राजस्थान के झालावाड़ जिले में पुलिस ने डिकॉय ऑपरेशन चलाकर देह व्यापार रैकेट से 6 नाबालिग लड़कियों को बचाया। परिवार के सदस्यों समेत 5 आरोपी गिरफ्तार।
झालावाड़ में पुलिस कार्रवाई: डिकॉय ऑपरेशन के जरिए परिवार वालों द्वारा बेची गई नाबालिगों को बचाया गया
राजस्थान के झालावाड़ जिले में पुलिस ने एक बड़े और गंभीर देह व्यापार रैकेट का पर्दाफाश करते हुए छह नाबालिग लड़कियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। इस मामले में पुलिस ने पीड़ित लड़कियों के पारिवारिक सदस्यों और रिश्तेदारों सहित कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई पिछले महीने एसपी कार्यालय को मिली एक गोपनीय शिकायत के आधार पर तीन नवंबर को अंजाम दी गई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि एक विमुक्त जाति (denotified tribe) से जुड़े परिवार अपनी नाबालिग बच्चियों को पैसों के लिए देह व्यापार में धकेल रहे हैं, जिसमें स्थानीय दलाल ग्राहकों से पैसे वसूलने का काम करते थे।
विशेष टीम का गठन और डिकॉय ऑपरेशन
मामले की गंभीरता को देखते हुए सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) आयुष श्रोत्रिय की निगरानी में एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया था। इस टीम ने आरोपों की पुष्टि के लिए एक डिकॉय ऑपरेशन चलाया और जासूसी कैमरों की मदद से डिजिटल सबूत जुटाए। झालावाड़ के पुलिस अधीक्षक (SP) अमित बुानिया के अनुसार, डिकॉय ऑपरेशन के दौरान रिकॉर्ड किए गए फुटेज में साफ दिखा कि परिवार के सदस्य और दलाल ग्राहकों से लड़कियों के साथ 10 से 20 मिनट बिताने के एवज में पैसे मांग रहे थे।
इस पुख्ता डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों के आधार पर तीन नवंबर को महिला पुलिसकर्मियों समेत 100 से अधिक पुलिसकर्मियों ने कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान 12 से 17 वर्ष की आयु की छह नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया गया। मौके से भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री भी जब्त की गई, जिसकी फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम ने जांच कर साक्ष्य जुटाए।
स्वास्थ्य और कानूनी कार्रवाई
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि रेस्क्यू की गई छह में से पांच लड़कियों का बार-बार यौन शोषण किया गया था। इसके अलावा, मेडिकल जांच के दौरान दो पीड़ित लड़कियों में यौन संचारित रोग (STD) के लक्षण भी पाए गए। स्वास्थ्य अधिकारियों की देखरेख में संक्रमित लड़कियों का इलाज और टीकाकरण कराया जा रहा है।
गिरफ्तार किए गए पांचों आरोपियों में तीन महिलाएं भी शामिल हैं, जो रेस्क्यू की गई लड़कियों की पड़ोसी और रिश्तेदार हैं। पुलिस ने इन सभी आरोपियों को शुक्रवार को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। आरोपियों के खिलाफ अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम (Immoral Traffic Prevention Act) की धारा 3, 4 और 5 तथा यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।
बाल कल्याण समिति के सुपुर्द हुईं पीड़ित
सुरक्षा और पुनर्वास सुनिश्चित करने के लिए सभी छह लड़कियों को बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee) के समक्ष पेश किया गया, जिसके बाद उन्हें एक सुरक्षित आश्रय गृह (shelter home) भेज दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस अवैध नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने और यह पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है कि क्या इस रैकेट में और भी नाबालिग लड़कियों को धकेला गया था।