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यूपी चुनाव 2027: सीट बंटवारे पर कांग्रेस का बड़ा दावा, सपा के साथ खींचतान शुरू

यूपी चुनाव 2027: सीट बंटवारे पर कांग्रेस का बड़ा दावा, सपा के साथ खींचतान शुरू

उत्तर प्रदेश की राजनीति में सीटों का खेल शुरू

साल 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में अभी वक्त है, लेकिन राजनीतिक दलों की सुगबुगाहट और बयानबाजी ने राज्य का सियासी पारा अभी से हाई कर दिया है। खासकर विपक्षी दलों के INDIA गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे (Seat Sharing) को लेकर अंदरखाने क्या पक रहा है, अब यह धीरे-धीरे खुलकर सामने आने लगा है। इसी कड़ी में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश मामलों से जुड़े पदाधिकारी राजेंद्र पाल गौतम का एक ऐसा बयान सामने आया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।

एक ओर जहां आगामी चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को कड़ी टक्कर देने के लिए विपक्षी दल एकजुट होने का दावा कर रहे हैं, वहीं जमीनी स्तर पर सीटों की दावेदारी को लेकर अंतर्कलह या मोलभाव के संकेत भी मिलने लगे हैं। सवाल यह उठ रहा है कि क्या सीटों के इस आंकड़े के फेर में गठबंधन की गाड़ी पटरी से उतरेगी या फिर समय रहते बात बन जाएगी?

राजेंद्र पाल गौतम का बड़ा बयान और सीटों का गणित

कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने हाल ही में उत्तर प्रदेश में पार्टी की तैयारियों और आगामी रणनीति को लेकर खुलकर बात की। जब उनसे यह पूछा गया कि कांग्रेस पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में कितनी सीटों पर लड़ने की तैयारी कर रही है और समाजवादी पार्टी (SP) के साथ तालमेल का क्या फॉर्मूला रहेगा, तो उन्होंने जो आंकड़े सामने रखे, उसने सभी का ध्यान खींच लिया।

राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोर पकड़ रही थी कि कांग्रेस कम से कम 100 से 150 सीटों की मांग कर सकती है, लेकिन अंदरूनी बैठकों और दावों का दायरा इससे कहीं बड़ा हो सकता है। राजेंद्र पाल गौतम के इस बयान के बाद राज्य के राजनीतिक विश्लेषक इस बात का अनुमान लगाने में जुट गए हैं कि क्या 2022 के मुकाबले 2027 में कांग्रेस अपनी सियासी जमीन को वापस पाने के लिए कोई आक्रामक रणनीति अपना रही है।

क्या समाजवादी पार्टी के साथ बनेगी बात?

उत्तर प्रदेश में मुख्य विपक्षी दल के रूप में समाजवादी पार्टी की स्थिति मजबूत मानी जाती है। ऐसे में अखिलेश यादव की पार्टी के साथ गठबंधन में कांग्रेस का सीट शेयरिंग फॉर्मूला तय करना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा। लोकसभा चुनाव 2024 में दोनों दलों ने मिलकर अच्छा प्रदर्शन किया था, जिससे दोनों के हौसले बुलंद हैं।

गठबंधन की राह में चुनौतियां:

  • सीटों की संख्या: दोनों ही दल मजबूत सीटों पर अपना दावा छोड़ना नहीं चाहते हैं।
  • पारंपरिक सीटें: कई ऐसी विधानसभा सीटें हैं जहां सपा और कांग्रेस दोनों के स्थानीय नेता अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं।
  • जीत की क्षमता (Winability): इस बार का गठबंधन केवल संख्या पर नहीं, बल्कि जिताऊ उम्मीदवारों पर फोकस कर रहा है, जिससे पेंच फंस सकता है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ चुनावों के परिणामों को देखते हुए सपा कांग्रेस को बहुत ज्यादा सीटें देने के पक्ष में शायद ही आसानी से तैयार हो, क्योंकि सपा खुद को राज्य में बड़े भाई की भूमिका में देखती है। दूसरी ओर, कांग्रेस अपनी खोई हुई सियासी जमीन और कैडर बेस को मजबूत करने के लिए ज्यादा से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने का दबाव बना सकती है.

कार्यकर्ताओं में उत्साह, लेकिन असमंजस भी

कांग्रेस खेमे में भले ही बयानों के जरिए आक्रामक तेवर दिखाए जा रहे हों, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के मन में अभी भी संशय है। पार्टी के भीतर यह चर्चा आम है कि यदि समय रहते सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय नहीं हुआ, तो इसका नुकसान चुनाव के वक्त उठाना पड़ सकता है।

राजेंद्र पाल गौतम के इस बयान के बाद न सिर्फ कांग्रेस कार्यकर्ताओं में बल्कि विपक्षी गठबंधन के दूसरे घटकों में भी सुगबुगाहट तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या अखिलेश यादव और कांग्रेस नेतृत्व मिलकर कोई सर्वमान्य फॉर्मूला निकाल पाते हैं या फिर सीटों के इस सियासी दंगल में गठबंधन की राह मुश्किल होती है।

निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश का 2027 का रण अभी दूर है, लेकिन उसकी बिसात अभी से बिछने लगी है। राजेंद्र पाल गौतम का यह बयान महज एक शुरुआत है। जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आएगी, सीटों के इस आंकड़े पर सियासी दलों के बीच जुबानी जंग और तेज होने की पूरी उम्मीद है। जनता की नजरें भी इस बात पर टिकी हैं कि विपक्ष आपसी तालमेल बिठा पाता है या फिर टिकट बंटवारे की यह खींचतान उन्हें भारी पड़ेगी।

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रोली सिंह

रोली सिंह

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रोली सिंह पिछले 2 सालों से पत्रकारिता और न्यूज़ रिपोर्टिंग से जुड़ी हैं। वह लोकल न्यूज़ और लोगों से जुड़े मुद्दों को पढ़ने वालों तक पहुंचाने का काम...

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