कौशांबी जिले में बच्चों और किशोरों की सुरक्षा को और अधिक पुख्ता करने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने एक व्यापक और बेहद अहम जागरूकता अभियान का आगाज किया है। वर्तमान समय में बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों और उनके प्रति कानूनी जागरूकता की कमी को दूर करने के लिए यह पहल की गई है। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के स्पष्ट निर्देशों के बाद जिलेभर के शिक्षण संस्थानों में न्यायिक अधिकारियों की सीधी भागीदारी से बच्चों को उनके अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े कानूनों का पाठ पढ़ाया जा रहा है।
पॉक्सो अधिनियम 2012 और बाल संरक्षण पर विशेष जोर
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य छात्र-छात्राओं को पॉक्सो अधिनियम-2012 (POCSO Act) के प्रावधानों से पूरी तरह अवगत कराना है। अक्सर यह देखा गया है कि बच्चे या तो अनजान होते हैं या डर के कारण अपने साथ होने वाली गलत हरकतों को छिपा लेते हैं। इसी दीवार को तोड़ने के लिए न्यायिक अधिकारियों ने खुद विद्यालयों का रुख किया है और बच्चों से संवाद स्थापित किया है।
अभियान के दौरान सत्रों में बच्चों को बेहद सरल और संवेदनशीलता के साथ 'गुड टच' (सुरक्षित स्पर्श) और 'बैड टच' (असुरक्षित स्पर्श) के बीच का बारीक अंतर समझाया गया। इसके साथ ही बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथाओं, यौन अपराधों की गंभीरता और कानून द्वारा बच्चों को दी जाने वाली कानूनी सहायता के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई।
कानून की नजर में कौन है बच्चा?
विशेष सत्रों के दौरान अधिकारियों ने बच्चों और शिक्षकों को स्पष्ट किया कि देश के कानून के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु का प्रत्येक व्यक्ति बच्चा माना जाता है। इस उम्र सीमा के भीतर आने वाले किसी भी बालक या बालिका के साथ यदि किसी भी प्रकार का अपराध या उत्पीड़न होता है, तो कानून उसकी पूरी रक्षा करता है।
प्रमुख विद्यालयों में सुबह की सभा के दौरान हुआ संवाद
यह जागरूकता अभियान सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे धरातल पर उतारने के लिए जिले के प्रमुख विद्यालयों को चुना गया है।
- राजकीय बालिका इंटर कॉलेज कड़ा: यहाँ सुबह की सभा (मॉर्निंग असेंबली) के दौरान छात्राओं को उनके कानूनी अधिकारों और सुरक्षा उपायों के बारे में बताया गया।
- तिलक इंटर कॉलेज कनैली: इस विद्यालय में भी न्यायिक अधिकारियों ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए किसी भी अप्रिय स्थिति में चुप न रहने की सलाह दी।
- जय प्रकाश नारायण सर्वोदय बालिका विद्यालय कोइलहा: यहाँ की छात्राओं ने भी इस विशेष सत्र में भाग लिया और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान पाया।
मुश्किल वक्त में काम आने वाले महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबर
अधिकारियों ने बच्चों को यह भी सिखाया कि संकट के समय उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि तुरंत मदद मांगनी चाहिए। इसके लिए उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबरों और संस्थानों की जानकारी साझा की:
- चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर: 1098 (बच्चों की सहायता के लिए समर्पित)
- पुलिस आपातकालीन सेवा: 112 (तुरंत पुलिस सहायता के लिए)
- अन्य मंच: बाल कल्याण समिति (CWC) और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA)।
बच्चों को यह भी आश्वस्त किया गया कि यदि कोई बच्चा किसी अपराध की शिकायत करता है, तो कानून के सख्त प्रावधानों के तहत पीड़ित बच्चे की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है, ताकि समाज में उसकी गरिमा पर कोई आंच न आए।
अधिकारियों और न्यायविदों के विचार
अ अपर जिला जज अशोक श्रीवास्तव ने इस अभियान के बारे में विस्तार से बात करते हुए बताया कि बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना समाज की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने कहा, "इस अभियान के तहत आगे भी जिले के विभिन्न ग्रामीण और शहरी विद्यालयों में ऐसे कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएंगे, ताकि कोई भी बच्चा कानूनी जानकारी के अभाव में असुरक्षित न रहे।"
अभिभावकों और शिक्षकों से विशेष अपील
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने केवल बच्चों तक ही अपनी बात सीमित नहीं रखी है, बल्कि अभिभावकों और शिक्षकों से भी एक गंभीर अपील की है। प्राधिकरण का मानना है कि स्कूल के बाद बच्चे का अधिकांश समय घर पर बीतता है, इसलिए माता-पिता और शिक्षकों की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वे बच्चों के साथ दोस्ताना माहौल बनाएं।
बच्चों के व्यवहार में आने वाले छोटे-छोटे बदलावों, उनके डर या गुमसुम रहने की स्थिति को नजरअंदाज न करें। यदि बच्चे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होंगे और परिवार का साथ उन्हें मिलेगा, तो बाल अपराधों पर काफी हद तक लगाम लगाई जा सकती है। कौशांबी प्रशासन का यह कदम आने वाले समय में बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए एक मजबूत नींव साबित हो सकता है।