और स्थानीय कारीगरों की आय बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा की गई।
पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक पॉटरी उद्यमी बनाने का लक्ष्य
इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह और कारीगरों को संबोधित करते हुए केवीआईसी अध्यक्ष मनोज गोयल ने कहा कि काशी की माटी में सदियों पुरानी समृद्ध परंपरा और यहां के कारीगरों का अनमोल हुनर समाया हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज काशी विकास और आधुनिकीकरण के नए मील के पत्थर स्थापित कर रही है।
अध्यक्ष गोयल ने स्पष्ट किया कि सरकार का मुख्य उद्देश्य काशी के कुम्हारों को केवल पारंपरिक चाक तक सीमित रखना नहीं है, बल्कि उन्हें आधुनिक पॉटरी उत्पादों का सफल उद्यमी बनाना है। इस दिशा में काम करते हुए कारीगरों को नई तकनीकी जानकारी, बेहतर डिजाइन विकसित करने के तौर-तरीके और उन्हें बड़े बाजारों तक पहुंच बनाने के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
कम मेहनत में बढ़ेगी उत्पादन क्षमता और आमदनी
विद्युत चालित चाक मिलने से वाराणसी के कुम्हारों के कामकाज के तरीके में बड़ा बदलाव आएगा। अधिकारियों के अनुसार, इन आधुनिक मोटराइज्ड चाक के उपयोग से कारीगर कम समय और न्यूनतम शारीरिक श्रम के बल पर अधिक संख्या में मिट्टी के दीये, बर्तन और अन्य कलात्मक उत्पाद तैयार कर सकेंगे। उत्पादन क्षमता में इस भारी वृद्धि से सीधे तौर पर उनकी आमदनी में इजाफा होगा और इन परिवारों के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।
मनोज गोयल ने इस बात पर जोर दिया कि बाजार में बिकने वाला मिट्टी का हर एक दीया केवल एक वस्तु नहीं है, बल्कि यह किसी कुम्हार परिवार के महीनों की मेहनत, उनकी उम्मीदों और आजीविका की रीढ़ होता है।
खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र की प्रगति के आंकड़े
कार्यक्रम के दौरान खादी और ग्रामोद्योग के बढ़ते दायरे के आंकड़े भी साझा किए गए। अध्यक्ष गोयल ने जानकारी दी कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश में खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र की कुल बिक्री का आंकड़ा लगभग 1.87 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
यदि केवल वाराणसी मंडलीय कार्यालय की बात करें, तो इसके अंतर्गत आने वाले 12 जिलों में कुल 147 पंजीकृत खादी संस्थाएं सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। इन संस्थाओं के तहत क्षेत्र में 572 बिक्री केंद्र संचालित हो रहे हैं और इनसे 14,804 पंजीकृत कारीगर सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं।
'वोकल फॉर लोकल' और 'हर घर स्वदेशी' का आह्वान
त्योहारों के इस सीजन में स्वदेशी को बढ़ावा देने की अपील करते हुए केवीआईसी अध्यक्ष ने देशवासियों से आह्वान किया कि वे इस दीपावली पर विदेशी सामानों के बजाय स्थानीय कुम्हारों द्वारा बनाए गए मिट्टी के दीये, खादी के वस्त्र और अन्य स्वदेशी उत्पादों की ही खरीदारी करें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘हर घर स्वदेशी’ अभियानों को जन-जन तक पहुंचाना देश के आर्थिक विकास के लिए बेहद आवश्यक है।
नमो घाट पर संपन्न हुए इस कार्यक्रम में खादी आयोग के तमाम वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न खादी संस्थाओं के प्रतिनिधि, लाभ पाने वाले उत्साही कारीगर और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।