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सहारनपुर के किसानों की खुली किस्मत, सोलर पंप ने पूरी बदली खेती की तस्वीर

सहारनपुर के किसानों की खुली किस्मत, सोलर पंप ने पूरी बदली खेती की तस्वीर

खेती किसानी की नई इबारत लिख रहे सहारनपुर के अन्नदाता

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में कृषि क्षेत्र के भीतर एक शांत लेकिन बेहद शक्तिशाली क्रांति ने आकार लेना शुरू कर दिया है। कभी बिजली के लंबे कट और डिम वोल्टेज की समस्या से जूझने वाले यहां के किसानों के लिए अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। खेतों की माटी को सींचने के लिए अब किसी को बिजली के आने का घंटों इंतजार नहीं करना पड़ता और न ही महंगे डीजल जनरेटरों की मार झेलनी पड़ती है। इस बड़े बदलाव के केंद्र में केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान (पीएम कुसुम) योजना है, जिसके तहत स्थापित सोलर पंप किसानों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं।

बिजली संकट से मुक्ति और सिंचाई में क्रांतिकारी सुधार

पारंपरिक खेती में सिंचाई सबसे बड़ा और खर्चीला चरण माना जाता है। उत्तर प्रदेश के इस इलाके में ट्यूबवेल चलाने के लिए बिजली कटौती एक आम समस्या थी। रात-बेरात खेतों में जाकर पानी लगाना किसानों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका था। कई बार फसल सूखने की कगार पर पहुंच जाती थी क्योंकि ग्रिड की बिजली ऐन वक्त पर दगा दे जाती थी। लेकिन अब खेतों में लगे सोलर पैनल सूरज की किरणों से ऊर्जा खींचकर पानी के फव्वारे छोड़ रहे हैं।

स्थानीय किसानों का कहना है कि इस तकनीक ने उनके जीवन का आधा तनाव कम कर दिया है। अब दिन के उजाले में ही भरपूर बिजली मिल जाती है, जिससे समय पर खेतों की सिंचाई हो जाती है। समय पर पानी मिलने का सीधा असर फसलों की सेहत पर दिखाई दे रहा है। गेहूं, धान, और गन्ने जैसी प्रमुख फसलों के साथ-साथ सब्जियों की पैदावार में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

पीएम कुसुम योजना: कैसे मिल रहा है किसानों को सीधा लाभ

सरकार की इस योजना के तहत किसानों को भारी सब्सिडी पर सोलर पंप उपलब्ध कराए जा रहे हैं ताकि वे पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर अपनी निर्भरता खत्म कर सकें। इस योजना के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • भारी सब्सिडी: किसानों को पंप की कुल लागत का केवल एक छोटा हिस्सा ही देना होता है, बाकी का बड़ा हिस्सा केंद्र और राज्य सरकार द्वारा सब्सिडी के रूप में दिया जाता है।
  • डीजल खर्च से आजादी: महंगे डीजल पर निर्भर रहने वाले किसानों की जेब पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ लगभग शून्य हो गया है।
  • पर्यावरण अनुकूल: सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से कार्बन उत्सर्जन कम हो रहा है और पर्यावरण को भी स्वच्छ रखने में मदद मिल रही है।
  • रखरखाव में आसानी: इन आधुनिक सोलर पंपों की बनावट ऐसी है कि इनका रखरखाव बेहद आसान है और तकनीकी खराबी आने पर तुरंत समाधान मिल जाता है।

फसल की पैदावार बढ़ी, आमदनी में भी आया उछाल

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सिंचाई की अनिश्चितता ही अक्सर फसल की बर्बादी का कारण बनती है। सहारनपुर में जब से सोलर पंपों का जाल बिछा है, तब से फसलों को उनकी जरूरत के मुताबिक पानी मिल रहा है। इससे न केवल पौधों का विकास बेहतर हुआ है बल्कि कीटों और रोगों से लड़ने की उनकी क्षमता भी मजबूत हुई है।

एक स्थानीय किसान ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि पहले उन्हें अपनी फसल के एक हिस्से की सिंचाई के लिए पड़ोसी या महंगे किराए के पंप पर निर्भर रहना पड़ता था। इसमें पैसे और समय दोनों की भारी बर्बादी होती थी। अब खेत पर ही अपना सोलर पंप होने से जब जी चाहे सिंचाई कर लेते हैं। इसका परिणाम यह हुआ कि प्रति एकड़ उत्पादन में इजाफा हुआ है और बाजार में फसल बेचने पर मुनाफा भी अधिक मिल रहा है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही नई रफ्तार

खेती की लागत घटने और पैदावार बढ़ने का सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। किसानों के हाथ में जब अधिक पैसा आता है, तो वे अपने परिवारों के जीवन स्तर को सुधारने में निवेश करते हैं। बच्चों की शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और घरेलू सुख-सुविधाओं पर खर्च बढ़ा है। सहारनपुर का यह मॉडल अब आसपास के जिलों के लिए भी एक प्रेरणा बनता जा रहा है। अन्य क्षेत्रों के किसान भी अपने यहां ऐसे सोलर पंप लगवाने के लिए प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं और योजना की जानकारी जुटा रहे हैं।

भविष्य की ओर बढ़ता कदम

साल 2026 के इस दौर में जहां तकनीक हर क्षेत्र में तेजी से पैर पसार रही है, वहीं कृषि क्षेत्र में तकनीक का यह समावेश देश के अन्नदाता को आत्मनिर्भर बना रहा है। सहारनपुर के किसानों की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि सही योजनाएं धरातल पर ईमानदारी से लागू की जाएं, तो किसानी के घाटे के सौदे को मुनाफे में बदला जा सकता है। आने वाले समय में सरकार का लक्ष्य इस योजना का दायरा और अधिक बढ़ाने का है ताकि देश के कोने-कोने तक के किसानों को इस हरित क्रांति का सीधा लाभ मिल सके।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

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रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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