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दुल्हन की पीड़ा ने जगाई उम्मीद: जकराता के उदांवा गांव को जल्द मिल सकती है सड़क

दुल्हन की पीड़ा ने जगाई उम्मीद: जकराता के उदांवा गांव को जल्द मिल सकती है सड़क

उत्तराखंड के चकराता क्षेत्र के अंतर्गत जौनसार-बावर क्षेत्र के उदांवा गांव के निवासियों में सड़क निर्माण की आस एक बार फिर जाग गई है।

हाल ही में मायके से ससुराल पहुंची एक दुल्हन को सड़क के अभाव में 18 किलोमीटर का सफर पैदल तय करना पड़ा था। इस घटना के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा मामले का संज्ञान लिए जाने पर ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए आभार जताया है। ग्रामीणों का मानना है कि इस अनूठी घटना और प्रशासनिक पहल के परिणामस्वरूप अब उनके गांव तक सड़क पहुंचने का मार्ग प्रशस्त होगा।

18 किलोमीटर का कठिन सफर और बुनियादी समस्याएं

बुल्हाड़ निवासी शर्मिला का विवाह हाल ही में उदांवा गांव के निवासी के साथ संपन्न हुआ था। विवाह के उपरांत उन्हें अपनी ससुराल पहुंचने के लिए लगभग 18 किलोमीटर की लंबी दूरी पैदल ही तय करनी पड़ी थी। पर्वतीय क्षेत्र की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सड़क मार्ग न होने के कारण इस दंपती व बरातियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था।

उदांवा एक दूरदराज का गांव है, जहां लगभग 26 परिवार निवास करते हैं और कुल आबादी करीब 450 लोगों की है। सड़क सुविधा के अभाव में यहां के ग्रामीणों का जीवन बेहद संघर्षपूर्ण बना हुआ है। दैनिक उपयोग का भारी सामान आज भी लोगों को अपनी पीठ पर लादकर घरों तक पहुंचाना पड़ता है। इसके अलावा, गांव में कोई बीमार या आपात स्थिति में मरीज आ जाए, तो उसे अस्पताल तक पहुंचाने के लिए डंडी-कंडी का सहारा लेना पड़ता है, जो बेहद जोखिम भरा और पीड़ादायक होता है।

पहले भी मिल चुकी थी चरणबद्ध स्वीकृति

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के अनुसार, इस मार्ग को लेकर पूर्व में भी प्रयास किए गए थे। बुल्हाड़ के भाजपा नेता प्रताप सिंह रावत ने जानकारी दी कि तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यकाल के दौरान थोवा से उदांवा तक पांच किलोमीटर सड़क के पहले चरण को आधिकारिक स्वीकृति प्रदान की गई थी। हालांकि, वन विभाग की क्लीयरेंस समय पर न मिलने के कारण आगे के हिस्से का काम स्वीकृत नहीं हो सका। इसके बाद सड़क निर्माण से जुड़ा प्रस्ताव भारत सरकार को भी भेजा गया था, जिसे किन्हीं कारणों से निरस्त कर दिया गया था।

विभिन्न योजनाओं के तहत नए सिरे से प्रयास

मौजूदा स्थिति को देखते हुए संयुक्त निरीक्षण के उपरांत इस दिशा में प्रक्रिया को दोबारा तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के अंतर्गत बुराइला से उदांवा तक नई सड़क का निर्माण कराए जाने के प्रयास जारी हैं। इस मार्ग से जुड़ा सर्वे कार्य पहले ही पूरा हो चुका है और इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) भी तैयार की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त, लोखंडी से मोइला टाप तक सड़क संपर्क स्थापित करने के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

पूर्व ग्राम प्रधान बहादुर सिंह, अतर सिंह, बिजन सिंह, चंदन सिंह चौहान और हीरा सिंह समेत गांव के तमाम प्रमुख लोगों ने सरकार तथा संबंधित विभागों से मांग की है कि निर्माण प्रक्रिया में तेजी लाई जाए, ताकि ग्रामीणों को लंबे समय से चली आ रही इस दुविधा से स्थायी मुक्ति मिल सके।

लोक निर्माण विभाग की ओर से तकनीकी प्रक्रिया

सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता विजय कुमार मोंगा ने परियोजना की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि उदांवा मार्ग पर पांच किलोमीटर सड़क निर्माण की स्वीकृति पहले से ही प्राप्त है। सड़क के आगे के हिस्से के लिए वन भूमि से संबंधित प्रस्ताव ऑनलाइन माध्यम से अपलोड किया गया था।

प्रस्ताव में सड़क की चौड़ाई नौ मीटर के बजाय सात मीटर रखने के निर्देश प्राप्त हुए थे, जिसके बाद पेड़ों की दोबारा गणना कराई गई है। पेड़ों की नए सिरे से गणना का यह संशोधित प्रस्ताव अब शासन को भेजने की प्रक्रिया में है, ताकि वन विभाग से आवश्यक स्वीकृतियां जल्द से जल्द प्राप्त की जा सकें।

'अब तो सड़क का निर्माण शुरू हो जाना चाहिए'

सड़क न होने के कारण चर्चा में आई दुल्हन शर्मिला ने मुख्यमंत्री द्वारा इस मामले का संज्ञान लिए जाने का स्वागत किया है। उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि अब उनकी सबसे बड़ी चाहत यही है कि क्षेत्र में सड़क निर्माण का कार्य धरातल पर शुरू हो जाए।

शर्मिला ने कहा कि यह देखकर काफी कष्ट होता है कि आज के समय में भी लोग अपनी पीठ पर भारी सामान ढोने को विवश हैं और परिवहन के लिए गाड़ियों के स्थान पर घोड़े-खच्चरों का उपयोग करना पड़ रहा है। उन्हें इस बात का आभास नहीं था कि ससुराल तक पहुंचने के लिए उन्हें इतना लंबा पैदल सफर करना पड़ेगा। उन्होंने उम्मीद जताई है कि शासन स्तर से मिले इन नए निर्देशों के बाद सड़क निर्माण के कार्य में तेजी आएगी।

रुद्र सेना के संस्थापक राकेश उत्तराखंडी ने भी इस संवेदनशील मामले पर त्वरित संज्ञान लेने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त किया है।

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नसीम अहमद

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नसीम अहमद जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं। उन...

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