अमेरिकी विमानन नियामक FAA अपने पुराने सिस्टम से 2028 तक फ्लॉपी डिस्क का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर देगा। जानिए क्या है इसका कारण।
अमेरिकी विमानन नियामक FAA (फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन) ने घोषणा की है कि वह अपने चार दशकों पुराने कंप्यूटर सिस्टम में फ्लॉपी डिस्क के इस्तेमाल को 2028 तक पूरी तरह समाप्त कर देगा। हालांकि इस खबर को लेकर असमंजस की स्थिति बन सकती है, लेकिन वास्तविकता यह है कि इन फ्लॉपी डिस्क का उपयोग सीधे तौर पर हवा में उड़ रहे विमानों को ट्रैक करने के लिए नहीं किया जाता है।
अमेरिकी परिवहन विभाग के एक बदलाव पत्र के अनुसार, हवाई यातायात नियंत्रक 'इन्फॉर्मेशन डिस्प्ले सिस्टम 4' नामक एक प्रणाली का उपयोग करते हैं जो मौसम संबंधी जानकारी, नोटम्स (नोटिस टू एयर मिशन) और हवाई अड्डे की स्थिति जैसे महत्वपूर्ण आंकड़े संग्रहित करने के लिए पुरानी तकनीक और फ्लॉपी डिस्क पर निर्भर है। परिवहन सचिव शॉन डफी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि इस पुरानी तकनीक को हटाकर इसकी जगह आधुनिक 'एंटरप्राइज इंफॉर्मेशन डिस्प्ले सिस्टम' (E-IDS) को शामिल किया जा रहा है। वर्तमान में यह 5 साइटों पर सक्रिय है और 2028 तक इसे 400 से अधिक FAA सुविधाओं तक पहुंचा दिया जाएगा।
फ्लॉपी डिस्क का इतिहास और तकनीकी सफर
फ्लॉपी डिस्क का व्यापक उपयोग लगभग तीन दशक पहले बंद हो चुका था। सोनी और मित्सुबिशी जैसे प्रमुख निर्माताओं ने 2011 तक इसका उत्पादन बंद कर दिया था, जिसके बाद भारतीय कंपनी 'अमकेत' ने दो साल और इसका उत्पादन जारी रखा। 1971 से 1988 के बीच फ्लॉपी डिस्क डेटा स्टोरेज की दुनिया का एक बड़ा नाम थीं, जो विकसित होकर 1.44 MB स्टोरेज क्षमता तक पहुंचीं। 1971 में पहला 8-इंच डिस्क केवल 80 किलोबाइट डेटा स्टोर कर सकता था, जो 1977 तक बढ़कर 1.2 MB हो गया। 1988 में 1.44 MB क्षमता वाली फ्लॉपी डिस्क आई जो डेटा पोर्टेबिलिटी का स्वर्ण मानक बन गई।
हालांकि, 1990 के दशक के मध्य तक CD-ROM ड्राइव मानक बन चुके थे, जो 650 MB तक डेटा स्टोर कर सकते थे। साल 1998 में एप्पल के आईमैक जी3 ने बिना फ्लॉपी ड्राइव और सीडी-रोम तथा यूएसबी पोर्ट के साथ आकर इस तकनीक के अंत की नींव रख दी। इसके बाद यूएसबी फ्लैश ड्राइव, एसडी कार्ड और बाहरी हार्ड ड्राइव का दौर आया, जो आज टेराबाइट (TB) और उससे अधिक डेटा स्टोर करने में सक्षम हैं। वर्तमान में 1 TB का एक माइक्रोएसडी कार्ड फ्लॉपी डिस्क की तुलना में आयतन में लगभग 170 गुना छोटा होने के बावजूद लगभग 6.94 लाख गुना अधिक डेटा स्टोर कर सकता है।
क्यों इतने लंबे समय तक टिकी रही यह तकनीक?
एविएशन इंडस्ट्री जैसे क्षेत्र में फ्लॉपी डिस्क जैसी पुरानी तकनीक के इतने लंबे समय तक टिके रहने का मुख्य कारण उदासीनता नहीं, बल्कि जोखिम कम करना (Risk Mitigation) था। विमानन क्षेत्र में गलतियों की भारी कीमत चुकानी पड़ती है, इसलिए एक ऐसा सिस्टम जो दशकों से कई उपयोग मामलों में ठीकठाक चल रहा है, उसे ऐसे नए सेटअप से प्राथमिकता दी जाती है जिसे हर स्थिति में परीक्षण और प्रमाणित करना बाकी हो। यही कारण है कि दुनिया भर की सरकारी प्रणालियों में पुरानी तकनीक को हटाने की प्रक्रिया धीमी रही है। उदाहरण के लिए, जापान ने 2024 में फ्लॉपी डिस्क का उपयोग बंद किया, जबकि अमेरिकी वायु सेना ने 2019 तक परमाणु मिसाइल साइलो को नियंत्रित करने वाले सिस्टम में 8-इंच डिस्क का उपयोग जारी रखा था। इसके अलावा 2020 तक बोइंग 747-400 विमान को नियंत्रित करने वाले कुछ सॉफ्टवेयर भी तकनीशियनों द्वारा फ्लॉपी डिस्क के जरिए अपडेट किए जाते थे।