उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में मिला कार्यकाल 25 नवंबर को पूरा हो रहा है। शासन स्तर पर कार्यकाल विस्तार के प्रस्ताव पर विचार जारी है।
25 नवंबर को समाप्त हो रही है छह महीने की प्रशासक अवधि
उत्तर प्रदेश की पंचायती राज व्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ रही है। राज्य के ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में दिए गए कार्यकाल को आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है। प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस संबंध में कार्यकाल के विस्तार का एक नया प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजे जाने की बात सामने आई है, जिस पर जल्द ही मुहर लगने की संभावना जताई जा रही है।
गौरतबल है कि प्रदेश में ग्राम प्रधानों को गत 26 मई को छह महीने की अवधि के लिए प्रशासक के तौर पर नियुक्त किया गया था। नियमानुसार इस निर्धारित जिम्मेदारी के पूरा होने की अंतिम तिथि 25 नवंबर तय की गई है। कार्यकाल की यह समय सीमा नजदीक आते ही ग्रामीण क्षेत्रों और प्रशासनिक हलकों में ग्राम प्रधानों की आगामी भूमिका को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
शासन स्तर पर प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया
विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से मिल रही रिपोर्ट के मुताबिक, ग्राम प्रधानों की प्रशासक के रूप में कार्य करने की अवधि को आगे बढ़ाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर प्रस्ताव शासन को भेजे जाने की जानकारी मिली है। हालांकि, इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर उत्तर प्रदेश शासन की तरफ से अभी तक कोई अंतिम निर्णय या आधिकारिक शासनादेश जारी नहीं किया गया है। आधिकारिक पुष्टि आदेश आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
शासन के अगले फैसले पर टिकी निगाहें
यदि शासन द्वारा इस कार्यकाल विस्तार के प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दे दी जाती है, तो वर्तमान में ग्राम पंचायतों में प्रशासक की जिम्मेदारी संभाल रहे प्रधानों का कार्यकाल और आगे बढ़ सकता है। इससे गांवों में विकास कार्यों और प्रशासनिक बैठकों के संचालन में निरंतरता बनी रहने की उम्मीद है। फिलहाल, राज्य के सभी ग्राम प्रधानों और पंचायत स्तर से जुड़े अधिकारियों की निगाहें शासन के आगामी निर्णय पर पूरी तरह टिकी हुई हैं।