हिसार की बोस्टल जेल से शुरू हुआ था कुख्यात हिमांशु भाऊ गैंग का खौफनाक सफर, दिल्ली-एनसीआर में रंगदारी और फायरिंग के जरिए फैला रहा है अपना आपराधिक साम्राज्य
कुख्यात गैंगस्टर हिमांशु भाऊ और उसके साथियों ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में रंगदारी और दहशत का एक बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया है। अमेरिका में पकड़े जाने से पहले यह गैंग विदेश से बैठकर ही अपने गुर्गों के जरिए आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रही थी। इस गैंग की शुरुआत हरियाणा के हिसार स्थित बोस्टल जेल में हुई थी, जहां नाबालिग अपराधियों और बाल कैदियों को एकत्रित करके इस आपराधिक साम्राज्य की नींव रखी गई थी। वर्तमान में यह गैंग न केवल स्थानीय स्तर पर व्यापारियों को निशाना बना रही है, बल्कि अपने वर्चस्व को मजबूत करने के लिए देश-विदेश के अन्य बड़े गैंगस्टर्स के साथ भी गठजोड़ कर रही है।
बोस्टल जेल ब्रेककांड से हुई थी गैंग की असल शुरुआत
दिल्ली-एनसीआर में वर्चस्व कायम करने की जुगत में लगी भाऊ गैंग की स्थापना हिसार की बोस्टल जेल के भीतर हुई थी। नाबालिग बंदियों को एकजुट करके तैयार की गई इस गैंग ने 12 अक्टूबर 2020 को एक बड़े सनसनीखेज जेल ब्रेककांड को अंजाम दिया था। इस घटना के दौरान हिमांशु समेत 16 कैदी जेल स्टाफ पर जानलेवा हमला कर मौके से फरार होने में कामयाब हो गए थे। जेल से भागने वाले ये बाल कैदी समय के साथ कुख्यात अपराधी बन चुके हैं, जो लगातार एनसीआर क्षेत्र में रंगदारी वसूलने और वारदातों को अंजाम देने में सक्रिय हैं।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, बोस्टल जेल से फरार हुए कुल 17 बाल बंदियों की क्राइम हिस्ट्री बेहद खतरनाक रही है। इनमें से 8 बंदी पहले ही हत्या, दुष्कर्म और लूट जैसी गंभीर वारदातों में शामिल रहे हैं। हालांकि घटना के तुरंत बाद इनमें से 3 बंदियों को पकड़ लिया गया था, लेकिन जो अपराधी फरार होने में सफल रहे, वे बाद में हिमांशु भाऊ और अन्य सहयोगी गैंग्स के साथ जुड़ गए। हिमांशु भाऊ विदेश में बैठकर ही इन गुर्गों के लिए टारगेट फिक्स करता था। इसके बाद कारोबारियों को फोन पर धमकियां दी जाती थीं और रंगदारी न मिलने पर उनके प्रतिष्ठानों पर ताबड़तोड़ फायरिंग करवाकर दहशत फैलाई जाती थी।
विदेश से बैठे सरगना और देश में संभाल रहे रिश्तेदार
गोहाना में मातूराम हलवाई की दुकान पर फायरिंग कर दो करोड़ रुपये की फिरौती मांगने की घटना सामने आने के बाद पुलिस और एसटीएफ हरकत में आई। सोनीपत एसटीएफ की ताबड़तोड़ कार्रवाई के दौरान यह खुलासा हुआ कि गैंग के मुख्य सरगना हिमांशु उर्फ भाऊ और साहिल विदेश में छिपे बैठे हैं, जबकि भारत में उनके पिता और करीबी रिश्तेदार उनके इस आपराधिक साम्राज्य को संभाल रहे हैं।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने सबसे पहले विदेश में बैठे साहिल उर्फ भाऊ रिटौली के पिता कैलाशचंद्र को गिरफ्तार किया था। इसके बाद पुलिस ने आगे की कड़ियों को जोड़ते हुए गैंग सरगना हिमांशु के राइट हैंड साहिल के परिजनों और सहयोगियों पर शिकंजा कसा। इसी कड़ी में पुलिस ने दोनों की बुआ के बेटे और रोहतक जिले के गांव गुढाण निवासी राहुल को गिरफ्तार किया है, जो कि एक कॉलेज छात्र है। पुलिस पूछताछ में राहुल ने कबूल किया है कि वह अपने साथी जिला झज्जर के गांव चिलयान निवासी यश उर्फ पांडु के साथ मिलकर गैंग के पैसों का प्रबंधन करता था। यह अवैध वसूली और आपराधिक गतिविधियों के संचालन के लिए पैसों का वितरण करने का काम संभालता था.
ताकत बढ़ाने के लिए कई कुख्यात गिरोहों से मिलाया हाथ
एनसीआर क्षेत्र में अपने पैर जमाने और आपराधिक वर्चस्व स्थापित करने के लिए भाऊ गैंग ने क्षेत्र के कई अन्य सक्रिय अपराधियों और गिरोहों के साथ हाथ मिलाया है। दक्षिण हरियाणा में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए इस गैंग ने कौशल और नीरज फरीदपुरिया के साथ गठजोड़ किया। इस मामले में फरीदपुरिया का चचेरा भाई सौरव पहले ही पुलिस की गिरफ्त में आ चुका है।
इसी तरह झज्जर क्षेत्र में रोहित छपार इस गैंग की कमान संभाल रहा था, हालांकि मातूराम हलवाई की दुकान पर हुई फायरिंग की घटना के बाद वह भी पुलिस के हत्थे चढ़ चुका है। सोनीपत में गैंग ने कुल्लू बुसानिया के साथ मिलकर आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दिया, जिसके तहत शराब कारोबारी सुंदर हत्याकांड को भी अंजाम दिए जाने की बात सामने आई है। वहीं हिसार क्षेत्र में यह गैंग साजिद खान के साथ मिलकर काम कर रही थी।
लॉरेंस गैंग से मुकाबले के लिए बंबीहा गैंग से बढ़ाई नजदीकियां
दिल्ली-एनसीआर में रंगदारी और अवैध वसूली के कारोबार में सबसे बड़ी बाधा बन रहे लॉरेंस बिश्नोई गैंग से मुकाबले के लिए भाऊ गैंग ने उसकी धुर विरोधी पंजाब की बंबीहा गैंग के साथ हाथ मिला लिया है। आपराधिक गलियारों में इस बात की चर्चा आम है कि भाऊ का करीबी साथी नीरज फरीदपुरिया इस समय पंजाब की बंबीहा गैंग और हरियाणा-दिल्ली के कुख्यात गैंगस्टर कौशल गिरोह का मुख्य मास्टरमाइंड बना हुआ है और इस पूरे गठजोड़ की कमान संभाल रहा है।
गैंगस्टर नीरज फरीदपुरिया का आपराधिक इतिहास भी काफी लंबा रहा है। फरीदाबाद में 26 जून 2019 को कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता विकास चौधरी की हत्या के पीछे भी नीरज ही मुख्य सूत्रधार था। वह पैरोल या जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद से ही फरार चल रहा था। उसकी गिरफ्तारी के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक लाख रुपये और हरियाणा पुलिस ने 25 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा है, जिससे इन गैंग्स के आपसी नेटवर्क और उनकी गतिविधियों की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।