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शिक्षा और एआई पर कानपुर में मंथन: मूल्य आधारित पढ़ाई के बिना विकास अधूरा

शिक्षा और एआई पर कानपुर में मंथन: मूल्य आधारित पढ़ाई के बिना विकास अधूरा

विकास की परिभाषा केवल चमचमाती इमारतें, लंबी सड़कें या मजबूत अर्थव्यवस्था नहीं है, बल्कि इसके मूल में मानवीय मूल्य, उच्च नैतिकता और कर्तव्यबोध का होना अनिवार्य है। यह बात शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी ने शनिवार को कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) में आयोजित दो दिवसीय 'उत्तर प्रदेश ज्ञान सभा' के उद्घाटन सत्र के दौरान कही। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि शिक्षा प्रणाली केवल भौतिक और आर्थिक प्रगति तक सीमित रह जाती है, तो एक सच्चे और विकसित समाज की कल्पना करना बेमानी होगा।

वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई प्रेक्षागृह में हुआ भव्य शुभारंभ

विश्वविद्यालय परिसर स्थित वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई प्रेक्षागृह में आयोजित इस दो दिवसीय महाकुंभ का शुभारंभ विश्वविद्यालय और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने की। इस प्रतिष्ठित आयोजन में देश और प्रदेश के कई दिग्गज शिक्षाविद्, शोधकर्ता और छात्र-छात्राएं एकत्रित हुए।

समारोह के दौरान मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए डॉ. अतुल कोठारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश का चहुंमुखी विकास सीधे तौर पर देश के समग्र विकास से जुड़ा हुआ है। जब तक हमारी शिक्षा व्यवस्था संस्कारों और सामाजिक उत्तरदायित्व को अपने पाठ्यक्रम का मुख्य हिस्सा नहीं बनाएगी, तब तक हम समाज में अपेक्षित बदलाव नहीं देख सकते।

डिग्री और रोजगार से आगे है शिक्षा का असली उद्देश्य

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आधुनिक युग में शिक्षा का दायरा केवल नौकरी पाने का साधन या डिग्रियां हासिल करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। शिक्षा का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के भीतर ज्ञान, विवेक, कौशल, संवेदनशीलता और समाज के प्रति जवाबदेही की भावना को जागृत करना है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP-2020) की चर्चा करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यह नीति बहुविषयक शिक्षा, कौशल विकास, मातृभाषा के प्रयोग, भारतीय ज्ञान परंपरा के संवर्धन और अनुसंधान (Research) को बढ़ावा देने के लिए एक मजबूत नींव का काम कर रही है।

शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की लंबी यात्रा

न्यास के राष्ट्रीय सहसंयोजक संजय स्वामी ने संगठन की अब तक की विकास यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस वैचारिक आंदोलन की शुरुआत वर्ष 2004 में एक छोटी सी पहल के रूप में हुई थी, जिसे औपचारिक रूप से 2007 में न्यास के रूप में गठित किया गया। उन्होंने गर्व के साथ साझा किया कि कभी मात्र छह विषयों से शुरू हुआ यह सफर आज बढ़कर 19 विभिन्न विषयों और शिक्षा के अनगिनत आयामों तक फैल चुका है, जो देश भर में वैचारिक अलख जगा रहा है।

एआई के दौर में शिक्षकों की बदलती भूमिका

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने आधुनिक तकनीक और पारंपरिक मूल्यों के संतुलन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को अपने व्यक्तिगत आचरण से विद्यार्थियों के समक्ष एक जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। आज के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) युग में शिक्षक की भूमिका केवल किताबी जानकारी या आंकड़े परोसने तक सीमित नहीं रह सकती।

कुलपति ने कहा, "एआई सूचना और डेटा तो दे सकता है, लेकिन संवाद, जीवन का विवेक और आत्मचिंतन केवल एक मानवीय शिक्षक ही प्रदान कर सकता है। इसलिए भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ना आज समय की सबसे बड़ी मांग है।"

गुरु-शिष्य परंपरा और तकनीकी का संगम

कार्यक्रम के दूसरे सत्र का मुख्य आकर्षण गुरु-शिष्य परंपरा, भारतीय ज्ञान परंपरा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का अंतर्संबंध रहा। इस सत्र में आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर अर्नब भट्टाचार्य मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

  • एआई तकनीक केवल सूचनाएं उपलब्ध करा सकती है।
  • सूचना को ज्ञान और प्रज्ञा में बदलने के लिए मानवीय चिंतन आवश्यक है।
  • तकनीक कितनी भी उन्नत हो जाए, अनुभव, विवेक और नैतिकता का विकल्प नहीं बन सकती।

उच्च शिक्षा और उत्तर प्रदेश का भविष्य

तीसरे सत्र में पूरी तरह से उच्च शिक्षा की दशा और दिशा तथा उत्तर प्रदेश के विकास पर मंथन किया गया। पीपीएन कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अनूप कुमार ने उच्च शिक्षा में नामांकन का दायरा बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के दूर-दराज और ग्रामीण क्षेत्रों तक नए उच्च शिक्षण संस्थानों की पहुंच बनानी होगी। इसके साथ ही कौशल विकास के कार्यक्रमों और डिजिटल सुविधाओं के विस्तार से ही राज्य के युवाओं को ग्लोबल कॉम्पिटिटिव बनाया जा सकता है।

पर्यावरण, टिकाऊ शहर और तकनीक

ज्ञान सभा के अंतिम और समापन सत्र में तकनीकी शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा हुई। आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर सच्चिदानंद त्रिपाठी ने एआई और टिकाऊ शहरों (Sustainable Cities) के मॉडल पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करके प्रदूषण के स्तर, बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं और यातायात के जाम का सटीक पूर्वानुमान लगाया जा सकता है, जिससे प्रशासन को बेहतर और त्वरित निर्णय लेने में मदद मिलती है।

एचबीटीयू के कुलपति प्रो. शमशेर सिंह ने भी शिक्षा की गिरती या उठती गुणवत्ता पर बात करते हुए अच्छे और समर्पित शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। दो दिनों तक चलने वाले इस महामंथन में प्रदेश भर से आए शिक्षकों, शोधार्थियों और प्रशिक्षकों ने भाग लिया और शिक्षा के भविष्य का एक नया खाका तैयार किया।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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